गन्नों की मिठास पर पायरीला का हमला
Updated at : 17 Apr 2015 8:58 AM (IST)
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पिपरासी : गंडक पार के प्रखंडों मे गन्ना के फसल में की फसल मे पायरीला नामक बीमारी का प्रकोप फैल गया है. इस बीमारी के कारण लगभग तीन हजार एकड़ गन्ना की फसल प्रभावित हो गयी है. किसानों की नगदी फसल पर इस बीमारी का संकट गहराता जा रहा है. प्रतिदिन इस रोग का प्रभाव […]
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पिपरासी : गंडक पार के प्रखंडों मे गन्ना के फसल में की फसल मे पायरीला नामक बीमारी का प्रकोप फैल गया है. इस बीमारी के कारण लगभग तीन हजार एकड़ गन्ना की फसल प्रभावित हो गयी है. किसानों की नगदी फसल पर इस बीमारी का संकट गहराता जा रहा है.
प्रतिदिन इस रोग का प्रभाव क्षेत्र बता जा रहा है. किसान अपने फसल को लेकर काफी चिंतित है. किसानों के सामने अपनी फसल को बचाने की समस्या उत्पन्न हो गयी है. किसान असहाय नजर आ रहे है. वह इस रोग से अनभिज्ञ है. बता दे कि पहली बार पायरीला की कीटों का इतना भयंकर प्रकोप देखने को मिला है. गन्ना का एक भी ऐसा खेत ऐसा नहीं बचा जहां इसका प्रकोप न फैला हो.
पायरीला के कीट गन्ना की फसल को सूखा रहे हैं. किसान नंदकिशोर शर्मा, दिनेश पांडेय, सुरेश पांडेय, समशाद अंसारी, बुन्नीलाल साह आदि ने बताया कि खेतों में गóो के अधिकांश पौधों में तितली नुमा पायरीला कीट लग गये हैं. जो पत्तियों को चूस रहे हैं और गन्ना धीरे-धीरे सूख रहा है. किसानों का कहना है कि गóो की तौल व भुगतान के लिए उन्हें पहले ही काफी परेशान होना पड़ा. अब रोग से आगामी फसल पर असर पड़ने की शंका पैदा हो गयी है.
कृषि विभाग मौन
पायरीला नामक कीट के प्रकोप से किसान परेशान है. लेकिन स्थानीय से लेकर जिला कृषि विभाग चुप्पी साधे हुए है. पिपरासी प्रखंड मे 800 एकड़, मधुबनी प्रखंड मे 1000 एकड़, भितहा मे 500 एकड़ व ठकरहां मे 700 एकड़ गन्ना की फसल प्रभावित हो चुकी है. लेकिन किसी पदाधिकारी की नजर इस ओर नहीं आ रही .यहां तक बाजार मे भी कोई ऐसी दव नहीं मिल रही है जो इस बीमारी के लिए कारगर सिद्ध हो.
क्या है पायरीला
पायरीला की प्रवृति है कि इसके शिशु एवं प्रौढ़ गन्ना फसल की पत्तियों का रस चूस कर हानि पहुंचाते हैं. यह कीट मार्च के अंत में प्रकट होकर अनुकूल वातावरण में तेजी से प्रजनन करते हुए नवंबर तक लगभग पांच पीढ़ियों द्वारा समय-समय पर फसल को हानि पहुंचाता है. सितंबर से नवंबर तक इसका तीव्र प्रकोप होता है. जुलाई-अगस्त में कम वर्षा इस कीट की वृद्धि में अधिक अनुकूल होती है.
एक सेमी लंबे भूसे के रंग के इस कीट के अगले भाग पर एक लंबी नुकीली सूंड होती है. आंखे उभरी हुई व काले रंग की होती है. शिशु अवस्था में पंखहीन होते है. जिसके पीछे दुम के आकार का सफेद बाल सूखी पत्तियों के बीच में समूह में अंडे देती है, जो सफेद बालों से ढके रहते हैं
अधिकारी बोले
जिला कृषि पदाधिकारी ओंकार नाथ सिंह ने बताया गन्ना की बीमारी की समस्या को दूर करने के लिए शीघ्र वरीय अधिकारियों से बात की जायेगी. उन्होने बताया कि भारतीय बीज भंडार बेतिया मे फोराजेन नामक दवा मिल रही है. जिसे 150 एमएल दवा को 400 लीटर पानी मे घोल कर स्प्रे करे तो फायदा होगा. इस दवा की कीमत 2000 रुपया प्रति 150 एमएल है.
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