नामांकन करने की मची रही होड़

Updated at : 16 Mar 2016 7:11 AM (IST)
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नामांकन करने की मची रही होड़

पंचायत चुनाव. पत्नी, मां व परिजनों को उतार रहे मैदान में नवादा (सदर) : पंचायती चुनाव में द्वितीय व तृतीय चरण की मतदान को लेकर जिला पर्षद, पंचायत समिति, पंच, मुखिया आदि पदों के लिए नामांकन पत्र भरने का काम मंगलवार को भी पूरे जोर शोर से चलता रहा. अनुमंडल कार्यालय, प्रखंड कार्यालयों में नामांकन […]

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पंचायत चुनाव. पत्नी, मां व परिजनों को उतार रहे मैदान में
नवादा (सदर) : पंचायती चुनाव में द्वितीय व तृतीय चरण की मतदान को लेकर जिला पर्षद, पंचायत समिति, पंच, मुखिया आदि पदों के लिए नामांकन पत्र भरने का काम मंगलवार को भी पूरे जोर शोर से चलता रहा.
अनुमंडल कार्यालय, प्रखंड कार्यालयों में नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए काफी होड़ मची रही. रोह पश्चिमी जिला पर्षद के लिए पत्रकार सतीश कुमार के पिता रंजीत कुमार ने रजौली अनुमंडल कार्यालय में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. हजारों समर्थको के साथ काशीचक जिला पर्षद सीट के लिए मंटल सिंह की पत्नी सुनैना देवी ने भी नवादा अनुमंडल कार्यालय में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. कौआकोल प्रखंड के सेखोदेवरा पंचायत से मुखिया प्रत्याशी के लिए छायाकार वीरेंद्र वर्मा की माता चिंता देवी ने नामांकन पत्र प्रखंड कार्यालय में जमा किया.
कौआकोल प्रखंड की केवाली पंचायत से पंचायत समिति सदस्य के लिए रीना राय ने समर्थकों के साथ प्रखंड कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल किया. पंचायत चुनाव को लेकर नेताओं में काफी होड़ मची है. सभी लोग चुनावी महासमर में अपना-अपना किस्मत आजमाने का प्रयास कर रहे है. गौरतलब हो कि त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, पंच व जिला पर्षद सदस्य को काफी अधिकार मिलने के कारण लोगों का रूझान इस ओर बढ़ा है.
कई निर्वाचन क्षेत्र सुरक्षित होने के कारण चुनाव लड़ने का मंसूबा पाल रखे कुछ नेता अपनी पत्नी, मां आदि परिजनों को चुनाव मैदान में खड़ा कर रहे हैं. वहीं कई निर्वाचन क्षेत्रों में डमी उम्मीदवार के रूप में भी कई लोगों को खड़ा किया जा रहा है. ऐसे में वास्तविक उम्मीदवार का चयन करना मतदाताओं के लिए परेशानी का सबब बन जाता है. चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरगरमी तेज हो गयी है. कई क्षेत्रों में तो अभी से ही मतदाताओं को रिझाने के लिए देशी शराब स्टॉक किये जा रहे हैं. 31 मार्च के बाद से जिले में देसी शराब की बिक्री पूर्णत: प्रतिबंधित है.
ऐसे में चुनाव मैदान में खड़े उम्मीदवार अप्रैल-मई में होनेवाले चुनाव को लेकर अभी से ही तैयारी कर रहे हैं. नामांकन के दौरान अधिक से अधिक समर्थकों की भीड़ के साथ पहुंचने वाले प्रत्याशी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त होने का प्रयास करते हैं. परंतु उम्मीदवारों के साथ-साथ मतदाता भी अपने विवेक बुद्धि से उम्मीदवार का चयन करने का मन बना चुके है.
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