आपराधिक रिकॉर्ड न हो तो शराब के केस में मिल सकती है बेल

Updated at : 21 Jul 2017 8:07 AM (IST)
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आपराधिक रिकॉर्ड न हो तो शराब के केस में मिल सकती है बेल

पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद शराब पीने या बिक्री करने या रखने के मामले में गिरफ्तार होने पर जमानत देने को लेकर नयी व्याख्या की है. जस्टिस डाॅ रवि रंजन की एकलपीठ ने गुरुवार को कहा कि किसी व्यक्ति का कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा हो और […]

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पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद शराब पीने या बिक्री करने या रखने के मामले में गिरफ्तार होने पर जमानत देने को लेकर नयी व्याख्या की है.
जस्टिस डाॅ रवि रंजन की एकलपीठ ने गुरुवार को कहा कि किसी व्यक्ति का कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा हो और वह शराबबंदी मामले में गिरफ्तार किया गया हो, तो उसे नियमित जमानत दी जा सकती है. कोर्ट ने अधिकतर मामलों में अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि शराब निरोधक कानून बनाने वाले ही इसका उल्लंघन करें, तो ऐसे लोगों को मेरी समझ में जमानत नहीं मिलनी चाहिए. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक इतिहास छिपा कर जमानत हासिल करने पर वह अपने आदेश को वापस भी ले सकता है. जस्टिस डाॅ रवि रंजन ने शराब के रिकाॅर्ड 200 से अधिक मामलों का निष्पादन किया.
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह पटना हाइकोर्ट के जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह की एकलपीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया था कि शराब के मामले में अभियुक्त बनाये गये लोगों को अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी. वहीं, दूसरी ओर मामले में गिरफ्तार या आत्मसमर्पण करने वाले अभियुक्तों को निचली अदालत जमानत पर छोड़ सकती है. हाइकोर्ट ने नयी शराब नीति कानून की धारा 76(2) को स्पष्ट करते हुए कहा था कि इसके तहत किसी भी अभियुक्त को शराब के मामले में अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है, जब तक कि कोर्ट द्वारा उक्त धारा को गैर संवैधानिक नहीं घोषित कर दिया जाता है.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि निचली अदालत शराब पीने के मामले में पकड़ाये या आत्मसमर्पण किये अभियुक्तों की जमानत नामंजूर करती है, तो उसे अपने आदेश में इस बात का स्पष्ट उल्लेख करना होगा कि किन कारणों से उसने जमानत नामंजूर की है.
अदालत ने इस संबंध में हाइकोर्ट के आदेश की प्रति सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भेजने का भी आदेश हाइकोर्ट प्रशासन को दिया है. अदालत ने इसकी एक प्रति हाइकोर्ट के निबंधक को भी देने का आदेश दिया, ताकि ऐसे मामलों के अभियुक्त अग्रिम जमानत याचिका दायर न कर सके.
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