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बिहार की सियासत के आईने में गुजरात- हिमाचल प्रदेश का चुनाव परिणाम और प्रभाव, पढ़ें

पटना : कहते हैं कि सियासत में जीत-हार लगी रहती है, हालांकि, उसके प्रभाव दूरगामी होते हैं. राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें, तो गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव में भाजपा की जीत के बाद इसका असर बिहार जैसे राजनीतिक रूप से जागरूक प्रदेश पर भी देखने को मिलेगा. जीत की सूचना के बाद बिहार के […]

पटना : कहते हैं कि सियासत में जीत-हार लगी रहती है, हालांकि, उसके प्रभाव दूरगामी होते हैं. राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें, तो गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव में भाजपा की जीत के बाद इसका असर बिहार जैसे राजनीतिक रूप से जागरूक प्रदेश पर भी देखने को मिलेगा. जीत की सूचना के बाद बिहार के भाजपा नेताओं के बयान से यह स्पष्ट है कि वे अब खुलकर मोदी लहर का प्रचार-प्रसार करेंगे और केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता के बीच फ्रंट पर रखेंगे. परिणाम के तुरंत बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा किइस परिणामने जीएसटी और नोटबंदी का विरोध करनेवालों को जनता ने करारा जवाब दिया है.

सुशील मोदी ने आगे कहा कि जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स और नोटबंदी की तुलना आपातकाल से करनेवालों को उनका जवाब मिल गया है. जो लोग व्यापारियों को भड़काने का प्रयास कर रहे थे, गुजरात में भाजपा की बढ़त ने स्पष्ट कर दिया है कि लोगों ने जीएसटी और नोटबंदी पर मुहर लगा दी है. उक्त बातें गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कही. उन्होंने कहा है कि ‘यह विकास की जीत है. जातिवाद का जहर घोलनेवालों की हार है.’ हिमाचल में बहुमत से भाजपा सरकार बनायेगी. गुजरात में भी हमलोग जीतने में कामयाब होंगे. वहीं भाजपा नेता और हिमाचल प्रभारी मंगल पांडेय ने अमित शाह की रणनीति को जीत का कारण बताते हुए विरोधियों की आलोचना की है.

वैसे भी पहले से बिहार के दो दलों राजद और कांग्रेस नेताओं की निगाहें गुजरात चुनाव के परिणाम पर टिकी हुई थीं. वह यह मानकर चल रहे थे कि गुजरात चुनाव में भाजपा की जीत के बाद नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़ जायेंगी. वहीं वरिष्ठ पत्रकार और बिहार की राजनीति को नजदीक से जानने वाले प्रमोद दत्त कहते हैं किबिल्कुलऐसा नहीं होगा, क्योंकि भाजपा की गुजरात जीत बहुत बड़ी नहीं है और भाजपा अंदर से आत्ममंथन में व्यस्तहोगी औरबिहारमें पूरी तरह अपने को मजबूत करने के लिए नीतीश के विकास कार्यों को सपोर्ट करेगी. हां, यह तय है कि भाजपा की जीत के बाद जदयू के चाहने के बावजूद भी बीजेपी कांग्रेस को टूटने नहीं देगी और तोड़ने नहीं देगी, क्योंकि अब भाजपा का एक धड़ा यह नहीं चाहेगा कि नीतीश संख्या बल में मजबूत हों.

गुजरात चुनाव को लेकर पहले दी गयी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया और जीत के बाद फोन कर अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गयी बधाई कुछ अलग कहानी कह रही है. प्रमोद दत्त कहते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में नीतीश भाजपा के साथ रहेंगे और यह दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे. हालांकि, उस अवस्था में नीतीश कुमार या उनकी पार्टी को कोई बड़ा पद भी केंद्र सरकार में मिल सकेगा. मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश विधान सभा चुनाव में जीत के लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं भारतीय जनता पार्टी को बधाई. गुजरात में जीत का दावा करने वाली कांग्रेस हिमाचल भी हार गयी.

उधर, कांग्रेस के चुनाव हारने का असर बिहार में कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों पर पड़ेगा. अब कांग्रेस को फिर लालू यादव जैसे नेताओं की मर्जी के हिसाब से चलना होगा. लालू यादव बिहार में बड़ी पार्टी हैं और कांग्रेस को बिहार की सत्ता पर काबिज होने के लिए एक विश्वसनीय सहयोगी की आवश्यकता है. कांग्रेस अगर चुनाव जीत गयी होती, तो स्थिति बिल्कुल उल्टा होती और लालू को हावी होने का मौका नहीं मिलता, लेकिन अब बिहार में पहले की ही तरह लालू की चलती कांग्रेस पर जारी रहेगी और लालू अपने हिसाब और फायदे को देखते हुए गठबंधन करेंगे. कुछ मिलाकर सियासी प्रभाव से बिहार अछूता नहीं रहेगा. गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव का असर पूरे देश के साथ बिहार पर भी पड़ेगा.

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