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ओडिशा रेल हादसे में मां की मौत का झूठा दावा करने रेल भवन पहुंचा पटना का युवक, खुल गयी पोल

Updated at : 09 Jun 2023 1:48 PM (IST)
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ओडिशा रेल हादसे में मां की मौत का झूठा दावा करने रेल भवन पहुंचा पटना का युवक, खुल गयी पोल

ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे में बिहार के 4 दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गयी. वहीं पटना का एक युवक अपनी मां की मौत का दावा लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के आवास पहुंच गया. रेल भवन में जब अधिकारियों ने जांच की तो संजय का बड़ा झूठ पकड़ा गया.

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ओडिशा के बालासोर रेल हादसे में सैकड़ों यात्रियों की मौत हुई.जान गंवाने वालों में बिहार के भी 50 से अधिक लोग हैं. मृतकों की संख्या से अधिक लोग जख्मी हैं, ये लोग हादसे का शिकार बनी दो ट्रेनों में सफर कर रहे थे. वहीं पटना का एक युवक सरकारी नौकरी लेने के लिए रेल मंत्री के आवास पहुंच गया.युवक हादसे अपनी मां की मौत का दावा कर रहा था लेकिन जब रेलवे के अधिकारियों ने इसकी जांच की तो हैरान करने वाले खुलासे हुए.

रेल मंत्री के आवास पहुंचा पटना का युवक

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पटना का रहने वाला संजय कुमार रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के सरकारी आवास पर पहुंच गया. उसका दावा था कि बालासोर रेल हादसे में उसकी मां की भी मौत हो गयी है. संजय ने रेल भवन के भी चक्कर दो दिनों तक काटे. रेल मंत्री के आवास से उसे सलाह मिली कि वो रेल भवन जाए वहीं रेल मंत्री से मुलाकात होगी. जिसके बाद संजय रेल मंत्री के दफ्तर पहुंच गया.

कोरोमंडल एक्सप्रेस में सफर करने का दावा

रेल भवन के अधिकारियों ने बताया कि संजय हादसे की जानकारी देने के दौरान लगातार अपना बयान बदल रहा था. उसने दावा किया कि उसकी मां हादसे का शिकार बनी ट्रेन कोरोमंडल एक्सप्रेस में सफर कर रही थी. रेल हादसे में उसकी मौत हो गयी. अधिकारियों को जब संजय के दावे पर संदेह हुआ तो कागजात की मांग की गयी. लेकिन संजय कोई सबूत नहीं दे सका.

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नहीं दिखा सका टिकट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे के अधिकारी ने बताया कि जब उसकी मां की रेल टिकट मांगी गयी तो संजय ने कहा कि एक एजेंट के माध्यम से टिकट कटाया गया था और वो उस एजेंट का नाम भी नहीं जानता. वेटिंग लिस्ट में भी अपनी मां के नाम को वो साबित नहीं कर सका.

रेलवे ने शुरू की जांच

रेलवे के अधिकारियों ने संजय से उसकी मां की एक तस्वीर ली और हर उस स्टेशन पर खोज करवाई गयी जहां उक्त ट्रेन का ठहराव है. अधिकारी फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के जरिए उसे खोजने में लगे थे. उन्होंने कहा कि संजय की मां को किसी भी स्टेशन पर जब नहीं पता किया जा सका तो शक गहराता चला गया. जिसके बाद एक सीनियर अधिकारी ने केस देखना शुरू किया.

पकड़ में आया संजय का झूठ

जब संजय अपनी ही बिछाई जाल में बुरी तरह उलझ गया तो उसने कबूल किया कि वो झूठ बोल रहा है. दरअसल, अपनी जिस मां को वो ट्रेन हादसे में मरने का दावा कर रहा था उनका देहांत वर्ष 2018 में ही हो गया था. संजय ने बताया कि उसे नौकरी की बहुत जरुरत है. जब उसे पता चला कि रेल हादसे में मरने वालों को अनुदान मिल रहा है तो वो पैसे के बदले नौकरी मांगने पहुंच गया और अपनी मां के मौत के झूठे दावे कर दिए.

Published By: Thakur Shaktilochan

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