नवादा: अकबरपुर में गणितीय समर कैंप पर सवाल, अभिभावकों ने कहा- सिर्फ कागजों पर चल रहा कार्यक्रम

Edited by Vikash Jha
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प्रखंड संसाधन केंद्र अकबरपुर

Nawada News: नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड में शिक्षा विभाग द्वारा 1 से 30 जून तक संचालित किए जाने वाले गणितीय समर कैंप को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में कैंप का आयोजन नहीं किया गया और कार्यक्रम केवल कागजों तक सीमित रह गया. वहीं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने दावा किया है कि सभी जगह कैंप का संचालन किया जा रहा है और इसकी जानकारी संबंधित एनजीओ से ली जा सकती है.

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Nawada News (अकबरपुर से अनिल कुमार की रिपोर्ट)
नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में एक जून से 30 जून तक गणितीय समर कैंप का आयोजन किया जाना था. इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया था, जिसमें समर कैंप की तैयारी सुनिश्चित कराने को कहा गया था. कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी प्रखंड के एक एनजीओ ‘प्रथम’ स्वयंसेवी संस्था को दी गई थी. विभागीय निर्देश के अनुसार एक जून से 30 जून तक समर कैंप में कक्षाओं का संचालन किया जाना था. इसके सफल क्रियान्वयन के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी की अध्यक्षता में प्रखंड स्तर पर निगरानी टीम के गठन का भी प्रावधान था.

स्वयंसेवकों की बड़ी भूमिका, न्यूनतम आयु 18 वर्ष

इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की मदद ली जानी थी. सभी मध्य विद्यालयों से कम से कम दो से तीन ऐसे युवाओं का चयन किया जाना था, जो स्वेच्छा से बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार हों. इसके अलावा शिक्षा सेवक, तालीमी मरकज कर्मी और अन्य सामाजिक संस्थाओं के स्वयंसेवक भी इस अभियान में भाग ले सकते थे.

स्वयंसेवकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई थी. साथ ही भाषा और गणित में रुचि तथा स्मार्टफोन संचालन की सामान्य जानकारी होना आवश्यक था, ताकि वे डिजिटल रिकॉर्डिंग में भी सहयोग कर सकें.

खेल-खेल में सीखने पर था जोर

समर कैंप में केवल पारंपरिक पढ़ाई नहीं, बल्कि गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर दिया जाना था. बच्चों को पढ़ने, समझने और अभिव्यक्ति कौशल विकसित करने के अवसर दिए जाने थे. बुनियादी गणितीय गतिविधियों के साथ खेल, कहानी सुनाना, चित्रांकन, पोस्टर निर्माण और अन्य रोचक गतिविधियों को भी शामिल किया गया था.

विभाग का मानना था कि ऐसी गतिविधियों से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ेगी और वे पढ़ाई को बोझ नहीं समझेंगे. स्वयंसेवकों को प्रतिदिन 10 से 15 बच्चों के साथ एक से डेढ़ घंटे तक गतिविधियां संचालित करनी थीं. कक्षाओं का समय सुबह सात से नौ बजे या शाम पांच से सात बजे तक बच्चों की सुविधा के अनुसार निर्धारित किया गया था.

छात्रों और अभिभावकों ने लगाया आयोजन नहीं होने का आरोप

जून के अंतिम सप्ताह में समर कैंप में शामिल बच्चों की अंतिम परीक्षा भी ली जानी थी. हालांकि प्रखंड क्षेत्र के छात्र राजा कुमार, बिक्की कुमार, अजय कुमार और रजनी कुमारी ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान शिक्षकों द्वारा गणित विषय के लिए समर कैंप आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन अकबरपुर प्रखंड के किसी भी विद्यालय में समर कैंप का आयोजन नहीं किया गया.

वहीं अभिभावक टेकनारायण यादव, मुकेश कुमार और रवि कुमार ने भी आरोप लगाया कि प्रखंड क्षेत्र में समर कैंप का संचालन नहीं हुआ और यह कार्यक्रम सिर्फ कागजों पर ही चलाया गया.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अकबरपुर विधानंद कुमार ने कहा कि सभी जगह कैंप का आयोजन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसकी विस्तृत जानकारी प्रथम एनजीओ के कोऑर्डिनेटर से प्राप्त की जा सकती है.

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लेखक के बारे में

By Vikash Jha

विकाश झा एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और कंटेंट प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मीडिया, डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2020 में भोपाल से हुई, जिसके बाद उन्होंने ETV Bharat, Bharat Express और News24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाओं का निर्वहन किया। News24 से आगे बढ़ते हुए उन्होंने Adglobal360 India Pvt. Ltd. के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं। क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव है और वे क्रिकेट को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अपनी लेखनी का महत्वपूर्ण विषय मानते हैं। उन्हें यात्रा करना, नए लोगों और स्थानों को जानना तथा समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले विकाश डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार दुनिया में तथ्यों पर आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।

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