सौ रुपये में थैला भर लाएं हरी सब्जियां,किसान बेहाल

Updated at : 25 May 2015 6:41 AM (IST)
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सौ रुपये में थैला भर लाएं हरी सब्जियां,किसान बेहाल

बिहारशरीफ : अगर आपके पॉकेट में 100 रुपये हैं, तो आप एक थैला भर ताजी एवं हरी सब्जियां घर ला सकते हैं. मजे की बात यह है कि सब्जियों के साथ सलाद के आइटम भी इसी राशि में मिल जायेंगे. अचानक औंधे मुंह गिरे सब्जियों के भाव से यह स्थिति बनी है. शहर का हर […]

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बिहारशरीफ : अगर आपके पॉकेट में 100 रुपये हैं, तो आप एक थैला भर ताजी एवं हरी सब्जियां घर ला सकते हैं. मजे की बात यह है कि सब्जियों के साथ सलाद के आइटम भी इसी राशि में मिल जायेंगे. अचानक औंधे मुंह गिरे सब्जियों के भाव से यह स्थिति बनी है. शहर का हर कोई खुदरा या थोक विक्रेता कमोबेश इस बात से वाकिफ है.
गुरुवार की सुबह जिले के सबसे बड़े थोक व खुदरा सब्जी मंडी स्थानीय रामचंद्रपुर स्थित बाजार समिति में हरी सब्जियों के मूल्यों की जानकारी लेने के बाद सिर्फ 100 रुपये में थैला भर सब्जियां मिल जाने की बात सही साबित हुई. बाजार समिति में बिक रही हरी सब्जियों में शामिल भिंडी, लौकी,बोरा व बैंगन के भाव इस कदर गिरे थे कि मानों यह गनौरा हो रहा है.
हालांकि मंडी में करैला व परबल के भव की स्थिति थोड़ी अच्छी व मजबूत देखी गयी. थोक मंडी में सब्जी का कारोबार संभाल रहे सलेमपुर के मोहन लाल की मानें तो पिछले एक माह से सब्जियों के भाव में लगातार गिरावट देखी जा रही है. ऐसी स्थिति में भले ही थोक एवं खुदरा सब्जी विक्रेताओं को मुनाफा हो रहा हो, लेकिन सब्जी उत्पादकों की स्थिति काफी तंग हो चुकी है. औने-पौने दाम पर सब्जियों के बिकने से सब्जी उत्पादकों की खुशियां छिन जा रही है. वजह इन सब्जियों के उत्पादन में लगा उत्पादक मूल्य भी निकाल पाना इनके बूते से बाहर की बात दिख रही है.
ऊपर से तुर्रा यह है कि किसानों को अपने खेतों से सब्जी मंडी तक सब्जियां लाने में लगा वाहन भाड़ा भी बामुश्किल निकल पा रहा है. बहरहाल जहां लोग 100 रुपये में थैला भर हरी व ताजी सब्जियां अपने घर लाकर सेहत सुधार रहे हैं. वहीं सब्जी उत्पादकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है.
‘‘ थोक मंडी में भिंडी, बैंगन, नेनुआ, लौकी 02 से 04 रुपये प्रति किलो आढ़तियों को बेचने पर मजबूर हो रहा हूं. नतीजतन इसका लागत मूल्य भी नहीं निकल पा रहा है.’’
ओम प्रकाश वर्मा, सब्जी उत्पादक, सलेमपुर
‘‘ औने-पौने सब्जियों के भाव होने से खेतों से मंडी तक लाने में लगा वाहन खर्च भी मुश्किल से निकल रहा है. लागत मूल्य का निकाल पाना एक सपना दिख रहा है. इसके कारण सब्जियां गनौरा हो गयी है. ’’
उदय प्रसाद, सब्जी उत्पादक, सलेमपुर
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