VIDEO : इसलिए हुआ सीएम नीतीश के काफिले पर हिंसक हमला, बक्सर कांग्रेस विधायक का खुलासा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Jan 2018 1:00 PM
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विकास समीक्षा यात्रा के दौरान गत शुक्रवार को बक्सर जिले के डुमरांव प्रखंड के नंदन गांव में हुए हिंसक हमले मामले में एक नया मोड़ आ गया है. बक्सर सदर विधायक और कांग्रेस नेता संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने इस मामले को लेकर खुलासा किया है. उन्होंने […]
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विकास समीक्षा यात्रा के दौरान गत शुक्रवार को बक्सर जिले के डुमरांव प्रखंड के नंदन गांव में हुए हिंसक हमले मामले में एक नया मोड़ आ गया है. बक्सर सदर विधायक और कांग्रेस नेता संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने इस मामले को लेकर खुलासा किया है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि यह कुछ लोगों द्वारा जान बूझकर की गयी लापरवाही का परिणाम है. उन्होंने कहा कि जिस गांव में मुख्यमंत्री जाने वाले थे, उस गांव के दलितों के वार्ड को खुले में शौच से मुक्त नहीं कराया गया. विधायक के मुताबिक दलित बस्ती के महिला और पुरुष माननीय मुख्यमंत्री से मिलकर इस बात की जानकारी देना चाहते थे कि उनके वार्ड में कुछ भी काम नहीं हुआ है. वह मुख्यमंत्री को यह बताना चाहते थे कि गांव के बाकी वार्डों में विकास हुआ है, लेकिन उनके वार्ड में विकास नहीं हुआ है. इतना ही नहीं विधायक ने बताया कि दलितों की आवाज को कुछ लोगों द्वारा जबरन दबाने का काम किया जा रहा था.
विधायक ने हमले के बारे में कहा कि यह साफ तौर पर पुलिस की निष्क्रियता है. विधायक ने कहा कि पुलिस पूरे मामले को समझ रही थी और जान रही थी. पुलिस ने समय रहते हुए इस बात को दबाने का प्रयास नहीं किया. यदि किया होता, तो यह अनुचित प्रयास सफल नहीं होता. मुन्ना तिवारी कांग्रेस नेता हैं और बक्सर जिले में इनकी बड़ी पकड़ बतायी जाती है. खासकर इनके पैतृक पंचायत कोरान सराय के इलाकों और डुमरांव के काफी इलाकों में इनकी बात को लोग सुनते हैं. मुन्ना तिवारी ने साफ तौर पर मुख्यमंत्री के काफिले पर हमले की सारी कहानी बयां कर दी है. उन्होंने दलितों की आवाज दबाने और पुलिस की लापरवाही को इस घटना का बड़ा कारण बताया है.
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गौरतलब हो कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले पर 12 जनवरी को समीक्षा यात्रा के दौरान पथराव किया गया था. गांव के स्थानीय ग्रामीणों और कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा यह एक हिंसक हमला किया गया था. वह अपनी विकास समीक्षा यात्रा के दौरान नंदन गांव जा रहे थे. मुख्यमंत्री को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था. मुख्यमंत्री ने घटना के बाद कहा था कि लोगों को उकसाने और गुमराह करने की राजनीति में लिप्त लोगों को विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता से दिक्कत है. लेकिन हमें उनकी परवाह नहीं है. उन्होंने वहां जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि राज्य की प्रगति को लेकर मेरी प्रतिबद्धता से कुछ लोग परेशान हैं. वे लोगों को गुमराह करने और उकसाने की कोशिश करते हैं लेकिन लोगों को इस तरह की छोटी चीजों को लेकर व्यग्र नहीं होना चाहिए.
इस बीच, सत्तारूढ़ भाजपा-जदयू गठबंधन और राजद के बीच जुबानी जंग तेज हो गयी थी. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता मंगल पांडेय ने राजद का नाम लिये बगैर घटना की निंदा की थी. उन्होंने कहा कि यह घटना प्रायोजित थी, जिसमें एक खास राजनीति दल से संबंध रखने वाले लोग शामिल थे. जदयू प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय सिंह ने इस घटना के लिए राजद को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि यह विपक्षी दल के चरित्र को दिखाता है.
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