पटना के महावीर मंदिर में नवरात्रि कन्या पूजन के दौरान इन बातों का रखा जाता है खास ध्यान, जानें पूजन विधि

Navratri Kanya pujan vidhi 2022: नवरात्रि में विधि-विधान से मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि को बहुत ही खास माना जाता है. वजह इस दिन पूरे विधि-विधान से कन्या का पूजन किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में कन्या पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि आति है.
Durga puja: नवरात्रि में विधि-विधान से मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि को बहुत ही खास माना जाता है. वजह इस दिन पूरे विधि-विधान से कन्या का पूजन किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में कन्या पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि आति है. नवरात्रि के इस पावन मौके पर बिहार की राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर में भी कलश स्थापना की गई है. लेकिन यहां कन्या पूजन का विधि-विधान सामान्य से थोड़ा इतर है.
बता दें कि महावीर मंदिर में कुल 20 घट कलशों की स्थापना कर देवी की पूजा की जा रही है. दस कलश देवी भक्तों की ओर से स्थापित किये गये है, जबकि इतनी ही संख्या में कलश महावीर मंदिर की ओर से स्तापित की गई है. नवरात्रि का पूजन प्रत्येक दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के मुख्य पुरोहित जटेश झा के नेतृत्व में की जा रही है. मंदिर में कन्या पूजन को लेकर मंदिर कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि मंदिर में अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन किया जाएगा. कन्या पूजन को कंजक पूजा भी कहा जाता है. इस पूजा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है. पूजन के लिए छोटी-छोटी कन्याओं को आमंत्रित किया गया है. इसके अलावे मंदिर में आने वाली छोटी कन्याओं का भी विशेष रूप से पूजी जाएंगी.

मंदिर प्रबंधन के एक सदस्य ने बताया कि नवरात्रि में विधि-विधान से मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि में कन्या की पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है. मान्यता है कि इससे मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं. पूजन के लिए आमंत्रित छोटी कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है. इन्हे कंजक कहा जाता है. इस वजह से इस पूजा को कंजक पूजन भी कहा जाता है. इस वर्ष अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर 2022 और नवमी की तिथि 4 अक्टूबर 2022, मंगलवार के दिन है. दोनों दिन कन्या पूजन शुभ मुहूर्त में किया जाएगा.
कन्या पूजन के लिए अष्टमी को शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक है. यह कन्या पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त है.
इसके अलावे अष्टमी को ही दूसरा एक और मुहूर्त है, इस मुहूर्त को विजय मुहूर्त के नाम से जाना जाता है, जो दोपहर 2 बजकर 27 मिनट पर प्रारंभ होगा और दोपहर के 3 बजकर 14 मिनट तक यह मुहूर्त रहेगा.
कन्या पूजन नवरात्रि के नवमी को भी किया जा सकता है. नवमी को कन्या पूजन के लिए कुल तीन शुभ मुहूर्त हैं.
पहला मुहूर्त अभिजित मुहूर्त है जो सुबह 11 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगा और यह मुहूर्त दोपहर के 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा.
नवमी में कन्या पूजन के लिए दूसरा शुभ मुहूर्त के नाम है गोधूलि मुहूर्त. यह मुहूर्त शाम 5 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगा और शाम के 6 बजकर 22 मिनट तक यह मुहूर्त रहेगा.
नवमी में कन्या पूजन के लिए तीसरे शुभ मुहूर्त का योग भी बन रहा है. इस मुहूर्त का नाम अमृत मुहूर्त है. जो शाम के 4 बजकर 52 मिनट पर शाम के 6 बजकर 22 मिनट तक रहेगा. देवी भक्त अपने सुविधा अनुसार किसी भी शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन कर सकते हैं.
कन्या पूजन के लिए छोटी-छोटी कन्याओं को आमंत्रित किया गया है
कन्याओं के पैर धोने के बाद उनके हाथों में रोली, कुमकुम और अक्षत का टीका लगाकर मौली बांधा जाएगा
इसके बाद कन्याओं का पैर पूजन किया जाएगा, तब आरती भी उतारी जाएगी
पैर-पूजन के बाद कन्याओं को भोजन परोसा जाएगा
भोजन के बाद कन्याओं को उपहार दिया जाएगा
जिसके बाद कन्याओं को आतिथ्य सत्कार के साथ विदा किया जाएगा.
देवी पुराण के अनुसार कन्या की पूजा करने से देवी दुर्गा प्रसन्न होती हैं और व्रत की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कन्याओं को भोजन कराने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति भी ठीक हो जाती है. माना जाता है कि भगवान शिव ने आदि शक्ति या मां दुर्गा की सुरक्षा के लिए भैरव को नियुक्त किया था. इसलिए मां दुर्गा के साथ भगवान भैरव के रूप में कम से कम एक लड़के की पूजा करना जरूरी है.
बता दें कि देवी की आराधना के लिए मंदिर के दूसरे तल्ले पर स्थित मां दुर्गा की स्थायी प्रतिमा के समक्ष पांच कलश रखे गये हैं. वहीं मंदिर के भूतल स्थित परिसर में अस्थाई पंडाल में भी 5 कलश स्थापित किये गये. इसके अलावे चारों दिशाओं के लिए एक-एक कलश और एक मुख्य कलश रखा गया है. मंदिर प्रबंधकों के मुताबिक यहां विगत लगभग 20 वर्षों से पंडाल में भक्तों की ओर से भी 10 कलश रखे जाते हैं. जानकारी के मुताबिक कन्या पूजन का आयोजन भी इसी तल पर किया जाएगा.
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