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रजौली के मसहई गुरुपर्व मेले का छह सितंबर को होगा टेंडर, नोटिस जारी

Updated at : 02 Sep 2024 10:26 PM (IST)
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रजौली के मसहई गुरुपर्व मेले का छह सितंबर को होगा टेंडर, नोटिस जारी

मेले को आकर्षक बनाने में जुटे आयोजक

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रजौली. प्रखंड मुख्यालय में हर वर्ष आयोजित होने वाले महसई गुरुपर्व मेला को लेकर टेंडर की सूचना जारी हो गयी है. रजौली सीओ मो गुफरान मजहरी ने सूचना का प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया के व्हाट्सएप प्लेटफाॅर्म के ग्रुप में वायरल किया जा रहा है. वायरल पत्र में महसई गुरुपर्व मेला सैरात के लिए प्रस्तावित सुरक्षित जमा राशि 12 लाख चार हजार 798 रुपये बताया जा रहा है. गुरुपर्व मेला के लिए समाहरणालय नवादा में छह सितंबर को 11:45 बजे दिन में डाकधारियों द्वारा प्रस्तवित सुरक्षित जमा राशि का 10% राशि नजारत नवादा में जमा करने के बाद डाक में शामिल होंगे. मेला का ठेका लेने वाले ठेकेदारों को सुनिश्चित स्थान पर खुली डाक पद्धति में शामिल होना होगा. इसमें उच्चतम डाक की बोली बोलकर डाक नहीं लेने वाले व्यक्ति की जमानत की राशि जप्त कर ली जायेगी. वहीं, बंदोबस्ती होने के स्थिति में सफल डाकवक्ता को उच्चतम डाक की संपूर्ण राशि उसी दिन एक मुफ्त जमा करनी होगी़ अन्यथा उनके साथ बंदोबस्ती नहीं की जायेगी. वहीं, पूर्व के वर्षों में जिस व्यक्ति के नाम से बंदोबस्ती हुई है और यदि उनके पास कोई राशि बकाया रह गयी है, तो वैसे स्थिति में उसे व्यक्ति को डाक में भाग लेने का अधिकार नहीं होगा. हालांकि, मेले के ठेका लेने के इच्छुक कई लोग आचरण प्रमाण पत्र बनाने में जुट गये हैं. मेले का स्थान बदलने से लोगों के उत्साह में आयी कमी: रजौली में प्रत्येक वर्ष गुरुपर्व मेला का आयोजन बजरंगबली हाट पर अनुमंडलीय अस्पताल के सामने संगत की खाली पड़ी फील्ड में आयोजित होता था. किंतु, उक्त फील्ड का अतिक्रमण हो जाने के बाद विगत तीन-चार वर्षों से गुरुपर्व मेले का आयोजन संगत के पीछे परती जमीन में किया जा रहा है. गुरुपर्व मेला ग्रामीण मेले के साथ-साथ बाजारवासियों के मनोरंजन का उत्तम साधन है. मेले में दिन के समय में रजौली व आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीण दिन से लेकर शाम तक मनोरंजन करते थे. वहीं, देर शाम से लेकर मेला बंद होने तक बाजार वासियों का भीड़ हुआ करती थी. इस मेले में प्रशासन और पुलिस लोगों की सुरक्षा में दिन-रात सक्रिय रहते थे. वहीं, मेले का स्थान बजरंगबली चौक से संगत के पीछे होने से लोगों के उत्साह में काफी कमी आ गयी है. मेले में जानेवाले लोगों की संख्या में भी काफी कमी आ गयी है. किंतु मेले का आयोजन आज भी परंपरागत ढंग से किया जा रहा है. वहीं, मेला आयोजक सह ठेकेदार मेले को आकर्षक बनाने को लेकर बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूला, मिक्की माउस, रेल गाड़ी, छोटे-छोटे खिलौने, महिलाओं के लिए सौंदर्य प्रसाधन के सामग्री व रसोईघर के सामान एवं लोगों के खान-पान के लिए स्वादिष्ट व्यंजनों की व्यवस्था किया जा रहा है. ताकि मेले में अधिक से अधिक लोग अपने परिजन के साथ पहुंचकर मनोरंजन करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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