श्रृंगी ऋषि पर्वत पर पूजा कर श्रद्धालुओं ने की संतान प्राप्ति की कामना
Updated at : 23 Jan 2026 5:27 PM (IST)
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NAWADA NEWS.प्रकृति की मनोरम छटा और सनातन अध्यात्म के अद्भुत मिलन स्थल रजौली प्रखंड की हरदिया पंचायत शुक्रवार को पूरी तरह श्रद्धा के सागर में डूबी नजर आयी.
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बसंत पंचमी पर श्रृंगी ऋषि पर्वत पर उमड़ा आस्था का सैलाब
त्रेता युग से है श्रृंगी ऋषि पर्वत का संबंध, यहां मनोकामना मांगने आते हैं लोगप्रकृति और अध्यात्म के संगम में गूंजे मन्नतों के जयकारे
फोटो कैप्शन- पहाड़ की चोटी पर पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु.प्रतिनिधि, रजौली
प्रकृति की मनोरम छटा और सनातन अध्यात्म के अद्भुत मिलन स्थल रजौली प्रखंड की हरदिया पंचायत शुक्रवार को पूरी तरह श्रद्धा के सागर में डूबी नजर आयी. माघ बसंत पंचमी के पावन अवसर पर यहां स्थित ऐतिहासिक श्रृंगी ऋषि पर्वत पर श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पर्वत की कंदराएं जयकारों से गूंज उठीं. फुलवरिया जलाशय की नीली लहरों के साये में स्थित यह पर्वत न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि करोड़ों लोगों की अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक भी है. पर्वत की तलहटी से लेकर करीब डेढ़ किलोमीटर की खड़ी और दुर्गम चढ़ाई तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं. हाथों में धार्मिक ध्वज और मन में अटूट विश्वास लिये भक्त निरंतर शिखर की ओर बढ़ते रहे.पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
इस पवित्र स्थल की महिमा इतनी व्यापक है कि यहां केवल स्थानीय जिलों से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचे. परंपरा के अनुसार श्रद्धालु शिखर पर पहुंचकर विधि-विधान से ध्वज अर्पित करते हैं और प्रसाद चढ़ाकर कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिससे पूरा परिवेश भक्ति के रंग में सराबोर रहा.राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए इस स्थल पर की थी कठोर तपस्या
इस सिद्ध पीठ की पौराणिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए पंडित ज्ञानवर्त ने बताया कि श्रृंगी ऋषि पर्वत का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की कामना से इसी पावन भूमि पर यज्ञ और कठोर तपस्या की थी, जिसके प्रतिफल स्वरूप उन्हें भगवान श्रीराम सहित चार पुत्रों की प्राप्ति हुई. यही कारण है कि आज भी संतान प्राप्ति और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से यहां आते हैं. मन्नत पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में बच्चों के मुंडन संस्कार भी यहां संपन्न कराये जाते हैं.श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए थे पुख्ता इंतजाम
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं ने परिजनों के साथ प्राकृतिक वादियों में भोजन का आनंद लिया. चूड़ा-दही के पारंपरिक भोज के साथ विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया गया. पर्वत के आसपास का क्षेत्र मेले में तब्दील दिखा, जहां खेल-खिलौनों की खरीदारी से लेकर चाय-नाश्ता और गरमागरम जलेबियों का लोग आनंद लेते दिखे. श्रृंगी ऋषि पर्वत और समीपवर्ती जलाशय का दृश्य आधुनिक पर्यटन और पुरातन आस्था के अद्भुत संगम का उदाहरण प्रस्तुत करता नजर आया. हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे. थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर रंजीत कुमार ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी पर्वत क्षेत्र में भारी भीड़ रही. श्रद्धालुओं का आवागमन सुचारू रहे और सुरक्षित बनी रहे, इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गयी थी. पुलिसकर्मी यातायात व्यवस्था संभालते हुए लगातार मुस्तैद दिखे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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