मछलीपालकों को नहीं मिल रहा लाभ
Updated at : 15 Jan 2016 3:45 AM (IST)
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नवादा (नगर) : मत्स्य पालन विभाग की उदासीनता के कारण जिले के मछली पालकों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. मछली पालकों के लिए नया तालाब बनाना जिले में काफी मुश्किल है. सरकार की ओर से नये तालाब बनाने के लिए कई आकर्षक योजनाएं बनायी गयी है. बावजूद इसका लाभ आम लोगों […]
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नवादा (नगर) : मत्स्य पालन विभाग की उदासीनता के कारण जिले के मछली पालकों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. मछली पालकों के लिए नया तालाब बनाना जिले में काफी मुश्किल है. सरकार की ओर से नये तालाब बनाने के लिए कई आकर्षक योजनाएं बनायी गयी है. बावजूद इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है.
जिले में वर्ष 2014-15 में नया तालाब बनाने के लिए मिले लक्ष्य को भी अब तक पूरा नहीं किया गया है. अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए नर्सरी बनाने के लिए 90 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है. वर्ष 2014-15 में 10 एकड़ जमीन में तालाब बनाने के लिए लक्ष्य दिया गया था. इसके लिए आधा एकड़ भूमि वाले एससी कोटि के मछली पालकों को 90 प्रतिशत अनुदान के साथ मोटर पंप लगाने के लिए भी अलग से रुपये मिलता है. लेकिन, अब तक इसके लिए सभी लाभुकों को नहीं खोजा जा सका है. अब तक 15 मछली पालको को इसका लाभ मिला है.
जबकि, शेष मछली पालक अभी भी इस लाभ से वंचित हैं. आधा एकड़ में नर्सरी तालाब बनाने के लिए एक लाख 35 हजार व मोटर लगाने के लिए 75 हजार रुपये अलग से 90 प्रतिशत अनुदान पर दिया जाना है. लेकिन, इसके लिए भी लाभुक नहीं मिल पाये हैं. वहीं, पिछड़ी जाति व सामान्य वर्ग के मछली पालकों के लिए सात हेक्टेयर जमीन में नर्सरी तालाब बनाने का लक्ष्य रखा गया था. इसके लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है. बावजूद इसके अब तक मछली पालकों को इसका लाभ नहीं मिला है. बैंक व विभाग के कागजी कार्रवाई के कारण अब तक 15 आवेदन तो प्राप्त हुए हैं. इनमें से केवल दो को पहले किस्त के रुपये मिला है.
मिल रहा प्रशिक्षण: मछली पालकों के लिए मत्स्य विभाग द्वारा ट्रेनिंग की व्यवस्था की गयी है.
27 जनवरी को 30 मछली पालकों का दल 10 दिनों के लिए पटना के दीप नारायण सिंह सहकारिता प्रबंधन संस्थान में प्रशिक्षण लेंगे. इसके अलावा एक मार्च से 20 मछली पालकों को छतीसगढ़ के पावर खेड़ा स्थित ट्रेनिंग सेंटर में मछली पालन के आधुनिक तरीके बतलाये जायेंगे. प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए मछली पालकों का चयन कर लिया गया है.
तालाबों की नहीं हो पा रही बंदोबस्ती: मत्स्य पालन विभाग के लगभग आधे तालाबों व आहरों की बंदोबस्ती नहीं हुई है. जिले में 232 तालाबों व आहरों के टेंडर के लिए तिथि निकाली गयी है.
15 व 18 जनवरी को इसके लिए टेंडर किया जायेगा. विभाग द्वारा लगातार प्रयास किये जाने के बावजूद तालाबों को टेंडर नहीं हो पा रहा है. इसके कारण विभाग को आर्थिक हानि झेलनी पड़ रही है. टेंडर नहीं होने का मुख्य कारण यह है कि सरकारी तालाब व आहर पर अवैध कब्जा कर मकान या अन्य निर्माण कर लिया गया है या उस तालाब या आहर पर कोई दबंग कब्जा किये हुए है.
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