दूल्हे को विदा कराने बरात लेकर पहुंची दुल्हन

Updated at : 09 Mar 2018 4:47 AM (IST)
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दूल्हे को विदा कराने बरात लेकर पहुंची दुल्हन

हिसुआ : हिसुआ के सिंधौली गांव विवाह कर दूल्हे को विदा कर ले जाने के लिए गया के अतरी थाना के मौलानगर गांव से कन्या बरात लेकर पहुंची. दूल्हे और दूल्हे के परिजनों ने गुलदस्ता देकर कन्या और कन्या पक्षवाले का स्वागत किया. फिर बुद्ध और अंबेडकर को साक्षी मान कर सामाजिक परिवर्तन का अनोखा […]

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हिसुआ : हिसुआ के सिंधौली गांव विवाह कर दूल्हे को विदा कर ले जाने के लिए गया के अतरी थाना के मौलानगर गांव से कन्या बरात लेकर पहुंची. दूल्हे और दूल्हे के परिजनों ने गुलदस्ता देकर कन्या और कन्या पक्षवाले का स्वागत किया. फिर बुद्ध और अंबेडकर को साक्षी मान कर सामाजिक परिवर्तन का अनोखा विवाह हुआ. बरात में बस और अन्य वाहनों से कन्या पक्ष के नर-नारी और बच्चे पहुंचे थे. ठीक उसी तरह जिस तरह दूल्हा बरात लेकर आता है.

न पंडित बैठे न मंत्रोच्चारण हुआ. मानववादी तरीके से शादी हुई. लड़की के यहां तिलक फलदान करने वर पक्ष वाले पांच मार्च को मौलानगर गये थे. हिसुआ के सिंधौली गांव निवासी मोसाफिर कुशवाहा के पुत्र पंकज कुमार और गया के अतरी थाना के मौलानगर निवासी रामाशीष प्रसाद की पुत्री कुमारी अनमेहा की बिना दहेज की अनोखी शादी थी. बरात हिसुआ गया रोड से आगे बढ़ी तो कन्या और उनकी सहेलियों को रथ पर सवार देख लोग आश्चर्य करने लगे. आगे बैंड पार्टी और पीछे बराती थे.इस शादी में दहेज का नामोनिशान नहीं था.

बाल-विवाह व दहेज से दूर रहने का संदेश
सिंधौली में सामाजिक परिवर्तन विवाह
गया से बरात लेकर हिसुआ पहुंची दुल्हन
दूल्हा पक्ष ने किया जोरदार स्वागत
भगवान बुद्ध व बाबा अांबेडकर बने साक्षी
आडंबरों व फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की पहल
मोसाफिर कुशवाहा व उनके परिवार वालों ने बताया कि सामाजिक परिवर्तन के लिए यह अनोखी शादी है. विवाह बहुत कम खर्च में हो रहा है. इसमें ब्राह्मणवाद से छुटकारा, नशामुक्ति का संदेश, बाल-विवाह से मुक्ति, नारी सशक्तीकरण, प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना आदि उद्देश्य है. इस संदेश का पत्रक भी बांटा गया है. कन्या के पिता रामाशीष प्रसाद और चाचा देवानंद ने बताया कि ऐसी शादी समाज में करके फिजूलखर्ची और अन्य आडंबरों पर रोक लगायी जा सकती है. हमारी पहल को समाज के लोग सराह भी रहे हैं. आमंत्रण कार्ड में बुद्धं शरणं गच्छामि. धम्मं शरणं गच्छामि. संघम् शरणं गच्छामि लिखा होने के साथ बुद्ध और अंबेडकर की फोटो भी छापी गयी थी. हिन्दू-मुसलमान के बीच के नफरत को त्याग कर सच्चा इंसान बनने संदेश भी था. मौके पर शिक्षाविद् डॉ मिथिलेश कुमार सिन्हा, उपेंद्र पथिक, डॉ रमेश कुमार, डॉ के नागेंद्र, डॉ विपिन कुमार, डॉ सुभाष कुमार, डॉ संतोष कुमार वर्मा, बैद्यनाथ प्रसाद, रामचरित्र प्रसाद आदि उपस्थित थे.
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