सफाई नदारद, गलियों में सड़कों की मरम्मत भी नहीं
Updated at : 08 Jun 2016 7:54 AM (IST)
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शहर में नागरिक सुविधाओं के प्रति गंभीर नहीं है प्रशासन नवादा (सदर) : जिला मुख्यालय के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रति प्रशासन गंभीर नहीं है. शहर के लोगों द्वारा टैक्स का भुगतान किये जाने के बाद भी उन्हें न तो समुचित सफाई व्यवस्था उपलब्ध करायी जाती है और न ही गलियों में […]
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शहर में नागरिक सुविधाओं के प्रति गंभीर नहीं है प्रशासन
नवादा (सदर) : जिला मुख्यालय के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रति प्रशासन गंभीर नहीं है. शहर के लोगों द्वारा टैक्स का भुगतान किये जाने के बाद भी उन्हें न तो समुचित सफाई व्यवस्था उपलब्ध करायी जाती है और न ही गलियों में सड़कों की मरम्मत करायी जाती है.
इसके कारण आज भी नवादा शहर के लोग ग्रामीण परिवेश में रहने को मजबूर हैं. कहने को तो जिला मुख्यालय के सभी 33 वार्डों में विकास कार्य किया जा रहा है. गलियों की पीसीसी, लाइट की व्यवस्था नगर पर्षद द्वारा करायी जाती है. परंतु 33 वार्डों में चार-पांच वार्डों को छोड़ कर कोई भी ऐसा वार्ड नहीं है, जहां प्रतिदिन सफाईकर्मी द्वारा गलियों में झाड़ू लगाया जाता है.
सबसे बुरा हाल तो वैसे वार्डों का है जहां हल्की बारिश के बाद बरसात का पानी बीच रास्ते पर आ जाता है. नगर पर्षद में इस संबंध में संबंधित नागरिकों द्वारा कई बार शिकायतें दर्ज करायी जाती है, परंतु समस्या का समाधान नहीं हो पाता है. कई वार्ड में वर्षों से नालियों की उड़ाही नहीं होने के कारण नालों की गंदगी से स्थानीय लोग परेशान रहते हैं. नगर पर्षद की ओर से कहने को तो सभी 33 वार्डों में दो-दो सफाईकर्मी उपलब्ध कराये गये हैं. परंतु ये सफाईकर्मी प्रतिदिन वार्डों में पहुंचते ही नहीं हैं तो सफाई कहां से हो पायेगी.
लोग ग्रामीण परिवेश में रहने को विवश : नगर पर्षद क्षेत्र के कई वार्डों में गलियों में पीसीसी ढलाई वर्षों पूर्व करायी गई थी. परंतु घटिया गुणवता के कारण दो वर्षों के भीतर ही सड़कें टूट कर बरबाद हो गयी. इससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
ऐसे टूटी सड़कों, टूटे नालों के स्लैब का निर्माण प्रशासन या नगर पर्षद की ओर से नहीं कराये जाने से कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी है. फिर भी नगर पर्षद नगर के लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कहती है. कई स्थानों पर वर्षों पूर्व बनी सड़क के ऊपर ही पीसीसी ढलाई कर पैसे की निकासी की जा रही है. शहर के कई ऐसे वार्ड भी हैं जहां के लोग आज भी ग्रामीण परिवेश में रहने को मजबूर हैं.
पेयजल की भी नहीं है समुचित व्यवस्था
नगर पर्षद की कई बैठकों में नागरिकों को बेहतर सुविधा व चापाकल उपलब्ध कराने को लेकर प्रस्ताव पारित किये गये. लेकिन, सबसे दुखद स्थिति तो यह है कि चापाकल लगने के बाद भी नागरिकों की प्यास नहीं बुझती है. पहले वर्ष पानी देने वाला चापाकल अगले साल खुद फेल हो जाता है.
इसे मरम्मत के लिए नगर पर्षद के पास अपना संसाधननहीं होने के कारण ऐसे खराब पड़े चापाकल बरबाद हो रहे हैं. कई वार्डों में वर्षों पहले भी पेयजल आपूर्ति के लिए सरकारी पाइप बिछाये गये थे. परंतु लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया.
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नागरिक प्रत्येक साल नगर पर्षद को पानी का टैक्स भी भुगतान करते हैं. इसके बावजूद उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पा रही है. रोशनी की भी मुकम्मल व्यवस्था नहीं किये जाने से नागरिकों को शहर के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में होने का एहसास होता है.
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