वोट लूटने व मतदाताओं को धमकाने की तैयारी !

Updated at : 10 Mar 2016 12:31 AM (IST)
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वोट लूटने व मतदाताओं को धमकाने की तैयारी !

स्थानीय स्तर पर तैयार किये जा रहे कट्टे बूथ लूटने व वोटरों को प्रभावित करने का जिम्मा लेनेवाले कई गिरोह हुए सक्रिय नवादा (सदर) : त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही जिले में अस्त्र शस्त्र की तस्करी भी बड़े पैमानों पर शुरू हो गयी है. पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत […]

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स्थानीय स्तर पर तैयार किये जा रहे कट्टे
बूथ लूटने व वोटरों को प्रभावित करने का जिम्मा लेनेवाले कई गिरोह हुए सक्रिय
नवादा (सदर) : त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही जिले में अस्त्र शस्त्र की तस्करी भी बड़े पैमानों पर शुरू हो गयी है. पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने वाले अधिकतर उम्मीदवार साम, दाम, दंड, भेद की नीति के तहत चुनाव में सारी खर्चा के तहत अस्त्र शस्त्र की सौदेबाजी भी कर रहे हैं. स्थानीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर शस्त्रों का निर्माण किया जा रहा है.
अकबरपुर प्रखंड क्षेत्र में अवैध शस्त्रों का सौदागर एक बार फिर से सक्रिय होकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है. जिले में बननेवाले देशी कट्टा के साथ-साथ मुंगेर व गया में बननेवाले शस्त्रों की बड़ी खेप आयात किये जा रहे हैं. वोट लूटने व मतदाताओं को धमकाने के उद्देश्य से प्रत्याशी व उनके समर्थकों द्वारा बड़े पैमाने पर शस्त्रों की खरीद फरोख्त की जा रही है. विगत कई चुनाव से बूथ लूटेरों के खिलाफ प्रशासन की ओर से कार्रवाई किये जाने के कारण बूथ लूटेरों का हथियार धरा का धरा रह जाता है. चुनाव में बूथ लूटने व वोटरों को प्रभावित करने का जिम्मा लेने वाले कई गिरोह के सदस्यों ने बताया कि हथियार का भय दिखाने के बाद मतदाता मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाते हैं.
इससे फर्जी मतदान करने में काफी सहूलियत होती है. एक मतदान केंद्र पर वोटरों को प्रभावित करने के लिए 20 से 25 हजार रुपये तक लिये जाते हैं. जिले के सभी 14 प्रखंडों में अलग-अलग तिथियों में मतदान होने के कारण वोटरों को प्रभावित करने वाले गिरोह कई प्रत्याशियों से अपना ताल मेल बढ़ा कर धंधा को चार चांद लगाने का प्रयास कर रहे हैं.
चुनाव के दौरान हथियार के साथ-साथ बूथ मैनेज करनेवाले लोगों की भी बड़ी फौज अन्य दूसरे जिलों से मंगाये जाते हैं. अवैध हथियारों की खरीद फरोख्त करनेवाले गिरोह अभी से ही सक्रिय हो गये हैं. ऐसे लोगों का मानना है कि मतदान से पूर्व संबंधित क्षेत्रों की सीमाओं को सील कर दिया जाता है. इसके कारण संबंधित स्थानों पर शस्त्रों की आपूर्ति नहीं हो पाती है.
गिरोह से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि इस धंधे में स्थानीय जिले के कम दूसरे जिलों के लोगों को ज्यादा लगायाजाता है. कम समय और थोड़े रिस्क में अधिक रुपये कमाने की लालसा रखने वाले अधिकतर युवा इस गिरोह से जुड़ रहे है. इस बार का पंचायत चुनाव काफी रोचक होने की संभावना जतायी जा रही है.
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