अब मनोरंजन का बोझ तीगुना

अब मनोरंजन का बोझ तीगुना केबल टीवी देखने के लिए चुकाने होंगे अधिक रुपये छोटे केबल अपरेटरों का आस्तित्व समाप्ति की ओरफोटो- 12प्रतिनिधि, हिसुआडिजिटल केबल प्रसारण की वजह से अब आम लोगों को टीवी देखना काफी महंगा साबित होगा़ 2016 की पहली जनवरी से डिजिटल सेटअप बॉक्स के जरिये ही केवल देखने की केंद्र सरकार […]
अब मनोरंजन का बोझ तीगुना केबल टीवी देखने के लिए चुकाने होंगे अधिक रुपये छोटे केबल अपरेटरों का आस्तित्व समाप्ति की ओरफोटो- 12प्रतिनिधि, हिसुआडिजिटल केबल प्रसारण की वजह से अब आम लोगों को टीवी देखना काफी महंगा साबित होगा़ 2016 की पहली जनवरी से डिजिटल सेटअप बॉक्स के जरिये ही केवल देखने की केंद्र सरकार की अधिसूचना का असर अब जिला और क्षेत्र में पड़नेवाला है़ पहली जनवरी को ही कई चैनलों ने अपना प्रसारण बंद कर दिया है. इससे छोटे केबल ऑपरेटर सहित सामान्य व निम्न तबके के उपभोक्ताओं में हड़कंप मचा है़ जीटीवी, सोनी, बिग मैजिक, सीएनबीसी आवाज आदि ने अपना प्रसारण बंद कर दिया है़ 31 दिसंबर के बाद एनालॉग प्रसारण को बंद करने की नीति से आम लोगों पर मनोरंजन का बोझ, तो बढ़ेगा ही छोटे केबल ऑपरेटर का आस्तित्व लगभग समाप्त होना तय है़सेटअप बॉक्स से बढ़ेगा खर्चआम उपभोक्ताओं को 12 सौ रुपये से लेकर 16 सौ रुपये का सेटअप बॉक्स सबसे पहले खरीदना होगा़ उसके माध्यम से ही टीवी को ऑडियो व वीडियो सिग्नल प्राप्त होगा़ चैनलों के पैकेज पर दो सौ से लेकर चार सौ रुपये प्रति माह खर्च करने पड़ेंगे़ जबकि, अभी जिला व शहरी क्षेत्रों के आम उपभोक्ता 80 से सौ रुपये प्रति माह अदा कर टीवी पर विभिन्न चैनलों को देख रहे थे़ यही नहीं बड़े एमएसओ की मनमानी उन्हें समय-समय पर सहनी होगी़ हर साल पैकेज का रेट भी बढ़ना तय माना जा रहा है़डिजिटल प्रसारण के लिए चाहिए बड़ी पुंजीडिजिटल केबल प्रसारण के लिए ऑपरेटरों को डिजिटल प्रसारण करना होगा़ अब तक एनालॉग प्रसारण किया जा रहा है़ डिजिटल प्रसारण के लिए बड़ी पूंजी 20 से 30 लाख रुपये की लागत आती है, जो छोटे ऑपरेटरों के लिए संभव नहीं है़ सरकार राज्य स्तर पर चार-पांच बड़े ऑपरेटरों एमएसओ को डिजिटल का लाइसेंस दी है. फिलहाल वही प्रसारण कर रहे हैं. उन्हें ही जिला और अन्य जगहों पर हावी होना है़ फाइवर ऑप्टिकल वायर से पटना और अन्य बड़े एसएमओ का सिग्नल जिला व शहरी क्षेत्रों तक आना तय है़ ऐसे में सारा एग्रीमेंट और अधिकार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप में बड़े एमएसओ के पास ही रहना है. क्योंकि, छोटे ऑपरेटर इतनी बड़ी पूंजी लगा नहीं सकते और लगा कर जोखिम भी उठाना नहीं चाहते़ छोटे ऑपरेटर अगर उनका सिग्नल लेते हैं, तो वह उनके अधीन हैं और उनके गाइडलाइन पर ही काम कमीशन पर करना है़महानगरों में ही नहीं हुआ डिजिटलाईजेशनपहले फेज में होने वाले चार महानगर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व चेन्नई में ही अभी पूरी तरह से डिजिटलाइजेशन नहीं हुआ है़ वहां के बहुत सारे क्षेत्रों में अभी तक एनालॉग सिग्नल से ही चल रहे है़ं दूसरे फेज में अन्य 38 बड़े शहरों में अब भी डिजिटलाइजेशन नहीं हुआ है़ ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में फेज थ्री अर्थात 31 दिसंबर, 2016 को एनालॉग को बंद होना था, लेकिन अधिकतर जिलों में अभी तक ठीक से प्रदेश स्तर के एमएसओ का सिग्नल भी नहीं पहुंचा है़ नवादा और उसके आस-पास के जिलों का भी यही हाल है़ वहां ठीक से पांच से 10 फीसदी भी सेटअप नहीं लगा है़ ऐसे में केंद्र सरकार का निर्देश व रवैये को लोग गलत बता रहे हैं. चैनलों पर दबाव बना कर चैनल बंद किया जाना आम लोगों की परेशानी का सबब बन रहा है़ केंद्र सरकार सभी क्षेत्र के केबल उपभोक्ताओं से पूर्ण राजस्व वसूली की कमर कस कर सामान्य व निम्न तबके के लोगों के साथ अन्याय कर रही है़ यहां बड़े पुंजीपति और गिने-चुने एमएसओ को बढ़ावा देने की भी बात आमजन कर रहे हैं.मंत्रालय का निर्देशसूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की 30 जून, 2015 व 16 अक्तूबर, 2015 फिर उसके बाद 02 नवंबर, 2015 की अधिसूचना के अनुसार फेज थ्री अर्थात 31 दिसंबर, 2015 तक देश के सभी शहरी क्षेत्रों में एनालॉग सिग्नल का प्रसारण बंद कर देना था़ केबल ऑपरेटर 31 दिसंबर की तक इस तिथि को बढ़ाये जाने का आसरा देखते रहे़ कई मामलों में मंत्रालय को मांगें भी भेजी गयी पर सरकार द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया़मुख्यमंत्री के समक्ष रखेगें मांगशहरी क्षेत्र के लिए डिजीटलाईजेशन की तिथि को आगे बढ़ाने को लेकर केबल ऑपरेटरों ने सात जनवरी, 2016 को कोलकाता में एक बैठक रखी है़ प्रदेश सहित नवादा के ऑपरेटर उसमें हिस्सा लेने जा रहे है़ं जानकारी के अनुसार, वहां की बैठक के बाद पटना में बैठक रखी जायेगी़ उसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रदेश के शहरी क्षेत्रों व छोटे केबल ऑपरेटर के लिए डिजीटलाईजेशन की तिथि आगे बढ़वाने की पहल करने की मांग की जायेगी़ जब शहरी क्षेत्रों में ही अभी यह नहीं हो पा रहा है, तो अन्य स्थानों पर इतनी जल्दी कैसे हो पायेगा. बोले उपभोक्ताइस तरह से छोटे केबल ऑपरेटरों का आस्तित्व समाप्त हो जायेगा़ बड़े एसएमओ का ही सिग्नल जिला और अन्य जगहों पर लाने की पहल है़ छोटे ऑपरेटरों को पूरी तरह से मरण है़ वह कमीशन एजेंट बनकर रह जायेंगे और बेरोजगार हो जायेंगे.सुनील कुमार, हिसुआअभी हम लोग सौ रुपये महीने में केबल देख रहे थे़ अब पैकेज के हिसाब से दो सौ से तीन सौ रुपये देने पड़ेंगे. सेटअप बॉक्स लगने की बारी है़ ऐसे में बॉक्स का भी पैसा चुकाना ही होगा़ हमारी जेब ढिली होगी. किशोरी पंडित, बढ़ही बिगहा, हिसुआमनोरंजन से अधिक से अधिक कमाने की यह केंद्र सरकार की नीति है. इसका असर नौजवान व शहरी लोगों पर पड़े या न पड़े पर सामान्य और निम्न तबके के लोगों पर जो आसानी से टीवी देख कर मनोरंजन कर लेते थे. उन्हें भी अब अमीरों की तरह ही पैसे चुकाने पड़ेंगे.देवेंद्र विश्वकर्मा, बढ़ही बिगहाकम खर्च में आवश्यक सभी चैनल हम लोग देख लेते थे. अब तो उन चैनलों को देखने के लिए तीन गुनी रकम चुकानी होगी. जो हम आम लोगों पर एक और बोझ होगा़ अभी छोटे जगह के लोग इसके लिए तैयार नहीं हैं. इसकी तिथि बढ़नी चाहिए.मोहम्मद शमीम आलम, मेनरोड, हिसुआ
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