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बिहार में बिछेगा 1000 किमी रेललाइनों का जाल, 2031 तक बदल जाएगा सफर

Updated at : 01 Mar 2026 1:54 PM (IST)
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Indian Railways

सांकेतिक तस्वीर

Indian Railways : भारतीय रेलवे ने बिहार के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की योजना बनाई है. वर्ष 2031 तक राज्य में लगभग 1000 किलोमीटर नई रेललाइन बिछाने और कई प्रमुख रूटों के दोहरीकरण का लक्ष्य तय किया गया है. 2026-27 के रेल बजट में इसके लिए 10,379 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे राज्य में यातायात, उद्योग और व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है.

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Indian Railways : बिहार की लाइफलाइन कहे जाने वाले रेल नेटवर्क में अगले पांच वर्षों के भीतर एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा. केंद्र सरकार ने वर्ष 2031 तक राज्य में करीब 1000 किलोमीटर नई रेललाइन बिछाने का लक्ष्य रखा है.

इस मेगा प्लान के तहत कुल 30 बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम होना है, जिनमें 10 नई रेललाइनें और 20 रेल खंडों का दोहरीकरण शामिल है. रेलवे बोर्ड ने इन परियोजनाओं के सर्वेक्षण के लिए राशि जारी कर दी है और अगले वित्तीय वर्ष से डीपीआर (DPR) निर्माण के साथ काम जमीन पर दिखने लगेगा.

पटना-झाझा के बीच बिछेगी तीसरी और चौथी लाइन

इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा डीडीयू-पटना-झाझा रेल खंड है. वर्तमान में इस रूट पर ट्रेनों का अत्यधिक दबाव रहता है, जिससे गाड़ियां अक्सर लेट होती हैं. अब यहां तीसरी और चौथी रेललाइन बिछाने का काम शुरू होगा, जिससे एक्सप्रेस और मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक उपलब्ध होंगे.

पटना के पास रेल सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए फुलवारी-पाटलिपुत्र जंक्शन के बीच डबलिंग का काम भी प्राथमिकता पर रखा गया है. इससे राजधानी पटना आने-जाने वाली ट्रेनों को आउटर पर घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

औरंगाबाद से बिहटा और और भी बहुत कुछ

रेलवे ने उन इलाकों को भी जोड़ने की योजना बनाई है जो अब तक रेल मानचित्र पर पीछे थे. औरंगाबाद-बिहटा नई रेललाइन का निर्माण लंबे समय से प्रतीक्षित था, जिसे अब गति मिलने वाली है. इसके साथ ही, ललितग्राम-वीरपुर और सकरी-फारबिसगंज जैसे सीमावर्ती इलाकों में नई रेललाइनों का काम और दोहरीकरण किया जाएगा.

फतुहा-बिदुपुर के बीच गंगा पर नए रेल पुल के प्रोजेक्ट से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी. समस्तीपुर-हसनपुर और खगड़िया लाइन का दोहरीकरण भी इस सूची में शामिल है.

ट्रेनों की रफ़्तार और माल ढुलाई में होगा इजाफा

आरा-सासाराम रेललाइन के विस्तार और इसे फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ने के बाद बिहार से दूसरे राज्यों में सामान भेजना सस्ता और तेज हो जाएगा. किऊल-गया और बरौनी-कटिहार जैसे व्यस्त खंडों पर काम पूरा होने के बाद ट्रेनों की औसत गति में 30% तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. 2031 तक बिहार का रेल नेटवर्क पूरी तरह ‘हाई-टेक’ मोड में आ जाएगा.

इन परियोजनाओं से सिर्फ राजधानी ही नहीं बल्कि राज्य के कई हिस्सों को फायदा मिलेगा. समस्तीपुर-दरभंगा, बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया, किऊल-गया और बरौनी-कटिहार जैसे सेक्शन पर चल रहे कार्यों से यात्रियों को बेहतर रेल सेवा मिलेगी.

नई लाइनों में सकरी–फारबिसगंज, फतुहा–बिदुपुर गंगा पुल परियोजना, ललितग्राम–वीरपुर और औरंगाबाद–बिहटा लाइन जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो सीमावर्ती और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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