बच्चों के पोषण के लिए पांच सूत्रों का हो रहा प्रचार-प्रसार
Author Prabhat khabar digital desk
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नवादा : बेहतर पोषण प्राप्त करने के लिए बच्चों के अभिभावकों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है. राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि यहां के बच्चे स्वास्थ्य व कुपोषणरहित हो. इसको लेकर राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलायी जा रही है. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण से लड़ने के […]
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नवादा : बेहतर पोषण प्राप्त करने के लिए बच्चों के अभिभावकों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है. राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि यहां के बच्चे स्वास्थ्य व कुपोषणरहित हो. इसको लेकर राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलायी जा रही है. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण से लड़ने के लिए मार्च 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की गयी है. अभियान के तहत 2022 तक छह साल की आयु के बच्चों में कुपोषण का स्तर 38.4 प्रतिशत से घटा कर 25 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया.
सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. व्यवहार परिवर्तन के लिए पोषण के पांच सूत्र दिये गये हैं. इसमें पहले सुनहरे एक हजार दिन, पौष्टिक आहार, अनीमिया प्रबंधन, डायरिया रोकथाम एवं स्वच्छता को शामिल किया गया है.पांच सूत्रों से कुपोषण पर लगाम: कुपोषण पर लगाम लगाने के लिए पोषण अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पांच सूत्र बताये गये हैं:
पहले सुनहरे एक हजार दिन : पहले एक हजार दिनों में तेजी से बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास होता है. इसमें गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म से दो साल तक की उम्र तक की अवधि शामिल है. इस दौरान बेहतर स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल तथा सही देखभाल बच्चों के पूर्ण विकास में सहयोगी होता है.
पौष्टिक आहार
शिशु जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है. छह माह के बाद बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास काफी तेजी से होता है. इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है. घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है.
एनीमिया प्रबंधन
गर्भवती माता, किशोरियां एवं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम जरूरी है. गर्भवती महिला को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली जरूर खानी चाहिए. 10 वर्ष से 19 साल की किशोरियों को सप्ताह में सरकार द्वारा दी जाने वाली आयरन की एक नीली गोली का सेवन करना चाहिए. 6 माह से 59 माह के बच्चों को सप्ताह में दो बार एक मिलीलीटर आयरन सिरप देनी चाहिए.
डायरिया प्रबंधन
शिशुओं में डायरिया शिशु मृत्यु का कारण भी बनता है. छह माह तक के बच्चों के लिए केवल स्तनपान (ऊपर से कुछ भी नहीं) डायरिया से बचाव करता है. साफ-सफाई एवं स्वच्छ भोजन डायरिया से बचाव करता है. डायरिया होने पर लगातार ओआरएस का घोल एवं 14 दिन तक जिंक देना चाहिए.
स्वच्छता व साफ सफाई जरूरी
जिला आईसीड्स कार्यक्रम पदाधिकारी वंदना पांडे ने बताया की साफ पानी व ताजा भोजन संक्रामक रोगों से बचाव करता है. शौच जाने से पहले एवं बाद में तथा खाना खाने से पूर्व एवं बाद में साबुन से हाथ धोना चाहिए. घर में तथा घर के आस-पास सफाई रखनी चाहिए. इससे कई रोगों से बचा जा सकता है.
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