5 मई को है एकदन्त संकष्टी चतुर्थी, नोट करें शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और चंद्रोदय का समय

Published by :Neha Kumari
Published at :03 May 2026 8:23 AM (IST)
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Ekadant Sankashti Chaturthi

एकदन्त संकष्टी चतुर्थी 2026

Ekadant Sankashti Chaturthi: प्रथम पूजनीय भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए संकष्टी चतुर्थी का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है. यदि आप पहली बार यह व्रत करने वाले हैं, तो जान लीजिए कि इस पूजा में किन-किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है.

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Ekadant Sankashti Chaturthi: संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित हिंदू धर्म का एक पर्व है. हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले इस पर्व को ‘एकदंत संकष्टी चतुर्थी’ कहा जाता है. इस बार यह पर्व मंगलवार को पड़ रहा है. मंगलवार के दिन चतुर्थी तिथि होने के कारण इसे ‘अंगारकी संकष्टी चतुर्थी’ भी कहा जा रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यधिक शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और गणपति की आराधना करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और अटके हुए कार्य पूर्ण होते हैं.

एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि का विवरण इस प्रकार है:

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 05 मई 2026, सुबह 05:24 बजे से
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 06 मई 2026, सुबह 07:51 बजे तक
  • गणेश पूजा का शुभ समय: सुबह 08:58 बजे से दोपहर 01:58 बजे तक (लाभ और अमृत चौघड़िया)
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से 12:45 बजे तक

चंद्रोदय का समय

संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है.

  • चंद्रोदय का समय: रात 10:35 बजे (स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है)

पूजा सामग्री लिस्ट

भगवान गणेश की पूजा के लिए इन सामग्रियों को पहले से एकत्र कर लें:

  • प्रतिमा एवं वस्त्र: भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र, चौकी के लिए लाल या पीला कपड़ा और कलावा (मौली).
  • अभिषेक एवं तिलक: शुद्ध जल, गंगाजल, रोली, चंदन, सिंदूर और बिना टूटे हुए चावल (अक्षत).
  • पुष्प एवं दूर्वा: लाल फूल, गेंदे के फूल और 21 दूर्वा घास की गांठें.
  • धूप-दीप: शुद्ध घी का दीपक, धूपबत्ती, अगरबत्ती, कपूर और माचिस.
  • भोग: मोदक, बेसन के लड्डू, मौसमी फल, गुड़, सुपारी और लौंग-इलायची.

पूजा विधि

  • संकल्प: प्रातः काल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.
  • स्थापना: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में एक चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें.
  • पूजन: दीप जलाएं और गणपति को जल, अक्षत, सिंदूर और दूर्वा अर्पित करें. “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें.
  • कथा और आरती: संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा सुनें और अंत में गणेश जी की आरती करें.
  • चंद्र अर्घ्य: रात्रि में चंद्रमा निकलने पर दूध मिश्रित जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और फिर फलाहार ग्रहण कर व्रत खोलें.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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