शौचालय घोटाला : ईडी करेगा जांच, एफआईआर दर्ज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Jul 2018 7:33 AM
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शौचालय घोटाला : मनी लांड्रिंग का भी मामला हुआ दर्ज पटना : बिहार के बहुचर्चित शौचालय घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की इंट्री हो गयी है. बीते साल उजागर हुए इस मामले में काला धन को सफेद करने के लिए मनी लांड्रिंग हुई थी. अब ईडी ने एफआईआर दर्ज कर ली है. नालंदा […]
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शौचालय घोटाला : मनी लांड्रिंग का भी मामला हुआ दर्ज
पटना : बिहार के बहुचर्चित शौचालय घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की इंट्री हो गयी है. बीते साल उजागर हुए इस मामले में काला धन को सफेद करने के लिए मनी लांड्रिंग हुई थी. अब ईडी ने एफआईआर दर्ज कर ली है.
नालंदा के हरनौत स्थित चौरिया पंचायत में शौचालय निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी. जैसे-जैसे जांच हुई, घोटाले की तस्वीर सामने आती गयी. शौचालय निर्माण में फर्जी निकासी का पता चला. पटना के प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर के आदेश पर हरनौत प्रखंड के तीन अधिकारियों सहित 84 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया गया था.
जांच के दौरान अन्य जिलों में भी ऐसे घोटाले का पता चला. साल 2012 से 2015 के बीच हुए 14 करोड़ के इस घोटाले की जांच अब ईडी भी करेगा. सूत्रों की मानें तो ईडी चार स्वयंसेवी संगठनों को नाटिस जारी करेगा. वह लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों से भी पूछताछ करेगा. दबी जुबान से यह भी कहा जा रहा है कि ईडी की जांच में कई सफेदपोश भी लपेटे में आयेंगे.
साल 2013 में बिहार सरकार ने तय किया था कि शौचालय निर्माण का पैसा किसी एजेंसी के माध्यम से व्यक्ति को नहीं दिया जायेगा. इसके बाद भी पीएचईडी के अभियंता 2012 से 2015 तक पटना के कई इलाकों में बनने वाले 10 हजार से ज्यादा शौचालय का पैसा एजेंसी को दे दिया.
उस वक्त तीन एजेंसियों सहित कई लोगों के खातों में 200 से ज्यादा चेक काट दिये गये. यह गबन उस वक्त किया गया, जब पीएचईडी से शौचालय निर्माण का खाता डीआरडीए में ट्रांसफर होने वाला था. दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गयी थी. जांच भी चल रही है.
जांच में मिले थे कई फर्जी खाते
गौरतलब है कि पुलिस ने दुल्हिन बाजार, बख्तियारपुर, मरांची, बाढ़, पंडारक आदि प्रखंडों से आयी लाभुकों की लिस्ट में अंकित 100 से अधिक खातों का सत्यापन भी कराया था तो उसमें से सभी के सभी खाते फर्जी निकले थे. इसमें जो भी खाता नंबर दिये गये थे, उनका लाभुकों से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था. यहां तक की कई खाता नंबर ऐसे भी निकले, जिसमें इस तरह का कोई खाता उस बैंक में था ही नहीं.
कई लाभुकों का खाता नंबर बख्तियारपुर के एसबीआई बैंक का था, लेकिन उस नंबर का वहां कोई खाता ही नहीं था. दुल्हिन बाजार में कई खाता ऐसे थे, जिसके मालिक कोई और थे, यहां तक की स्कूल का सरकारी खाता नंबर भी उसमें डाल दिया गया था.
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