पटना के नेपाली नगर में नये निर्माण पर रोक, टूटे मकानों की होगी मरम्मत, हाईकोर्ट ने मांगा ब्योरा
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Jul 2022 11:03 AM
नेपाली नगर में मकानों को तोड़े जाने को लेकर दायर रिट याचिका पर पटना हाइकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. इस दौरान न्यायाधीश संदीप कुमार की एकलपीठ ने कहा कि मकान तोड़ने की प्रशासन की कार्रवाई पर लगायी गयी रोक इस मामले के निष्पादन तक जारी रहेगी.
पटना. नेपाली नगर में मकानों को तोड़े जाने को लेकर दायर रिट याचिका पर पटना हाइकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. इस दौरान न्यायाधीश संदीप कुमार की एकलपीठ ने कहा कि मकान तोड़ने की प्रशासन की कार्रवाई पर लगायी गयी रोक इस मामले के निष्पादन तक जारी रहेगी. इधर, कोर्ट को बिजली कंपनी की ओर से बताया गया कि नेपाली नगर में जो बिजली आपूर्ति बंद थी, उसे कोर्ट के आदेश के बाद चालू कर दिया गया है. इस मामले पर गुरुवार को भी सुनवाई की जायेगी.कोर्ट इस मामले में गुरुवार को आगे की सुनवाई करेगा.
कोर्ट ने राज्य सरकार और आवास बोर्ड को कहा कि अगर कोई व्यक्ति रोक के बावजूद किसी तरह का नया निर्माण करता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई करें. न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने नये निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बजाय निर्माण कराने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने की बात कही है. कोर्ट ने कहा कि पकड़े गये मजदूर को निजी मुचलकों पर थाने से ही छोड़ने का काम किया जाना चाहिए.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का पक्ष रखते महाधिवक्ता ललित किशोर ने भी कहा कि गरीब मजदूर पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील और राज्य सरकार के वकील के बीच कई बार नोकझोंक हुई. आवेदक के वकील ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सबकुछ है, जबकि राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि जिस योजना को लेकर आवेदक के वकील रिलीफ चाहते हैं वह उनके द्वारा ही बनायी गयी है.
मंगलवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आवास बोर्ड से यह भी जानना चाहा कि आवास बोर्ड ने अंतिम आवासीय कॉलोनी कब बनायी. कोर्ट ने पूछा कि पिछले तीस साल में कहां-कहां कॉलोनी बनायी गयी है? कोर्ट ने आवास बोर्ड को इस पर जवाब देने की बात कही है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गृह निर्माण समितियों के पदाधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही.
नेपाली नगर के करीब चार सौ एकड़ जमीन को हाउसिंग बोर्ड के अधीन रहने दिया गया. हाउसिंग बोर्ड ने पूरी जमीन की घेराबंदी करने का जिम्मा एक निजी कम्पनी को दिया. निजी कम्पनी को किसी प्रकार का सहयोग नहीं किये जाने के कारण कम्पनी ने काम छोड़ दिया. इसी बीच लोग दीघा अर्जित भूमि बन्दोबस्ती योजना के मुताबिक घर बनाना शुरू कर दिये.
राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश का लाभ उठा कर कुछ लोग उस क्षेत्र में नया निर्माण कार्य शुरू करने लगे हैं. ऐसे लोगों पर कार्रवाई की छूट दी जाये. इस पर कोर्ट ने कहा कि निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों को छोड़ कर निर्माण कार्य करवाने वाले लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी जाये.
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