सीवान तेजाबकांड :..जब तीनों बेटे को याद कर फफक पड़े, कहा, उन्‍होंने सीवान की आजादी के लिए दी है शहादत

Updated at : 31 Aug 2017 7:06 AM (IST)
विज्ञापन
सीवान तेजाबकांड :..जब तीनों बेटे को याद कर फफक पड़े, कहा, उन्‍होंने सीवान की आजादी के लिए दी है शहादत

पटना : पटना हाइकोर्ट ने बहुचर्चित तेजाबकांड में सीवान के पूर्व राजद सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को कोई राहत नहीं दी है. हाइकोर्ट ने शहाबुद्दीन समेत चार लोगों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. जस्टिस केके मंडल एवं जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने शहाबुद्दीन की अपील याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुनाया, […]

विज्ञापन
पटना : पटना हाइकोर्ट ने बहुचर्चित तेजाबकांड में सीवान के पूर्व राजद सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को कोई राहत नहीं दी है. हाइकोर्ट ने शहाबुद्दीन समेत चार लोगों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है.
जस्टिस केके मंडल एवं जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने शहाबुद्दीन की अपील याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुनाया, जिसमें सीवान की विशेष अदालत के फैसले को सही ठहराया. खंडपीठ ने 30 जून को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था.
इससे पहले नौ दिसंबर, 2015 को सीवान की विशेष अदालत के सत्र न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने मो शहाबुद्दीन समेत चार लोगों को दोषी ठहराया था. अदालत ने दो भाइयों की तेजाब से नहला कर हत्या किये जाने के आरोप में शहाबुद्दीन को भारतीय दंड विधान की धारा 302, अपहरण के आरोप में 364 और षड्यंत्र में शामिल होने के आरोप में 120 (बी) के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी थी. अदालत ने इसी मामले में तीन अन्य नामजद अभियुक्त राज कुमार साह, मो आरिफ हुसैन और शेख असलम को भी भादवि की धारा 364 (ए) और 323 के तहत दोषी करते हुए उम्रकैद और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी थी.
16 अगस्त, 2004 में सीवान के मुफ्फसिल थाने के गोशाला रोड स्थित एक जमीन विवाद को लेकर चल रही पंचायत के दौरान मारपीट हुई, जिसके बाद चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के तीन पुत्र गिरीश कुमार, सतीश कुमार और राजीव रौशन का अपहरण कर लिया गया था.
सीवान : सीवान के विशेष कोर्ट के फैसले को बरकरार रखने के फैसले पर चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू ने खुशी जाहिर की. फैसले के बाद उन्होंने कहा कि मेरे तीनों बेटों ने सीवान की आजादी के लिए अपनी जान दी है.
तीनों बेटे की हत्या नहीं हुई, बल्कि वह शहीद हुए हैं. शहाबुद्दीन जैसे खूनी दरिंदे को उम्रकैद नहीं, बल्कि फांसी की सजा सुनायी जानी चाहिए, तब जाकर मेरे कलेजे को ठंडक मिलेगी. उनकी बगल में बैठी उनकी पत्नी कलावती देवी तो तीनों को याद कर रोने लगीं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन