Patna Metro : सावधान! पटना मेट्रो में नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी, आयुष्मान कार्ड से भी हो रही थी जालसाजी
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 07 Jan 2026 9:45 AM
AI जनरेटेड इमेज प्रतीकात्मक तस्वीर
Patna Metro: नौकरी का सपना दिखाकर जेब खाली करने वाला गिरोह सिर्फ मेट्रो तक सीमित नहीं था, बल्कि गरीबों के इलाज की उम्मीद आयुष्मान कार्ड को भी ठगी का जरिया बन रहा था. राजधानी पटना में बेरोजगार युवाओं के सपनों और गरीबों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले एक ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसकी साजिशों की परतें देख पुलिस भी हैरान है.
Patna Metro: पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, मामले की गंभीरता बढ़ती जा रही है. पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह निजी अस्पतालों से कथित मिलीभगत कर आयुष्मान भारत योजना के तहत भी जालसाजी कर रहा था. जालसाजों के पास से 19 आयुष्मान कार्ड बरामद हुए हैं, जो पूर्वी चंपारण के लोगों के बताए जा रहे हैं. इस खुलासे के बाद पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है.
मेट्रो की नौकरी से शुरू हुआ ठगी का खेल
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब जक्कनपुर थाना पुलिस ने 28 दिसंबर 2025 को सहरसा निवासी नवनीत कुमार, सुपौल निवासी अखिलेश कुमार और नवादा निवासी दिनेश साव को गिरफ्तार किया. पूछताछ और बरामदगी के दौरान पुलिस को यह समझ में आया कि गिरोह पटना मेट्रो में डाटा एंट्री ऑपरेटर और इलेक्ट्रिशियन की बहाली का झांसा देकर युवाओं से पैसे वसूल रहा था. इसके लिए बाकायदा ‘उर्मिला एजुकेशन एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी बनाई गई थी और एक प्रोफेशनल वेबसाइट भी तैयार की गई थी, ताकि ठगी को भरोसेमंद रूप दिया जा सके.
वेबसाइट, विज्ञापन और हजारों अभ्यर्थी
गिरोह ने अपनी वेबसाइट पर पटना मेट्रो में बहाली का विज्ञापन जारी किया, जिसे देखकर 2500 से अधिक युवाओं ने आवेदन किया. हर अभ्यर्थी से करीब 1200 रुपये आवेदन शुल्क के रूप में लिए गए. इसके बाद नौकरी पक्की कराने के नाम पर अलग-अलग रकम वसूली गई.
पुलिस के अनुसार, सिर्फ आवेदन शुल्क से ही लाखों रुपये की ठगी की गई, जबकि बहाली के नाम पर ली गई रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है.
आयुष्मान कार्ड के जरिए दूसरा खेल
जांच आगे बढ़ी तो एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया। पुलिस को जालसाजों के पास से 19 आयुष्मान कार्ड मिले. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह गांव-देहात के लोगों को आयुष्मान कार्ड बनवाने और इलाज का लाभ दिलाने का झांसा देकर निजी अस्पतालों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा कर रहा था.
आशंका जताई जा रही है कि कार्डधारकों के नाम पर इलाज दिखाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया. इस बिंदु पर पुलिस अब निजी अस्पतालों की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है.
सरगना की तलाश और रिमांड की तैयारी
इस गिरोह का एक प्रमुख सरगना अखिलेश यादव बताया जा रहा है, जिसे जक्कनपुर पुलिस पहले गिरफ्तार नहीं कर सकी थी. इसी बीच सूचना मिली कि अखिलेश यादव को दानापुर पुलिस ने शराब के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
अब जक्कनपुर थाना पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है. इसके लिए कोर्ट में आवेदन दिया जाएगा. पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान कई और नाम और ठगी के तरीके सामने आ सकते हैं.
दो साल से सक्रिय, करोड़ों की ठगी का शक
पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह गिरोह पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और अब तक करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है. जालसाजों के पास से 20 अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड भी बरामद हुए हैं, जिनसे पूछताछ कर ठगी की पूरी कड़ी को जोड़ा जाएगा. पुलिस का दावा है कि इस मामले में जल्द ही कुछ और शातिरों की गिरफ्तारी हो सकती है.
पटना मेट्रो की नौकरी और आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाओं के नाम पर ठगी का यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आम लोगों के भरोसे पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है. पुलिस अब इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए हर कड़ी की जांच में जुटी है.
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By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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