बिहार सृजन घोटाला : जिस अभियुक्त की थी तलाश, वह पुलिस के साथ घूमता मिला
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Nov 2017 6:32 AM (IST)
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पटना : सृजन घोटाला की जांच में कई अधिकारियों की मिलीभगत तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सामने आ ही रही है. इसमें मुख्य अभियुक्तों को भगाने और बचाने में कुछ अधिकारी भी शक के घेरे में हैं. हाल में इस मामले के एक प्रमुख आरोपित को किसी एक जिले में तैनात एक एसडीपीओ की […]
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पटना : सृजन घोटाला की जांच में कई अधिकारियों की मिलीभगत तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सामने आ ही रही है. इसमें मुख्य अभियुक्तों को भगाने और बचाने में कुछ अधिकारी भी शक के घेरे में हैं. हाल में इस मामले के एक प्रमुख आरोपित को किसी एक जिले में तैनात एक एसडीपीओ की सरकारी जिप्सी पर पटना के बोरिंग रोड इलाके में खासतौर से देखा गया है.
पुलिस को इसकी सूचना भी लगी, तो उसे पकड़ने के लिए पुरजोर कोशिश भी की गयी. परंतु उसे बचाने वाले अधिकारियों की जुगत के आगे पुलिस का प्रयास विफल हो गया और वह बड़ी आसानी से पुलिस की नजरों से फिर से ओझल हो गया. उसके संरक्षक अधिकारी उसे बचाकर निकालने में सफल हो गये और पुलिस फिर से उसकी तलाश में जुट गयी है.
सूत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार, एक आईपीएस स्तर के अधिकारी के घर पर आरोपित ने बाकायदा पनाह ले रखी थी. यह समझा जा रहा है कि इस आईपीएस अधिकारी की भी बड़े स्तर पर सृजन घोटाले में संलिप्तता है. लाखों रुपये की दलाली पहुंचाने वाले इस अारोपित के कर्ज का हक अदा करते हुए उसके छिपाने और किसी सुरक्षित जगह पर भागने का पूरा बंदोबस्त तक किया है.
हालांकि वर्तमान में ये आईपीएस अधिकारी ‘वेटिंग फॉर पोस्टिंग’ में सचिवालय में तैनात हैं. इन पर आरोपों की कमी नहीं है, लेकिन फिर भी यह साहब आरोपित अधिकारी के लिए रिस्क लेने से पीछे नहीं हटे तथा हर तरह से पटना में आरोपित को सुरक्षित रखने और ‘गायब’ होने तक में काफी मदद की है. ऐसा नहीं है कि अकेले इसी आईपीएस ने उसकी मदद की है.
यह जरूर है कि इन्होंने सबसे ज्यादा और अहम तरीके से मदद की है. उत्तर बिहार के एक जिले में तैनात एक एसडीपीओ साहब तो इस पर इतना मेहरबान हैं कि उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी ही इन्हें घूमने के लिए दे दी थी. ताकि किसी पुलिस वाले को उस पर शक तक नहीं हो सके. आरोपित वह शख्स है, जो सृजन घोटाले से मुख्य रूप से लाभ लेने वालों में एक है.
शुरुआत में यह शख्स भागलपुर के तत्कालीन डीएम केपी रमैय्या की मदद से इस संस्थान से जुड़ा और सिलाई मशीन महिलाओं के बीच बांटने का टेंडर लेकर जुड़ा. धीरे-धीरे वह संस्थान की प्रमुख स्वर्गीय मनोरमा देवी का इतना करीबी बन गया कि इसमें अहम भूमिका निभाने लगा. अधिकारियों और नेताओं के साथ लाइजनिंग में अहम भूमिका निभाने लगा. इस हेरफेर में उसने अवैध तरीके से करोड़ों रुपये कमाये. अगर यह गिरफ्त में आता है, तो काफी बड़ी जानकारी इसमें उजागर हो सकती है.
पंकज की जमानत पर 13 को होगी सुनवाई
पटना. सीबीआई की पटना स्थित विशेष कोर्ट में मंगलवार को भागलपुर जिले के सृजन घोटाले के आरोपी पंकज कुमार झा के
जमानत आवेदन पर सुनवाई हुई. विशेष मजिस्ट्रेट गायत्री कुमारी की कोर्ट ने सीबीआई को इस संबंध में केस डायरी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. इस मामले में अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी. एक दिन पहले ही विशेष कोर्ट ने सोमवार को सृजन घोटाला में जेल में बंद 17 आरोपियों की रिमांड अवधि 13 नवंबर तक बढ़ा दी है.
इसी मामले में जेल में बंद सुधांशु कुमार दास,विजय कुमार गुप्ता और अशोक कुमार अशोक की जमानत आवेदन पर सुनवाई हुई. सीबीआई की विशेष अदालत ने तीनों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए केस डायरी उपलब्ध कराने के लिए रिमाइंडर जारी किया.
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