पर्वराज पर्युषण के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की हुई विशेष आराधना

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पर्वराज पर्युषण के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की हुई विशेष आराधना

NAWADA NEWS.पर्वराज पर्युषण के तीसरे दिन शनिवार को जैन धर्मावलंबियों ने श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ दशलक्षण धर्म के तृतीय स्वरूप उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा अर्चना की.

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प्रतिनिधि, नवादा कार्यालय

पर्वराज पर्युषण के तीसरे दिन शनिवार को जैन धर्मावलंबियों ने श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ दशलक्षण धर्म के तृतीय स्वरूप उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा अर्चना की. गुणावांजी दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र में जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक व शांतिधारा कर विश्वशांति की मंगलकामना की. जैन धर्मावलंबियों ने पूरे विधि-विधान के साथ अष्टद्रव्य से देव शास्त्र गुरु पूजन, चौबीसी पूजन, षोडशकारण पूजन, पंचमेरू पूजन, दशलक्षण धर्म पूजन किया. दशलक्षण धर्म के तृतीय स्वरूप उत्तम आर्जव धर्म की विशेष आराधना करते हुए छल-कपटरहित सरलता को अपने व्यवहारिक जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया गया. दीपक जैन ने बताया कि जैन धर्मानुसार उत्तम आर्जव धर्म का आशय मन, वचन एवं कर्म में सरलता व निष्कपटता से है. यह हमें सिखाता है कि हमारे विचार, वाणी व कार्य में कोई भी छल-कपट या दिखावा न हो. मन में कुछ और, वचन में कुछ और एवं कार्य में कुछ और का होना मायाचारिता कहलाती है. उन्होंने कहा कि उत्तम आर्जव धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति छल-कपट से मुक्त रहता है, जिससे उसके भीतर विश्वास, निष्कपटता, मैत्री, शांति, पारदर्शिता व अध्यात्मिकता की भावना का संचार होता है. जब व्यक्ति मन, वचन एवं कार्य से एक समान हो जाता है, तो उस पर विश्वास करना आसान हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप मानव जीवन को शांति, पवित्रता व सामंजस्य की अनुभूति प्राप्त होती है.

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