हम जिम्मेवार तो गुजरात और एमपी में क्यों बढ़े दाम : नीतीश

Updated at : 21 Oct 2015 7:30 AM (IST)
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हम जिम्मेवार तो गुजरात और एमपी में क्यों बढ़े दाम : नीतीश

बिहारशरीफ/पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दाल के महंगा होने के लिए केंद्रीय मंत्रियों द्वारा राज्य सरकार को जिम्मेवार ठहराये जाने पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि दाल की बढ़ती कीमत के लिए अगर बिहार सरकार जिम्मेवार है, तो गुजरात, मध्यप्रदेश में दाल क्यों महंगी हो गयी है? मंगलवार को नालंदा विधानसभा क्षेत्र केअजयपुर स्कूल […]

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बिहारशरीफ/पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दाल के महंगा होने के लिए केंद्रीय मंत्रियों द्वारा राज्य सरकार को जिम्मेवार ठहराये जाने पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि दाल की बढ़ती कीमत के लिए अगर बिहार सरकार जिम्मेवार है, तो गुजरात, मध्यप्रदेश में दाल क्यों महंगी हो गयी है?
मंगलवार को नालंदा विधानसभा क्षेत्र केअजयपुर स्कूल के मैदान में आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि केंद्र में बैठे लोग कहते हैं कि अच्छे दिन आयेंगे. अब अच्छे दिन आ गये. दाल 200 रुपये किलो हो गयी. लोग भात, दाल और तरकारी खाते थे, पर अब दाल गायब है.
भात और तरकारी खाइए, नहीं तो माड़ और भात पर गुजारा करिए. बाद में उन्होंने ट्विटर पर पटना समेत देश के विभिन्न शहरों में दाल की कीमत की सूची पोस्ट की. नालंदा की सभा में मुख्यमंत्री ने कहा, हमने बिहार का विकास किया है. बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है. अभी हमें और आगे जाना है. हमने बुलंद बिहार के निर्माण की नींव रख दी है.
विकास के गति को बनाये रखने के लिए हमें आपका समर्थन चाहिए. उन्होंने कहा कि आप वोट देने के पहले परखिए, फिर वोट करिए. हमने काम किया है. विकास की रोशनी हर घर तक पहुंचायी है. सड़क, पुल-पुलिया, विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र बवनाये और सूबे में कानून का राज स्थापित किया. पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया.
इसके कारण आज महिलाएं घर से निकल कर प्रखंड व अंचल कार्यालय जा रही हैं और लोगों का काम करवा रही हैं. आगे हम महिलाओं को सरकारी नौकरी में 35 फीसदी आरक्षण देंगे.
अब महिलाएं अधिकारियों के साथ बैठ कर कार्यालय में काम करेंगी.उन्होंने कहा कि हमने बालिका पोशाक योजना शुरू की, तो स्कूलों में छात्राओं की संख्या बढ़ी. साइकिल योजना चलायी, तो बालिकाओं की हाइस्कूलों में संख्या बढ़ी. हमारे गंठबंधन का मुकाबला वादे से मुकरनेवाले लोगों से है. कहते थे काला धान लाकर हर व्यक्ति के बैंक खाते में 15-20 लाख देंगे. पर, आज तक किसी के खाते में बोहनी तक नहीं हुई है.
प्रत्येक वर्ष दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किया गया था. मगर युवाओं को जो नौकरी मिल रही थी,वह भी बंद कर दी. बिहार को विशेष पैकेज दिया. मगर इसकी अधिकांश राशि पुरानी योजनाओं की है. नीतीश कुमार ने कहा कि हमें आगे काम करने का मौका दीजिए. हम 12वीं कक्षा में पढ़ने की इच्छा रखनेवाले छात्र-छात्राओं को चार लाख तक स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड देंगे.
युवाओं को हुनर सिखायेंगे. उन्हें अंगरेजी सिखायेंगे. आर्थिक तंगी के कारण अवसर रहते हुए भी युवा उसे प्राप्त करने से वंचित न रह जाये.
इसके लिए उन्हें दो साल तक स्वयंसहायता भत्ता दिया जायेगा. हर घर तक शौचालय, नल का पानी व बिजली पहुंचाया जायेगा. भाजपावाले स्मार्ट सिटी की बात करते हैं. हम गांव को ही इतना स्मार्ट बना देंगे कि कोई स्मार्ट सिटी देखने नहीं जायेगा. नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने हमारे डीएनए को ही खराब बता दिया है. अब ऐसे लोगों से आप ही निबटिए. बिहार को चलाने के लिए बिहारी ही चाहिए, तो मैं तो यहां हूं ही. उन्होंने महिलाओं से कहा कि पहले वोट दीजिए, फिर खाना बनाइए. सभा की पथ निर्माण मंत्री ललन सिंह और ग्रामीण विकास मंत्री व प्रत्याशी श्रवण कुमार ने भी संबोधित किया.
सवाल-जवाब
केद्र सरकार : राज्य सरकार काे छह बार पत्र भेज कर बिहार में दाल की जरूरत बताने को कहा गया था, पर किसी पत्र का जवाब नहीं आया.
राज्य सरकार : केंद्र से दाल की आपूर्ति के लिए जुलाई में आये पत्र का अगस्त में ही जवाब दे दिया गया था. बिहार समेत सभी राज्यों ने दाल की खरीदने से मना कर दिया था, क्योंकि समूचे दाल को खरीद कर इसकी मिलिंग, संग्रहण और मार्केटिंग करनी पड़ती, जो संभव नहीं था. इसके लिए बिहार ने एनएएफइडी को पत्र भी लिखा था, पर केंद्र ने इस पर कोई पहल नहीं की.
केंद्र सरकार : बिहार सरकार ने जमाखोरों पर कार्रवाई नहीं की, इसलिए दाल केदाम बढ़े.
राज्य सरकार : केंद्र ने म्यांमार व अफ्रीका से पांच हजार मीटरिक टन दाल का आयात किया था. इसके मूल्य पर नियंत्रण व विपणन के लिए समय पर निर्णय नहीं लिया, जिससे कीमत बढ़ी. सिर्फ राज्यों को यह कह कर खानापूर्ति कर दी गयी कि राज्य उठाव कर लें.
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