बाढ़पीड़ितों में जगी आस, बसेगा आशियाना, दर्द पर लगेगा मरहम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Aug 2017 9:50 AM

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पूर्णिया : बाढ़ ने सचमुच इस बार भारी तबाही मचायी. सीमांचल के इस इलाके में बाढ़ कोई नयी बात नहीं है, लेकिन जिस कदर इस वर्ष बाढ़ ने तबाही का बड़ा मंजर दिखाया है, वह अभूतपूर्व माना जा रहा है. इलाके की महानंदा, परमान, कनकई और कोसी की कई छोटी-छोटी धाराओं ने अपने दायरे से […]

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पूर्णिया : बाढ़ ने सचमुच इस बार भारी तबाही मचायी. सीमांचल के इस इलाके में बाढ़ कोई नयी बात नहीं है, लेकिन जिस कदर इस वर्ष बाढ़ ने तबाही का बड़ा मंजर दिखाया है, वह अभूतपूर्व माना जा रहा है. इलाके की महानंदा, परमान, कनकई और कोसी की कई छोटी-छोटी धाराओं ने अपने दायरे से बाहर निकल कर बड़ी आबादी को प्रभावित किया. ऐसा पहली बार हुआ कि पूर्णिया से लेकर कटिहार, अररिया के रास्ते किशनगंज तक बाढ़ की तबाही देखने को मिली. इतना ही नहीं अररिया व किशनगंज शहर भी पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गया. फिलहाल पानी कम होने के बाद लोग जिंदगी शुरू करने की जद्दोजहद में जुटे हैं, लेकिन बर्बादी को वर्षों भुला नहीं पायेंगे.
शनिवार को हवाई सर्वे के दौरान पीएम ने तबाही देखी, जबकि चार दिन पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी सीमांचल के चारों जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाके का जायजा ले चुके हैं. समीक्षा बैठक में भी मुख्य सचिव ने जहां हर सेक्टर में क्षति होने की बात कही, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी प्रधानमंत्री को क्षति से अवगत कराया और केंद्र से सहयोग मांगा. हवाई सर्वे के बाद पीएम ने भी माना कि बाढ़ से गैर परंपरागत क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने बिहार को हर संभव सहायता का आश्वासन भी दिया. प्रधानमंत्री की राहत घोषणा व हर संभव सहायता का आश्वासन मिलने के बाद बाढ़ पीड़ितों में यह आस जगी है कि शायद अब उनका आशियाना फिर से बसेगा और उनके दर्द पर मरहम लगेगा. पीएम के दौरे को लेकर सीमांचल के चारों जिलों के जनप्रतिनिधि पहुंचे थे.
जनप्रतिनिधियों ने भी माना कि बाढ़पीड़ितों को जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई के लिए केंद्र का सहयोग तो चाहिये ही. हालांकि प्रधानमंत्री के तत्काल 500 करोड़ के सहयोग के बाद इन जनप्रतिनिधियों ने संतोष तो जताया लेकिन इसे और बढ़ाने की भी मांग की. अररिया के सिकटी विधायक विजय कुमार मंडल ने कहा कि जो क्षति हुई है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है. घर बह गये तो फसलें बर्बाद हो गयी. स्थिति यह है कि सैकड़ों परिवार सड़क पर आ गये. सरकार के द्वारा राहत कार्य चलाया जा रहा है, लेकिन उसकी भरपाई संभव नहीं है.
अब जब प्रधानमंत्री ने खुद बाढ़ से हुई तबाही को नजदीक से देखा तो आस है कि केंद्र बढ़-चढ़ कर राज्य सरकार को सहयोग करेगा ताकि राज्य सरकार राहत अभियान को और तेजी से चला सके. वहीं दूसरी ओर विधान पार्षद डॉ दिलीप जायसवाल ने कहा कि अब सरकार की प्राथमिकता पीड़ितों के पुनर्वास की है. पीड़ितों तक हर हाल में राहत पहुंचायी जायेगी. पीएम के आगमन से अब यह अभियान और जोर पकड़ेगा. इधर, बाढ़ का पानी निकलने के बाद सभी विभागों के द्वारा क्षति का आकलन किया जा रहा है. सर्वे के बाद ही क्षति का सही आंकड़ा सामने आ पायेगा.
प्रधानमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हरसंभव सहायता करने का विश्वास दिलाया है. बाढ़ में डूबने वाले लोगों के प्रत्येक परिजन को प्रधानमंत्री के तरफ से 02 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गयी है, जो स्वागत योग्य है. सांसद ने कहा कि अब बाढ़ में मरने वालों को मुख्यमंत्री सहायता राशि 04 लाख के अतिरिक्त 02 लाख होगी औ इस प्रकार कुल मुआवजे की राशि 06 लाख होगी. कहा कि उन्हें भरोसा है कि भविष्य में भी बाढ़ पीड़ितों को और मदद मिलेगी.
संतोष कुशवाहा, सांसद
प्रधानमंत्री से जनप्रतिनिधियों की दो बार हुई मुलाकात : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से लगभग 10 मिनट पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि और मुलाकात के लिए आये हुए अन्य वीआइपी रनवे की ओर बढ़ गये. विशेष विमान से उतरने के बाद प्रधानमंत्री चल कर कतारबद्ध इन लोगों से मिले और उनका अभिवादन स्वीकार किया. इसके बाद तुरंत ही प्रधानमंत्री पास ही हेलीपेड पर खड़े हेलीकॉप्टर पर सवार होकर हवाई सर्वेक्षण के लिए निकल गये. वहीं हवाई सर्वेक्षण से 11:05 बजे लौटने के बाद प्रधानमंत्री सीधे मीटिंग हॉल में चले गये. मीटिंग समाप्त होने के बाद जब वे दिल्ली रवाना होने के लिए निकले तो एयरपोर्ट पर मौजूद जनप्रतिनिधियों से उन्होंने मुलाकात की और विशेष विमान पर सवार होकर वापस लौट गये.
प्रधानमंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई दौरा कर यह महसूस किया कि स्थिति बहुत ही खराब है. बाढ़ से भारी तबाही हुई है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सबसे पहले पुनर्वास और यातायात सेवा बहाल करने पर काम किया जाये. केंद्र सरकार द्वारा 500 करोड़ रुपये की राशि दी जा रही है, जबकि तत्काल 800 करोड़ की आवश्यकता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सप्ताह के अंदर बाढ़ पीड़ितों की सूची तैयार करवाये. इस कार्य में पदाधिकारी कोताही नहीं करें और खुले दिल से समीक्षा कर सूची तैयार करें.
दिलीप जायसवाल, एमएलसी
बाढ़ की विभीषिका को लेकर प्रधानमंत्री पूर्व से ही चिंतित रहे हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में केंद्र सरकार द्वारा 15 हजार मिट्रिक टन अनाज भेजा गया था. हमलोगों ने अपनी भावना प्रधानमंत्री के सामने व्यक्त किया है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थायी निदान निकले. क्योंकि हर साल बाढ़ आने से लाखों लोग अनाथ हो जाते हैं. प्रधानमंत्री कोसी और सीमांचल के बाढ़ नियंत्रण के लिए ठोस योजना बनायेंगे. वे चाहते हैं कि सीमांचल के इलाके में हर पंचायत में सरकारी स्तर पर स्थायी रूप से पांच नाव की व्यवस्था करायी जाये.
विजय खेमका, विधायक
पीएम की घोषणा पर नेताओं ने जताया संतोष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को बाढ़ प्रभावित सीमांचल के दौरे पर थे. उन्होंने अपनी आंखों से सैलाब से उपजी तबाही के मंजर को देखा. उसके बाद उन्होंने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर तत्काल सैलाब से उपजे घाव पर मरहम लगाने के लिए 500 करोड़ रुपये की पैकेज की घोषणा सीमांचल समेत पूरे सूबे के बाढ़ पीड़ितों के लिए की.
इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे. हालांकि इस समीक्षा बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल होने की इजाजत नहीं दी गयी. बैठक का हिस्सा नहीं बनने की कसक इन जनप्रतिनिधियों के चेहरे पर जरूर देखी जा सकती थी. संभव था कि अगर इन जनप्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने का मौका मिलता तो वे आमलोगों के दुख-दर्द को उन शब्दों में व्यक्त कर पाते, जो उन्होंने पीड़ितों के साथ रह कर महसूस किया और इसका साक्षी बने थे. बहरहाल इन राजनेताओं ने प्रधानमंत्री की पैकेज की घोषणा पर संतोष जताया है.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बाढ़ पर की चर्चा
प्रधानमंत्री की चूनापुर सैन्य हवाई अड्डे पर आगवानी के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सुबह 08:15 बजे ही एयरपोर्ट पहुंच गये थे. उसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पहुंचने का सिलसिला आरंभ हुआ. सबसे पहले विधायक लेसी सिंह एयरपोर्ट पहुंची. उसके बाद क्रमश: सांसद संतोष कुशवाहा, मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि, विधायक विजय खेमका, पूर्व सांसद उदय सिंह आदि पहुंचे.
इन स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मिल कर बाढ़ की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बताया कि बाढ़ के बाद स्वास्थ्य संबंधी परेशानी सामने आने लगी है. इसके अलावा विस्थापितों के पुनर्वास के लिए तत्काल काम करने की आवश्यकता है. सांसद संतोष कुशवाहा ने किसानों को हुई क्षति का मुद्दा उठाया, जबकि विधायक लेसी सिंह ने धमदाहा में बाढ़ से उपजी स्थिति से अवगत कराया.
बाढ़पीड़ितों के लिए 500 करोड़ नाकाफी : रंजीत रंजन
पूर्णिया. राज्य के 18 जिले के लोग बाढ़ की त्रासदी से प्रभावित हैं. लाखों लोग घर से बेघर हो गये हैं. पूरे गांव के गांव बाढ़ के पानी में डूब गया है. लोगों को भूखे रहने की नौबत आ गयी है.
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाढ़ त्रासदी के 15 दिन बाद हेलीकॉप्टर से मुआयना करने आये हैं और बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए बिहार को मात्र 500 करोड़ रुपये देने की बात कह कर बाढ़ पीड़ितों के साथ मजाक किया है. उक्त बातें सुपौल सांसद रंजीत रंजन ने शनिवार को स्थानीय कोर्ट स्टेशन स्थित अपने आवास पर प्रेसवार्ता के दौरान कही. श्री रंजन ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए 500 करोड़ रुपये ऊंट के मुंह में जीरा के फौरन के बराबर है. इतने कम रुपये से लोगों को राहत पहुंचाना मुश्किल है.
श्रीमती रंजन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के लोगों के साथ छल किया है. बाढ़ का पानी सूख जाने के बाद बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का हेलीकॉप्टर से निरीक्षण किया है. हेलीकॉप्टर से बाढ़ पीड़ितों का दुख तकलीफ समझना असंभव है. प्रधानमंत्री मोदी ने मात्र औपचारिकता पूरा की है. जमीन के दुख-दर्द को आसमान से नहीं देखा जा सकता है.
उन्होंने कहा कि यूपीए के सरकार में केंद्र सरकार ने बिहार को बाढ़ राहत के लिए 1100 करोड़ रुपये दिये थे, लेकिन रुपये बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचने से पहले ही नीतीश सरकार में बंदरबांट हो गया. बिहार में भ्रष्टाचार व्याप्त है. इससे बाढ़ पीड़ितों के पास 20 प्रतिशत भी राहत नहीं पहुंच पाती है और सरकार में बैठे लोग एवं अधिकारी डकार जाते हैं. कहा कि नदी और नहर को माफियाओं ने बेच दिया है, जिसकी वजह से पानी की निकासी नहीं हो पाती है और पानी विकराल रूप लेकर लोगों को प्रभावित करती है. प्रेसवार्ता में युवा कांग्रेस के लोकसभा अध्यक्ष जयवर्द्धन सिंह, मनोज यादव एवं संजय पोद्दार आदि उपस्थित थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमांचल में बाढ़ की तबाही से उपजे दर्द को महसूस किया है. यही वजह है कि उन्होंने राज्य के बाढ़ पीड़ितों के लिए 500 करोड़ देने का फैसला किया है. लेकिन सीमांचल के लिए कुछ अलग पैकेज की जरूरत है. वजह यह है कि पहले से ही यह इलाका आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ है. लेकिन संतोष की बात यह है कि प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में और मदद की संभावना है. लिहाजा हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में खासकर विस्थापितों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकार को मदद करेगी.
लेसी सिंह, विधायक
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