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सटीक आंकड़े भविष्य की नीतियों व विकास योजनाओं का आधार है : डीएम

Updated at : 28 Aug 2025 4:50 PM (IST)
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सटीक आंकड़े भविष्य की नीतियों व विकास योजनाओं का आधार है : डीएम

NAWADA NEWS.सत्र 2023-24 के लिए सातवीं लघु सिंचाई गणना, द्वितीय जल निकाय गणना, मध्यम एवं बृहद् सिंचाई योजना गणना और प्रथम स्प्रिंग गणना (फस्ट सेंसेस ऑफ स्प्रिंग) को लेकर जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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भविष्य की जल प्रबंधन योजनाओं के लिए नवादा में विशेष प्रशिक्षण आयोजित प्रतिनिधि, नवादा कार्यालय सत्र 2023-24 के लिए सातवीं लघु सिंचाई गणना, द्वितीय जल निकाय गणना, मध्यम एवं बृहद् सिंचाई योजना गणना और प्रथम स्प्रिंग गणना (फस्ट सेंसेस ऑफ स्प्रिंग) को लेकर जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. डीएम रवि प्रकाश के निर्देशानुसार समाहरणालय सभाकक्ष में संदर्भ वर्ष के प्रशिक्षण का संचालन सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी लक्ष्मीकांत श्रीवास्तव ने किया. प्रशिक्षण में बताया गया कि इन गणनाओं का कार्यान्वयन अर्थ व सांख्यिकी निदेशालय, बिहार, पटना द्वारा किया जा रहा है. यह गणना प्रत्येक पांच वर्ष पर पूरे भारत में जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण विभाग, भारत सरकार से संचालित करायी जाती है. इस बार मेजर व मीडियम इरिगेशन प्रोजेक्ट स्कीम व फस्ट सेंसेस ऑफ स्प्रिंग को भी इसमें शामिल किया गया है. प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि सटीक आंकड़े न केवल योजनाओं के मूल्यांकन में सहायक होंगे, बल्कि भविष्य की नीतियों व विकास योजनाओं के लिए आधार तैयार करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वेक्षित आंकड़े भू-जल की उपलब्धता का आकलन करने व यथार्थवादी योजनाओं के निर्माण में अत्यंत सहायक होंगे. भारत कृषि प्रधान देश है और कृषि उत्पादन व खाद्य सुरक्षा के लिए जल प्रबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. सीमित जल संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग आवश्यक है, विशेषकर इसलिए कि पूरे देश में मानसून का वितरण समान नहीं है. इस अवसर पर प्रतिभागियों को बताया गया कि गणना कार्य पूरी पारदर्शिता व शुद्धता के साथ किया जाए. आंकड़ों का संग्रह प्रगणकों द्वारा ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में किया जायेगा. पूर्ण अनुसूचियों को भरकर सारांश सहित संबंधित पर्यवेक्षक को जांच के लिए भेजा जायेगा. प्रखंड, जिला, प्रमंडल व राज्य स्तर के पदाधिकारी इस कार्य की मॉनिटरिंग करेंगे. प्रशिक्षण में सिंचाई क्षमता का उपयोग, भू-जल योजनाओं (कुएं, बोरवेल, उथले एवं गहरे नलकूप) और जल संरक्षण योजनाओं के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी गयी. साथ ही प्रतिभागियों को आंकड़े संकलन के मानक व फील्ड स्तर पर बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी प्रदान की गयी. इस मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद नवादा व वारिसलीगंज, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, सहित अन्य पदाधिकारी एवं विभिन्न प्रखंडों से आये अधिकारी व कर्मी उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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