राज्य के 10 जिले स्कूली बच्चों की अपार आइडी बनाने में बरत रहे सुस्ती

Author Amber md
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राज्य के 10 जिले स्कूली बच्चों की अपार आइडी बनाने में बरत रहे सुस्ती

जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भेजे गये पत्र में कहा है कि 2025 में मात्र में 58.50 प्रतिशत बच्चों का ही अपार आइडी बनी है

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अब तक राज्य के 58.50 प्रतिशत बच्चों का ही बना अपार आइडी

संवाददाता, पटना

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने स्कूलों में नामांकित बच्चों का ””ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक एकाउंट रजिस्ट्री ””(अपार आइडी) के निर्माण में सुस्ती बरतने पर सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाया है. जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भेजे गये पत्र में कहा है कि 2025 में मात्र में 58.50 प्रतिशत बच्चों का ही अपार आइडी बनी है. अभी लगभग राज्य के 85 लाख बच्चों की अपार आइडी के निर्माण का कार्य शेष है. परियोजना परिषद ने जारी रिपोर्ट में कहा है कि 30 दिसंबर 2025 से पांच जनवरी 2026 के बीच पूरे राज्य में मात्र 11410 अपार आइडी का ही निर्माण किया गया है, जो खेदजनक है. परियोजना परिषद ने कहा है कि राज्य के 10 जिलों समस्तीपुर, मधुबनी, खगड़िया, पुर्णिया, शिवहर, नालंदा, रोहतास, अरवल, शेखपुरा और कैमूर में एक सप्ताह में मात्र 100 से कम बच्चों की अपार आइडी का निर्माण हो सका है. पत्र में कहा गया है कि लगता है कि इन जिलों द्वारा अपार निर्माण में रुचि नहीं ली जा रही है. परियोजना परिषद ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि 25 जनवरी तक शेष बच्चों की अपार आइडी बने यह सुनिश्चित करें.

इसलिए जरूरी है अपार आइडी

अपार आइडी विद्यार्थियों के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यह उनके सभी शैक्षणिक रिकाॅर्ड (अंकपत्र, डिग्री, प्रमाणपत्र) को एक डिजिटल, सुरक्षित और स्थायी पहचान (12 अंकों की आईडी) के रूप में संग्रह करती है. इससे स्कूल बदलने, क्रेडिट ट्रांसफर करने, छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और फर्जीवाड़े को रोकने में मदद मिलती है. यह पूरे देश में मान्य है और डिजिलॉकर से जुड़ी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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