पटना : अब सेफ हाउस में सुरक्षित रह सकेंगे प्रेमी युगल

Updated at : 09 Jul 2018 6:05 AM (IST)
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पटना : अब सेफ हाउस में सुरक्षित रह सकेंगे प्रेमी युगल

अविवाहित और नवविवाहित युगल यहां सस्ती दर पर साल भर तक रह सकेंगे पटना : अब प्रेम और विवाह के बाद परिवार और समाज के भय से प्रेमी युगलों को कहीं छुपने और यहां-वहां भटकने की जरूरत नहीं है. बहुत जल्द राज्य सरकार इन्हें आॅनर किलिंग और सामाजिक प्रताड़ना से बचाने के लिए सभी जिले […]

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अविवाहित और नवविवाहित युगल यहां सस्ती दर पर साल भर तक रह सकेंगे
पटना : अब प्रेम और विवाह के बाद परिवार और समाज के भय से प्रेमी युगलों को कहीं छुपने और यहां-वहां भटकने की जरूरत नहीं है. बहुत जल्द राज्य सरकार इन्हें आॅनर किलिंग और सामाजिक प्रताड़ना से बचाने के लिए सभी जिले में सेफ हाउस (सुरक्षित भवन) की स्थापना करने जा रही है.
जान का खतरा होने पर वे इस सेफ हाउस में एक साल तक रह सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार ने संकल्प जारी किया है. अविवाहित और नवविवाहित युगल सेफ हाउस में एक वर्ष तक सस्ती दर पर रह सकेंगे. सेफ हाउस की सीधी निगरानी डीएम और एसपी करेंगे. प्रेमी युगल यदि वयस्क हैं तो प्रशासन दोनों की शादी के लिए आवश्यक सहयोग भी करेंगे.
सेफ हाउस के संचालन में हर माह 10-15 लाख होंगे खर्च
प्रेमी युगल को सुरक्षित आश्रय देने के लिए सरकार कई स्थानों पर सेफ हाउस स्थापित करेेगी. एक सेफ हाउस की स्थापना पर लाखों रुपये खर्च आयेगा. राज्य में 38 जिला हैं. नौ प्रमंडल हैं. प्रत्येक प्रमंडल पर एक सेफ हाउस भी खोला गया तो नौ सेफ हाउस की स्थापना पर ही करीब नौ करोड़ों रुपये सलाना खर्च होंगे. इनके संचालन अाैर सुरक्षा पर भी हर माह 10-15 लाख रुपये खर्च करने होंगे.
बिहार में लगातार बढ़ रहे आॅनर किलिंग के मामले
बिहार में आॅनर किलिंग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. मई 2018 में वैशाली में एक पिता बेटी की हत्या इसलिए करवा दी, क्योंकि वह पिता की पसंद से शादी नहीं कर रही थी. भागलपुर में साल 2017 में 5 जून को पंचायत ने एक लड़के को मौत की सजा सुनाई थी. लड़के पर आरोप था कि उसे अपनी बुआ से प्यार हो गया था. इससे दो माह पहले नाबालिग की परिवारवालों ने गला रेतकर हत्या कर दी थी.
प्यार में घर छोड़ने की घटनाओं में 22 गुनी वृद्धि
राज्य में प्यार की खातिर घर से भागने की घटनाओं में 22 गुनी वृद्धि हुई है. वर्ष 2009 में 112 घटनाएं हुईं थीं. 2012 में यह आंकड़ा बढ़कर 402 हो गया. 2015 में 1229 और 2017 में 2539 महिलाओं ने घर छोड़ दिया. इनमें से अधिकतरों को मुसीबतों का सामना करना पड़ा.
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