वन विभाग ने बिना पैसे दिये दर्जनों मजदूरों को काम से निकाला

वन विभाग ने बिना पैसे दिये दर्जनों मजदूरों को काम से निकाला
कर्मियों ने कार्यालय के मुख्य द्वार में जड़ा ताला
17 महीनों से मजदूर अपनी मजदूरी के बकाया के लिए लगा रहे कार्यालयों का चक्करप्रतिनिधि, रजौली. रजौली वन विभाग में कार्यरत दर्जनों महिला-पुरुष मजदूरों को बीते 17 महीनों की मजदूरी नहीं दिये जाने से लोगों में आक्रोश है. इसको लेकर वन परिसर के कार्यालय में मंगलवार को दर्जनों वाइल्ड महिला-पुरुष टेकर और चेक नाका गार्ड ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और हड़ताल पर बैठ गये. इस दौरान मौजूद मजदूर दिलीप सिंह, सतीश कुमार, डूमर कुमार, मुन्ना कुमार, गुड़िया देवी, ममता देवी, पूनम कुमारी व शोभा देवी ने बताया कि विभाग की ओर से 17 महीनों तक मजदूरी करायी गयी, किंतु अबतक उनका मेहनताना नहीं दिया गया है. अब विभाग ने उन्हें कार्य से निकाल दिया है. इससे वे आक्रोशित होकर मंगलवार को वन विभाग कार्यालय पहुंचे और मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिये. कार्यालय के द्वार पर ताला जड़ने की खबर सुनते ही रेंजर नारायण लाल सेवक पहुंचे और लोगों से बातचीत की. केयर टेकर एवं चेक नाका गार्ड ने बताया कि विभाग की ओर से बीते 17 माह काम कराकर अबतक पैसा नहीं दिया गया है. साथ ही बताया कि गरीब मजदूर मेहनताना लेने के लिए पदाधिकारियों के पास जाते हैं, तो उनके द्वारा हर बार टाल-मटोल किया जाता है, जबकि मजदूरों की ओर से दर्जनों बार मौखिक व लिखित आवेदन देकर बकाया की मांग की गयी है. इस पर वन विभाग के वरीय पदाधिकारियों की ओर से सिर्फ आश्वासन मिलता है. मजदूरों ने कहा कि पैसों के अभाव में उन्हें परिवार समेत जीवन यापन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. मजदूरों की मांग है कि उनका बकाया पैसा दिया जाये. साथ ही उम्र सीमा निर्धारण के बाद काम पर वापस बुलाया जाये एवं पहचान पत्र देकर फील्ड में काम करने भेजा जाये, ताकि वे निर्भय होकर काम कर सके.
क्या कहते हैं डीएफओ
इस संबंध में नवादा डीएफओ श्रेष्ठ कुमार कृष्ण ने बताया कि वाइल्ड लाइफ ट्रैकर का पैसा भारत सरकार से बिहार सरकार को आता है. वहां से मजदूरों के खाते में ट्रांसफर किया जाता है. उन्होंने कहा कि मजदूरों को भुगतान में देरी होने की जानकारी भी है. इसके बावजूद वे लोग अपनी बातों पर अड़े हैं. डीएफओ ने कहा कि मजदूरों को वन विभाग के काम को छोड़कर दूसरे कार्य कर अपना जीवन निर्वाह करने को कहा गया है. इसके बावजूद वे मनमानी कर रहे हैं. साथ ही आश्वासन दिया कि जैसे ही पैसा आयेगा, वैसे ही मजदूरों के खातों में उनका बकाया पैसा भेज दिया जायेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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