पटना हास्टल कांड : CBI ने नहीं निभाई जिम्मेदारी, कोर्ट ने लगाई फटकार, पूछा- आखिर कैसे हुई मौत?

सांकेतिक तस्वीर
Patna Neet Student Death Case: पटना के चर्चित हास्टल कांड में अदालत ने जांच एजेंसी CBI को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने साफ कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी और जांच में निरंतरता के अभाव ने पूरे केस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
Patna Neet Student Death Case: पटना के चर्चित नीट छात्रा मामले में पॉक्सो कोर्ट ने मामले की जांच कर रही देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI के रवैये पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है. अदालत ने कहा है कि अब तक चार जांच अधिकारी (IO) बदले जा चुके हैं, लेकिन किसी ने भी जिम्मेदारी से काम नहीं किया.
जांच में निरंतरता की कमी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव ने पूरे केस को कमजोर कर दिया है, जिससे अब आरोपी के बचने का रास्ता साफ होता दिख रहा है.
चार-चार जांच अधिकारी फिर भी खाली हाथ
अदालत ने अपनी टिप्पणी में इस बात पर गहरा क्षोभ प्रकट किया कि इस हाई-प्रोफाइल केस में बिहार पुलिस के दो और सीबीआई के दो आईओ ने जांच की, लेकिन हर बार नए सिरे से शुरुआत की गई. पिछले अधिकारियों द्वारा जुटाए गए तथ्यों और वर्तमान जांच के बीच कोई तालमेल नहीं दिखा.
कोर्ट ने इसे ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’ करार दिया है. सीबीआई द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट को अधूरा और अस्पष्ट बताते हुए कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब आईओ नहीं, बल्कि सीबीआई के एसपी खुद शपथपत्र दायर करेंगे.
90 दिन पूरे, लेकिन चार्जशीट का अता-पता नहीं
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि मुख्य आरोपी मनीष कुमार रंजन 15 जनवरी से जेल में बंद है, लेकिन सीबीआई ने अब तक उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की है. कानूनन पॉक्सो एक्ट के मामलों में 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य है.
अगर 15 अप्रैल तक चार्जशीट पेश नहीं की गई, तो तकनीकी आधार पर आरोपी को जमानत मिल सकती है.
अनसुलझी मौत की गुत्थी
हैरानी की बात यह है कि महीनों की जांच के बाद भी एजेंसियां यह पता नहीं लगा पाई हैं कि छात्रा की मौत आखिर हुई कैसे? मेडिकल ओपिनियन से लेकर गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण तक, हर मोर्चे पर नाकामी हाथ लगी है. मृतका के कमरे से मिली दवाइयों की स्ट्रिप्स और अन्य बरामद सामानों में भी विसंगतियां पाई गई हैं.
परिजनों के वकील ने आरोप लगाया है कि एजेंसियां आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही हैं, यही वजह है कि साक्ष्यों की ‘चेन ऑफ कस्टडी’ तक स्थापित नहीं की जा सकी है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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