निजी स्कूलों की फीस का मामला : पड़ोसी राज्य से सीखने की है जरूरत, झारखंड ने कसी नकेल, यहां नियमावली भी नहीं

Updated at : 26 Jul 2018 6:49 AM (IST)
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निजी स्कूलों की फीस का मामला : पड़ोसी राज्य से सीखने की है जरूरत, झारखंड ने कसी नकेल, यहां नियमावली भी नहीं

पटना : प्राइवेट स्कूलों में हर साल फीस वृद्धि से अभिभावक परेशान हैं, तो दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधन व शिक्षा विभाग के अधिकारी इससे अनजान बने बैठे हैं. अभी तक राज्य में फीस निर्धारण को लेकर नियमावली तैयार नहीं हो सकी है. जबकि तुलनात्मक दृष्टिकोण से देखा जाये, तो 18 साल पहले स्थापित पड़ोसी राज्य […]

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पटना : प्राइवेट स्कूलों में हर साल फीस वृद्धि से अभिभावक परेशान हैं, तो दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधन व शिक्षा विभाग के अधिकारी इससे अनजान बने बैठे हैं.
अभी तक राज्य में फीस निर्धारण को लेकर नियमावली तैयार नहीं हो सकी है. जबकि तुलनात्मक दृष्टिकोण से देखा जाये, तो 18 साल पहले स्थापित पड़ोसी राज्य झारखंड में स्कूलों पर नकेल कसने की दिशा में तैयारी कर ली गयी है. झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन विधेयक को विधानसभा से पास कर दिया गया है.
इसके तहत स्कूलों में फीस निर्धारण के लिए स्कूल व जिला स्तर पर कमेटी गठन का प्रावधान किया गया है. यहां तक कि फीस निर्धारण में मनमानी करनेवाले स्कूल पर 50 हजार से 2.5 लाख रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. लेकिन बिहार में हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी फीस निर्धारण को लेकर नियमावली या प्रारूप तैयार नहीं हो सका है.
पटना हाईकोर्ट भी दे चुका है निर्देश : फीस वृद्धि के मामले को लेकर करीब डेढ़-दो वर्ष पूर्व अभिभावकों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी. पिछले मार्च माह में ही पटना हाईकोर्ट ने फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार को फीस निर्धारण के लिए नियमावली या प्रारूप तैयार कर प्रस्तुत करने का आदेश दिया था. उसके बाद राज्य सरकार द्वारा एक कमेटी व कानून बना कर कोर्ट को जानकारी दी गयी थी.
साथ ही बताया गया था कि बिहार स्कूल रेगुलेशन ऑफ कलेक्शन ऑफ फी एक्ट का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, जिसे सरल व व्यावहारिक बनाया जा रहा है. लेकिन फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है. हालांकि इसी महीने के प्रथम सप्ताह में इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम मौका देते हुए छह सप्ताह का समय दिया है.
सीबीएसई की भी है योजना, सुविधाओं के आधार पर होगा फीस का निर्धारण
दूसरी ओर फीस निर्धारण को लेकर सीबीएसई की भी योजना है. सूत्रों के अनुसार सुविधाओं के आधार पर सीबीएसई स्कूलों की फीस निर्धारित करेगा. इस क्रम में क्लास रूम, वर्चुअल क्लास रूम, आधारभूत संरचना आदि पर भी ध्यान दिया जायेगा. स्कूलों को सारी सुविधाओं तथा ली जा रही फीस की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अलपोड करने का निर्देश दिया गया था. पर अभी तक संबंध में कोई सर्कुलर या दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया है.
क्या हो सकता है फीस निर्धारण का आधार
– स्कूल में क्लास रूम कैसे हैं
– वर्चुअल क्लास रूम है या नहीं
– पठन-पाठन व्यवस्था मैनुअल मोड है या वर्चुअल
– साइंस लैब का स्तर
– खेलकूद की सुविधाएं
– इनडोर गेम्स की सुविधाएं
– स्वीमिंग पूल, कैंटीन, स्वास्थ्य सुविधाएंसुरक्षा व्यवस्था का आकलन
इसके अलावा स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था का भी आकलन किया जायेगा. इस क्रम में देखा जायेगा कि बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार कितनी महिला सुरक्षा गार्ड, सुरक्षा के कौन-कौन से इंतजाम, नजदीकी अस्पताल से टाईअप, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी के निर्देशों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था पर भी गौर किया जायेगा.
क्या कहता है अभिभावक संघ
प्रगतिशील विद्यालय अभिभावक संघ के रमेश कुमार, संजीव कुमार समेत अन्य ने कहा कि स्कूलों में फीस वृद्धि हर साल की समस्या है. इस पर अंकुश लगाने के लिए सीबीएसई, आईसीएसई, राज्य बोर्ड या राज्य सरकार के स्तर से कदम उठाये जाने चाहिए. पिछले ही वर्ष सीबीएसई के एक अधिकारी का एक बयान भी प्रकाश में आया था, जिसमें स्कूल बायलॉज कमेटी का गठन किये जाने की बात कही गयी थी. लेकिन अभी तक इस संबंध में बोर्ड की ओर से भी कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है. हाईकोर्ट में मामला चल रहा है.
लॉटरी में है नाम, फिर भी दाखिला नहीं ले रहे स्कूल
पटना : शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत कोटे की सीटों के लिए चयनित बच्चों का दाखिला लेने में अब भी कुछ स्कूल आनाकानी कर रहे हैं.
स्कूल दाखिला नहीं ले रहे हैं. इस संबंध में कई अभिभावकों ने जिला शिक्षा कार्यक्रम पदाधिकारी-सर्व शिक्षा अभियान (डीपीओ-एसएसए) से शिकायत की है. डीपीओ-एसएसए ने इसे गंभीरता से लिया है. साथ ही इसे आरटीई का उल्लंघन बताते हुए स्कूलों को चयनित बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. कहा है कि सभी विद्यालय प्रधान सभी बच्चों का शीघ्र नामांकन सुनिश्चित करें.
इससे पूर्व लॉटरी के माध्यम से पहली सूची जारी होने के बाद मई महीने में भी कुछ अभिभावकों ने डीपीओ-एसएसए कार्यालय में स्कूलों द्वारा नामांकन में आनाकानी किये जाने की शिकायत की थी. साथ ही कोटे व सामान्य सीटों पर नामांकित बच्चों के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाया था.
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