बिना शिक्षक के चल रहा प्लस 2 हाइस्कूल घोसरावां
Updated at : 05 Apr 2015 7:23 AM (IST)
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बिहारशरीफ/गिरियक : राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय घोसरावां गिरियक में बिना शिक्षक के ही इंटरमीडिएट कक्षाओं में नामांकन लिया जा रहा है. चालू सत्र में अब तक लगभग दर्जन भर छात्र-छात्राओं द्वारा यहां नामांकन कराया गया है. हालांकि इंटरमीडिएट कक्षाओं के लिए अब तक शिक्षक उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण विद्यालय के आसपास के कई […]
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बिहारशरीफ/गिरियक : राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय घोसरावां गिरियक में बिना शिक्षक के ही इंटरमीडिएट कक्षाओं में नामांकन लिया जा रहा है. चालू सत्र में अब तक लगभग दर्जन भर छात्र-छात्राओं द्वारा यहां नामांकन कराया गया है.
हालांकि इंटरमीडिएट कक्षाओं के लिए अब तक शिक्षक उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण विद्यालय के आसपास के कई गांवों के सैकड़ों विद्यार्थी यहां अपना नामांकन कराने में हिचकिचाने लगे हैं. यही कारण है कि इंटरमीडिएट कक्षाओं के चालू सत्र में अब तक मात्र 12 विद्यार्थी ही अपना नामांकन करवाये हैं. विद्यालय के छात्र उमेश कुमार ने कहा कि जब विद्यालय में शिक्षक ही नहीं है तो नामांकन करा कर अपना भविष्य क्यों बरबाद करें.
छात्र दिलीप कुमार ने बताया कि इस क्षेत्र के अधिकांश विद्यार्थी शिक्षकों की कमी के कारण अन्य विद्यालयों में अपना नामांकन कराते हैं. हालांकि इससे ग्रामीण छात्राओं को सर्वाधिक परेशानी होती है. अधिकांश ग्रामीण छात्राओं की पढ़ाई इन्हीं कारणों से मैट्रिक के बाद ही समाप्त हो जाती है. अभिभावक भी लड़कियों को दूर-दराज के विद्यालयों में भेजना नहीं चाहते हैं.
जजर्र भवन में संचालित है माध्यमिक कक्षाएं :
उच्च विद्यालय घोसरावां एक पुराना विद्यालय है. इसके कमरे अब जजर्र हो चुके हैं. 02 खपरैल कमरे समेत कुल 05 कमरों में से अधिकांश कमरों में बरसात में पानी टपकता है. कुछ कमरों की छतों से प्लास्टर टूट कर यदा-कदा गिरते रहने से विद्यार्थी यहां बैठने में भयभीत रहते हैं. जजर्र भवन के कारण माध्यमिक कक्षाओं के छात्रों की पढ़ाई अब इंटरमीडिएट भवन में ही की जा रही है. विद्यालयों में शिक्षकों के कुल 11 सृजित पदों के विरुद्ध यहां मात्र आठ शिक्षक कार्यरत हैं. इनमें भी उर्दू व विज्ञान विषयों के शिक्षक नहीं रहने से विद्यार्थियों को काफी परेशानी हो रही है.
लिपिकीय कार्य संभाल रहे हैं शिक्षक :
विद्यालय में लिपिक का पद वर्षो से खाली रहने के कारण विद्यालय का सारा लिपिकीय कार्य शिक्षकों को ही संभालना पड़ता है. इससे जहां विद्यालय का पठन-पाठन कार्य प्रभावित होता है. वहीं विद्यार्थियों को असुविधा होती है. विद्यालय के विद्यार्थियों ने बताया कि शिक्षकों तथा लिपिक की कमी के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही है.
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