सोना ₹31,000 और चांदी ₹1.61 लाख टूटी: युद्ध के बावजूद क्यों गिर रहे हैं दाम? जानें 3 बड़े कारण

सांकेतिक तस्वीर (फोटो/Canva)
Gold-Silver Price: अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच सोने-चांदी में ऐतिहासिक गिरावट! जानिए क्यों निवेशक सोना बेचकर कैश जमा कर रहे हैं और शहरों में अलग-अलग रेट होने की असली वजह क्या है.
Gold-Silver Price: आमतौर पर दुनिया में जब भी युद्ध के बादल मंडराते हैं, तो सोने-चांदी की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. निवेशक डर के मारे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की तलाश में सोना खरीदने लगते हैं. लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी मौजूदा जंग ने इस पुरानी धारणा को उलट दिया है. 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, अब सोना अपने ‘ऑल टाइम हाई’ से ₹31,000 और चांदी ₹1.61 लाख सस्ती हो चुकी है. आखिर क्यों इस बार जंग कीमतों को घटा रही है, बढ़ा नहीं?
जंग के बीच गिरावट के 3 कारण
- कैश की जरूरत (Liquidity Crisis): युद्ध के समय अनिश्चितता इतनी बढ़ गई है कि निवेशक सोने में पैसा फंसाने के बजाय ‘कैश’ अपने पास रखना चाहते हैं. बड़े इन्वेस्टर्स अपनी होल्डिंग बेचकर पैसा निकाल रहे हैं ताकि किसी भी इमरजेंसी में लिक्विड मनी काम आ सके.
- क्रूड ऑयल (तेल) का असर: जंग की वजह से कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें $100 के पार निकल गई हैं. जब तेल महंगा होता है, तो पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ती है. इसे रोकने के लिए अमेरिका का केंद्रीय बैंक (Fed) ब्याज दरें घटा नहीं रहा है. ऊँची ब्याज दरों के कारण लोग सोने के बजाय बॉन्ड्स में पैसा लगाना बेहतर समझ रहे हैं.
- इंडस्ट्रियल डिमांड में कमी (चांदी के लिए): चांदी का इस्तेमाल सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स में बहुत होता है. युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन टूट गई है और फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं, जिससे चांदी की मांग ‘धड़ाम’ से गिर गई है.
अलग-अलग शहरों में अलग दाम क्यों ?
आपने गौर किया होगा कि दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में सोने के रेट अलग होते हैं. इसके 4 प्रमुख कारण हैं.
- ट्रांसपोर्ट और सिक्योरिटी: सोने को सुरक्षित एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का बीमा और फ्यूल खर्च दाम बढ़ा देता है.
- लोकल एसोसिएशन: हर शहर की अपनी ज्वेलर्स एसोसिएशन होती है जो स्थानीय मांग और सप्लाई को देखकर रोज सुबह ‘ओपनिंग रेट’ तय करती है.
- खरीद की मात्रा: दक्षिण भारत में सोने की खपत सबसे ज्यादा है, इसलिए वहां के ज्वेलर्स भारी मात्रा में स्टॉक खरीदते हैं, जिससे वे रेट्स में थोड़ा बदलाव कर पाते हैं.
- पुराना स्टॉक: अगर किसी ज्वेलर ने सोना ऊंचे रेट पर खरीदा है, तो वह उसे तुरंत घाटे में नहीं बेचना चाहता, जिससे स्थानीय स्तर पर कीमतों में अंतर दिखता है.
क्या अभी सोना खरीदना सही है?
विशेषज्ञों और SBI Research की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध खत्म होते ही सोने-चांदी में एक ‘स्मार्ट रिकवरी’ (तेजी) देखने को मिल सकती है. मौजूदा गिरावट उन लोगों के लिए एक मौका हो सकती है जो लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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