पटना : बिगड़ती लाइफ स्टाइल से बढ़ रही हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, 10% महिलाएं चपेट में
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Aug 2018 8:23 AM
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पटना : खून की कमी और सेहत की अनदेखी से महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ रही हैं. पिछले एक साल में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान योजना और पटना ऑब्स एंड गायनी सोसाइटी की ओर से जांच कैंप में उन्हें चिह्नित किया गया. एक साल के आंकड़ों की स्टडी करने पर पता चला […]
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पटना : खून की कमी और सेहत की अनदेखी से महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ रही हैं. पिछले एक साल में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान योजना और पटना ऑब्स एंड गायनी सोसाइटी की ओर से जांच कैंप में उन्हें चिह्नित किया गया.
एक साल के आंकड़ों की स्टडी करने पर पता चला कि मई, 2017 से जून, 2018 तक करीब 25,754 महिलाओं की जांच करायी गयी, जिनमें 1687 में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पुष्टि की गयी है. वहीं जांच के बाद पीड़ित महिलाओं को एनएमसीएच, पीएमसीएच, आईजीआईएमएस, गर्दनीबाग आदि बड़े शहरी सरकारी अस्पतालों में रेफर कर सुरक्षित डिलिवरी करायी गयी है.
नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ नीलू प्रसाद ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का एक बड़ा कारण देर से शादी होना है. क्योंकि आजकल कई महिलाएं 35 से 40 साल में मां बन रही हैं. वहीं दूसरा कारण बिगड़ती लाइफ स्टाइल, ब्लड प्रेशर, खून की कमी और मधुमेह है. इलाज कराने आ रही इन महिलाओं को सेहत के लिए जागरूक किया जा रहा है.
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच की जा रही है. हाई रिस्क में आने वाली महिलाओं की विशेष मॉनीटरिंग की जा रही है. योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में हर महीने की नौ तारीख को जांच कैंप का आयोजन किया जाता है.
—डॉ सरिता कुमारी, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी
क्या है हाई रिस्क प्रेग्नेंसी
डॉ नीलू प्रसाद ने कहा कि अगर किसी गर्भवती महिला को खून की कमी है. ब्लडप्रेशर की समस्या है या वह शुगर से पीड़ित है, तो ये हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लक्षण हैं. इसके अलावा जिन महिलाओं के पेट में बच्चा उलटा है या फिर पूर्व में ऑपरेशन से डिलिवरी हो चुकी है, तो ऐसी महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की श्रेणी में रखा जाता है.
डॉ नीलू ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान काफी एहतियात बरतने की जरूरत होती है. लापरवाही की वजह से महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ जाती हैं. प्रेग्नेंसी के दौरान हीमोग्लोबीन का स्तर 5 से कम रह जाता है, जबकि महिलाओं में इसका लेवल 10 से 12 होना चाहिए.
10 हजार हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, 1876 की मौत
प्रेग्नेंसी को लेकर पटना के साथ ही पूरे बिहार की स्थिति खराब है. क्योंकि राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी किये आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 3,68,372 प्रसूताओं की जांच की गयी.
इनमें 9550 महिलाओं में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पायी गयी. इनमें 10 प्रतिशत ऐसी महिलाएं हैं, जो अपनी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं. अलग-अलग मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है. वहीं एंटीनेटल चेकअप (प्रसव पूर्व जांच) अभियान में पाया गया कि पूरे बिहार में पिछले एक साल में 1876 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है.
ये हैं प्रमुख कारण
यदि महिला की उम्र 35 से 40 साल के बीच है, तो ऐसे में गर्भवती को गर्भधारण से लेकर प्रसव तक अनेक प्रकार की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है
आसपास के क्षेत्र में गर्भवती महिलाएं मोटापे की शिकार हो रही हैं, ऐसे में वे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में आ गयी हैं.
गर्भवती महिलाओं में खून की कमी की समस्या सबसे अधिक सामान्य समस्या है
ऐसी गर्भवती महिलाएं जिनका एक से अधिक गर्भपात हुआ है, उन्हें भी हाई रिस्क में जोड़ा गया है
मधुमेह, बीपी, उच्च रक्तचाप, टीबी, पीलिया आदि रोग से ग्रस्त होने पर भी गर्भवती को हाई रिस्क की सूची में जोड़ा गया है
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