गौरवशाली अतीत की विरासत को संभाल रहा नारदा संग्रहालय

Published by : PANCHDEV KUMAR Updated At : 04 May 2026 11:07 AM

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नवादा जिला से विशाल कुमार की रिपोर्ट, छठी से लेकर 12वीं शताब्दी के आर्किटेक्चर और मूर्ति कला की समझ बढ़ाने में सहायक

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नवादा़

प्राचीन गौरवशाली मगध साम्राज्य का हिस्सा रहे नवादा में बने नारद संग्रहालय छठी से बारहवीं शताब्दी के समृद्धि इतिहास को समेटे हुए हैं. संग्रहालय में रखे पौराणिक मूर्तियां, पुराने सिक्के, अन्य स्ट्रक्चर, शिलालेख, पौराणिक ग्रंथ आदि इतिहास के विद्यार्थियों के रिसर्च के लिए एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराता है. जिला की स्थापना के साथ ही 1974 में स्थापित नवादा नारदा संग्रहालय अपने देश और राज्य के समृद्ध इतिहास से भी रूबरू कराता है. अपनी शानदार विरासत और प्राचीन समृद्धि से आमजनों को परिचित कराने के लिए नारदा संग्रहालय में संग्रहित की गयी पौराणिक मूर्तियां, सिक्के, ग्रंथ और अन्य बड़े जानवरों के आकृति आने वाले विद्यार्थियों के साथ ही आम सामान्य जन के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनते हैं.

गौरवशाली इतिहास का दिलाता है अहसास

प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास में किस प्रकार की व्यवस्थाएं हमारे समाज जीवन में थी उसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमारे नारदा संग्रहालय में मिलता है. भले ही वर्तमान समय के इतिहासकार यह बताते हैं कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में पश्चिम के देशों की तरह विकास नहीं हो पाया था, लेकिन छठी से लेकर 12वीं शताब्दी तक के प्राप्त शिलालेख, प्रतिमाएं, मृदभांड, ग्रंथ, मुहरे व सिक्के आदि यह स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि उस समय किस प्रकार की समृद्ध कलाकृति रही है. नारदा संग्रहालय में बने भगवान हरिहर की प्रतिमा आज के कलाकारों को भी चुनौती देता है. आधुनिक लेजर तकनीक से भी विशालकाय पत्थर की एक ही प्रतिमा में शिव और विष्णु को हरिहर के रूप में 11वीं शताब्दी में प्रदर्शित करने की वह कला संभव नहीं दिखता है. जिस बारीकी से इस प्रतिमा में एक भाग में शिव और दूसरे भाग में विष्णु के संयुक्त स्वरूप को दर्शाया गया है यह अद्भुत लगता है. इसी प्रकार से 12 वीं शताब्दी में बने भगवान विष्णु की प्रतिमा, पार्श्वनाथ की प्रतिमा, भगवान नरसिंह की प्रतिमा, महेश्वरनाथ, माता पार्वती आदि की प्रतिमाएं हमारे इतिहास की जीवंतता को प्रदर्शित करता है.

11 वी शताब्दी के प्रमुख प्रतिमाओं में भगवान बलराम की प्रतिमा, महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा की प्रतिमा, उमा महेश्वर की प्रतिमा आदि के अलावे छठी शताब्दी में मिले मृदभांड मगध के अन्य हिस्सों से प्राप्त करके यहां संग्रहित किये गये हैं. नारदा संग्रहालय में उपलब्ध करायी गयी प्रतिमाएं और अन्य ऐतिहासिक धरोहर जिला के अलावा अन्य आसपास के क्षेत्रों से प्राप्त कर के यहां रखे गये हैं. मरुई, महरथ, हिसुआ, बेड़मी, बस्तीबीघा, कोसला, मररा, रूपौ, कुर्किहार, पार्वती जैसे अनेक स्थानों से यहां पर मूर्तियां और अन्य सामग्रियां उपलब्ध कराई गई है. अकबरपुर माहुरी मंडल के द्वारा उपलब्ध कराये गये मध्यकालीन ताम्र सिक्के हमारे यहां के खरीद बिक्री के लिए लेनदेन के क्रम में उपयोग में आने वाले धातु के सिक्के को दर्शाते हैं. इसके अलावा एशिया और यूरोप में प्रचलित वर्तमान सिक्कों का संग्रह भी नारदा संग्रहालय में उपलब्ध है.

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