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पर्यावरण पर बढ़ा खतरा, हमें अपने बच्चों के सुरक्षित जीवन के लिए पौधा लगाना जरूरी

Updated at : 24 May 2025 11:15 PM (IST)
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पर्यावरण पर बढ़ा खतरा, हमें अपने बच्चों के सुरक्षित जीवन के लिए पौधा लगाना जरूरी

नेशनल हाइवे और अन्य सड़कों के निर्माण में हजारों पेड़ काटे जाने के बावजूद नहीं लगाये गये नये पौधे

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वन विभाग पांच लाख से अधिक पौधा लगाने का रखा है लक्ष्य

विशाल कुमार, मनोज मिश्रा, नवादा

पर्यावरण को बचाने में हरियाली की चादर की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, यह हम प्राकृतिक आपदा और भीषण गर्मी झेलकर समझ रहे हैं. नवादा जिले के लगभग 25 प्रतिशत भू-भाग वन से घिरा है. बिहार में कैमूर से बाद नवादा दूसरा जिला है, जहां इतनी बड़ी समृद्ध वन संपदा है, लेकिन जिस तरह से नये निर्माण और आधुनिकता की नयी होड़ देखने को मिल रही है, इस कारण लगातार वन क्षेत्रफल घट रहे हैं. नेशनल हाइवे और अन्य सड़कों के निर्माण में जिस तरह से अंधाधुंध हजारों पेड़ों की कटाई हुई है. इसके संरक्षण को लेकर कहीं कोई प्रयास कारगर होता नहीं दिख रहा है. वन विभाग के अलावा विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से पौधा लगाने का काम किया जाता है. लेकिन, धरातल की स्थिति बताती है कि यह पौधे लगाने की आंकड़े केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाते हैं. पौधारोपण के नाम पर कई स्थानों पर भूमि हड़पने की योजना भी दिखती है. जिले की कई नदियों के बीच में पौधारोपण कर दिया गया है. सरकारी भूमि पर पौधारोपण का अभियान कारगर बने, इसके लिए ठोस पहल करने की जरूरत है. प्रभात खबर ने शनिवार को इसी मुद्दे को लेकर बुद्धौल बस स्टैंड के पीछे ब्राइट कैरियर स्कूल परिसर में आम लोगों के बीच प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया़ इसमें शामिल बुद्धिजीवियों व विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर अपनी राय बेबाकी से रखी़. लोगों ने कहा कि पर्यावरण बचेगा, तो हम और अगली पीढ़ी बचेगी़ इसके लिए हम सभी को पौधारोपण के साथ उसका सरंक्षण करना चाहिए़ हमें प्रत्येक अवसर पर पौधा लगाने की जरूरत है़

जिले में घट रही है वन भूमि:

नवादा जिले का कुल भू-भाग 02 लाख 49 हजार 400 हेक्टेयर है. इसमें पूर्व में 25 प्रतिशत वन क्षेत्र था. बिहार में कैमूर के बाद नवादा दूसरा जिला है, जहां इतनी अधिक वन संपदा है. जिले के रजौली, कोआकोल, गोविंदपुर, सिरदला, मेसकौर आदि कई क्षेत्र है, जो वनों से घिरा हरियाली का क्षेत्र है. वर्तमान आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में से 23.4 फीसदी भू-भाग यानि 58 हजार 364 हेक्टेयर में वन हैं. नवादा में 9539.01, रजौली में 33598.62, कौआकोल में 14914.85 और हिसुआ में 312.32 हेक्टेयर वन विभाग की भूमि शामिल है. जिले में वन क्षेत्र को बढाने के लिए नये पौधा तैयार करने के लिए नौ बड़ी नर्सरी है. इनका कुल एरिया करीब 37 हेक्टेयर है. नवादा आइटीआई, सिरदला, हिसुआ का मंझवे, रजौली का हरदिया व कौआकोल नर्सरियों का क्षेत्रफल 01-01 हेक्टेयर है. जबकि, चार अन्य नर्सरियां नारदीगंज में 02 हेक्टेयर, सिरदला के घाट बकसीला में 20 हेक्टेयर एवं रजौली के पड़रिया व कौआकोल के सेखोदेवरा में 5- 5 हेक्टेयर भू- भाग में फैले हैं.

एनएच किनारे से काटे गये पेड़ों के बदले नहीं लगाये गये नये पौधे

प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि वन विभाग जिले में हरियाली का आवरण बढ़ाने के लिए प्रयासरत है. नेशनल हाइवे को फोरलेन में बनाने में हजारों पेड़ाें को काटा गया है. लेकिन, इसके बदले में सरकारी नियमानुसार एक बड़े हरे पेड़ के बदले में चार नये पौधे लगाने व उसे बड़ा होने तक संरक्षित रखने का नियम लागू नहीं हो रहा है. बख्तियारपुर-रजौली एनएच 20 पर वन विभाग द्वारा जिले में पांच हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. रजौली से नवादा के बीच सड़क के दोनों किनारे पर यह पौधे लगाये जाने है, लेकिन यह अब तक धरातल पर नहीं दिख रहा है. पौधे लगाने से न सिर्फ एनएच पर हरियाली बढ़ेगी, बल्कि मार्ग से गुजरने वाले लोगों को भी हरियाली का अहसास होगा. साथ ही पैदल अथवा छोटे वाहनों से एनएच पर चलने वाले यात्रियों को गर्मी में छांव मिल सकेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANCHDEV KUMAR

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PANCHDEV KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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