पटना : शहर में डंप हो रहे सीवरेज से दूषित हो रहा भूजल, 1000 करोड़ के एसटीपी हुए फेल
Updated at : 11 Jul 2018 8:15 AM (IST)
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नहीं हो रहा सुधार. यूरोपीय एक्सपर्ट लाने में खर्च हुए थे लाखों, नहीं मिली कामयाबी पटना : एक हजार करोड़ की लागत से शहर में नब्बे के दशक में बनाये गये चार एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) केवल दिखावटी साबित हो रहे हैं. वर्तमान में इनकी उपयोगिता शून्य साबित हो चुकी है. इन प्लांटों की स्थापना […]
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नहीं हो रहा सुधार. यूरोपीय एक्सपर्ट लाने में खर्च हुए थे लाखों, नहीं मिली कामयाबी
पटना : एक हजार करोड़ की लागत से शहर में नब्बे के दशक में बनाये गये चार एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) केवल दिखावटी साबित हो रहे हैं. वर्तमान में इनकी उपयोगिता शून्य साबित हो चुकी है.
इन प्लांटों की स्थापना में तकनीकी सुझाव के लिए यूरोपीय विशेषज्ञों खास तौर पर स्पेन के इंजीनियर्स को पटना लाया गया था. इन पर लाखों रुपये खर्च किये गये थे. एसटीपी की असफलता के कारण न केवल गंगा में गंदा पानी डाला जा रहा है, बल्कि शहर के सीवरेज से शहर का भूजल भी प्रभावित हो रहा है.
दरअसल शहर से निकल रहे सीवरेज को बेशक संप हाउस के जरिये गंगा में बहाया जा रहा है, लेकिन उससे शत-प्रतिशत गंगा पानी नदी में फेंकना संभव नहीं हो पाता. हालात यह है कि शहर में जितने भी सीवरेज हैं, उनका बीस से तीस फीसदी सीवरेज शहर के भूगर्भ या दूसरी जगहों पर डंप हो जाता है. इस चलते भूजल दूषित हो रहा है. सरकारी एजेंसियां इस स्याह सच को छिपाये हुए हैं.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अशोक घोष ने बताया कि कई वजहों से समुचित सीवरेज शहर से बाहर नहीं जा पा रहा है. इसके चलते भूजल दूषित हो रहा है. इसके लिए निगम प्रशासन को बताया भी गया है.
इस पर नियंत्रण के लिए निजी एवं संस्थाओं पर भी शिकंजा कसा गया है. अस्पतालों और दूसरी संस्थाओं को नोटिस भी जारी किया गया है. अध्यक्ष घोष ने बताया कि भूजल की पहली एक्वीफर भूजल से बेहद ज्यादा प्रभावित हुई है. शहर की करीब सौ से अधिक नयी कॉलोनियों में सीवर कनेक्ट ही नहीं हैं. इस कारण उनका सीवर शहर में ही डंप हो रहा है. यह समूचा सीवर भूजल को प्रभावित कर रहा है.
एक हजार करोड़ की लागत से बने एसटीपी रह गये सिर्फ सजावट के सामान
शहर में जलजमाव के दौरान अपने मकसद में अक्सर फेल हो जाते हैं संप हाउस
अभाव में जर्जर हो गये एसटीपी
गंगा परियोजना के तहत राजधानी के अंटाघाट, सैदपुर, पहाड़ी और बेऊर में एसटीपी इंस्टॉल किये गये थे. इन चारों एसटीपी को सीवरेज लाइन से कनेक्ट किया गया, ताकि शत-प्रतिशत गंदे पानी का ट्रीटमेंट किया जा सके. लेकिन, बीआरजेपी व निगम प्रशासन ने एसटीपी मशीनों के मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं दिया. इससे दो वर्षों में ही एसटीपी जर्जर व खराब हो गये.
रोजाना गंगा में बहाया जा रहा 105 एमएलडी गंदा पानी: चारों एसटीपी ठप होने के बाद जैसे-तैसे शहर में सीवरेज लाइन का विस्तार किया गया. सीवरेज लाइन से पानी खींचने के लिए संप हाउस बनाये गये. गंगा किनारे कुर्जी मोड़, राजापुर पुल, बांस घाट, अंटा घाट और कृष्णा घाट पर संप हाउस लगाये गये हैं. इन संप हाउसों के माध्यम से रोजाना गंगा नदी में 105 एमएलडी गंदा पानी बहाया जा रहा है. यही संप हाउस शहर में जलजमाव के दौरान अपने मकसद में फेल हो जाते हैं.
गौरतलब है कि शहर के सीवरेज बनाने को लेकर अस्सी के दशक में गंगा परियोजना बनायी गयी. इसके तहत वर्ष 1984-85 में एक हजार करोड़ की लागत से राजधानी पटना में सीवरेज लाइन बनाने और चार स्थानों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने का काम शुरू किया गया.
अब नये प्रोजेक्ट पर चल रहा है काम
करीब दो दशक पहले एक हजार करोड़ रुपये पानी में बहाने के बाद अब फिर फिर एसटीपी लगाने की योजना है. इस प्रोजेक्ट के तहत 1800 किलोमीटर सीवरेज लाइन और छह एसटीपी मशीनें लगाने की योजना है, जिस पर 2500 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. बुडको प्रशासन ने चयनित एजेंसी के माध्यम से बेऊर और पहाड़ी में एसटीपी लगाने और सीवरेज लाइन विस्तार का काम शुरू कर दिया है.
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