चयनित पंचायतों में निर्धारित तिथियों पर आयोजित किये जायेंगे शिविर
प्रतिनिधि, मेसकौरमेसकौर प्रखंड के किसानों को सस्ती और सुलभ ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रखंड में नि:शुल्क कृषि बिजली कनेक्शन प्रदान करने के लिए विशेष शिविरों की शुरुआत की गयी है. इसकी शुरुआत 5 मई को अंकरी पाण्डेय बीघा पंचायत में पहले शिविर के साथ हो गयी. प्रखंड क्षेत्र के चयनित पंचायतों में निर्धारित तिथियों पर ये शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सके. ऊर्जा विभाग के एसडीओ बिनोद कुमार चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि मेसकौर प्रखंड के अंकरी पाण्डेय बीघा पंचायत में 5 मई, 6 मई को बारत पंचायत, 8 मई को बड़ोसर पंचायत, 9 मई को बीजूबीघा पंचायत, 13मई को बिसियायत पंचायत, 15 मई को मेसकौर पंचायत, 16 मई को मिर्जापुर पंचायत, 17 मई को रसलपुरा पंचायत,19 मई को सहवाजपुर सराय पंचायत एवं 20 मई को तेतरिया पंचायत में कैंप आयोजित होंगे.एसडीओ ने बताया की नि:शुल्क कृषि कनेक्शन प्राप्त करने के लिए किसानों को आवेदन पत्र, दो पासपोर्ट साइज फोटो, जमीन की नई रसीद और आधार कार्ड की छायाप्रति साथ लानी होगी. जिन उपभोक्ताओं पर पूर्व कृषि कनेक्शन की कोई बकाया राशि नहीं है. उन्हें शिविर में ही तुरंत कनेक्शन प्रदान कर दिया जाएगा. विशेष बात यह है कि कनेक्शन पूरी तरह नि:शुल्क होगा. किसानों को केवल अपने बिजली उपयोग का बिल निर्धारित समय पर चुकाना होगा. यह पहल किसानों को सिंचाई और कृषि कार्यों में बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल का भुगतान
पहले खेती के लिए बिजली कनेक्शन लेने से किसान घबराते थे. किसानों को खेतों में लगी फसल पटवन के लिए मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल का भुगतान करना होगा. कंपनी के अनुसार किसान की ओर से बिजली का उपयोग करने के बाद ही बिजली बिल जमा करना पड़ेगा. इसके अतिरिक्त किसी तरह का फिक्सड चार्ज नहीं लगेगा. पहले किसानों से खेती के मौसम के अलावे अन्य महीनों में भी मीटर चार्ज सहित कई अन्य चार्ज के नाम पर बिजली बिल लिए जाते थे, बिजली के उपयोग नहीं करने के बावजूद बिजली बिल लगने से किसान कनेक्शन लेने से घबराते थे.किसानों को बारिश पर नहीं निर्भर रहना पड़ेगा
मेसकौर प्रखंड महादलित बहुल प्रखंड होने के कारण यहां 90 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है. अच्छी बारिश होने पर ही इन भगवान की पानी से खेतों कि सिंचाई हो पाती है. अगर मानसून दगा दे गया तो यहां के किसान हाथ पर हाथ धार रह जाते है और उनकी फसलें मारी जाती है. अब किसानों को अपने खेतों कि पटवान के लिए बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

