लेन-देन में पिता भी शामिल, खाता हुआ सील
Updated at : 01 Jul 2018 6:00 AM (IST)
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फ्रीज किये गये सुमन व उसके पिता के अकाउंट में अभी भी लाखों रुपये मधेपुरा/पटना : दिल्ली के व्यवसायी से ठगी करने वाली सुमन व प्रियंका की जोड़ी को करोड़ों रुपये के लेनदेन में बैंक द्वारा भी सहयोग किया जा रहा था. मिली जानकारी के अनुसार सहरसा जिले के कहरा ब्लॉक रोड स्थित आईडीबीआई बैंक […]
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फ्रीज किये गये सुमन व उसके पिता के अकाउंट में अभी भी लाखों रुपये
मधेपुरा/पटना : दिल्ली के व्यवसायी से ठगी करने वाली सुमन व प्रियंका की जोड़ी को करोड़ों रुपये के लेनदेन में बैंक द्वारा भी सहयोग किया जा रहा था. मिली जानकारी के अनुसार सहरसा जिले के कहरा ब्लॉक रोड स्थित आईडीबीआई बैंक की शाखा में सुमन के नाम से दो खाताें का संचालन हो रहा है. सुमन कुमार द्वारा एक सेविंग्स व एक करंट अकाउंट खोला गया था. इसके अलावा एक बचत खाता सुमन के पिता सहदेव मिस्त्री के नाम से भी है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुमन द्वारा गिरफ्तारी से पूर्व 26 जून को पटना में इस बैंक के एक खाते से 40 हजार रुपये की निकासी की गयी थी. गिरफ्तारी के बाद से खाते में जमा व निकासी नहीं हुई है.
क्राइम ब्रांच के निर्देश पर फ्रीज किये गये सुमन व उसके पिता के अकाउंट में अभी भी लाखों रुपये जमा हैं. यह जांच का विषय है कि इतने बड़े पैमाने पर बैंक में राशि की लेनदेन करने वाले सुमन से बैंक द्वारा शपथ पत्र या अन्य कागजात लिये गये या नहीं. इतना ही नहीं लाखों रुपये की जमा-निकासी की जानकारी बैंक द्वारा आर्थिक अपराध इकाई को क्यों नहीं दी गयी. कई सवाल हैं, जिनके जरिये क्राइम ब्रांच व स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार लोगों से पूछताछ कर सकता है.
आरटीजीएस व एनआईएफटी से करता था ट्रांसफर
आईडीबीआई बैंक में सुमन व
उसके पिता सहदेव मिस्त्री के
खाते से अत्यधिक राशि की जमा व निकासी आरटीजीएस व एनआईएफटी के माध्यम से की जाती थी. आखिर इन ठगों के खाते में बड़ी रकम का लेनदेन किसके साथ किया जाता था, इसकी तफ्तीश की जा सकती है. सुमन के इस प्रकार के कई एकाउंट जिले के अन्य बैंकों में भी हैं. बैंक की शाखा में दर्ज सभी खाताधारकों के लेनदेन की निगरानी आईडीबीआई मुख्यालय कोलकाता से की जाती है. किसी भी खाते के संदिग्ध संचालन पर बैंक के वरीय अधिकारी स्थानीय शाखा को मेल कर जांच का निर्देश भी देते हैं. मिली जानकारी के अनुसार मुख्यालय या स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए क्या-क्या पहल की गयी थी. इसे खंगालने की जरूरत है. जब सहरसा के आईडीबीआई बैंक प्रबंधक मनोज कुमार से एकाउंट के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास किया गया, तो उनकी तरफ से दो टूक जवाब दिया गया कि मैं आपको इस बारे में नहीं बता सकता. उस अकाउंट के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकता.
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