इतिहास के एकमात्र शिक्षक के भरोसे 99 छात्रों की पढ़ाई

Updated at : 06 Feb 2015 12:15 PM (IST)
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इतिहास के एकमात्र शिक्षक के भरोसे 99 छात्रों की पढ़ाई

बिहारशरीफ : विभागीय उपेक्षा के कारण एकंगरसराय प्रखंड का राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय तारापुर बदहाली का दंश झेल रहा है. विद्यालय के 11 वीं कक्षा में नामांकित 65 एवं 12 वीं कक्षा में 34 नामांकित विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए विद्यालय को मात्र एक इतिहास शिक्षक मिले हैं. शिक्षकों की कमी के कारण छात्र […]

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बिहारशरीफ : विभागीय उपेक्षा के कारण एकंगरसराय प्रखंड का राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय तारापुर बदहाली का दंश झेल रहा है. विद्यालय के 11 वीं कक्षा में नामांकित 65 एवं 12 वीं कक्षा में 34 नामांकित विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए विद्यालय को मात्र एक इतिहास शिक्षक मिले हैं. शिक्षकों की कमी के कारण छात्र – छात्राएं प्रतिदिन विद्यालय से दूर होते जा रहे हैं. दूसरी ओर विद्यालय के विद्यार्थी कोचिंग संस्थानों में अपनी पढ़ाई पूरी करने को विवश हो रहे हैं. विद्यालय की इस दुर्दशा से ग्रामीणों एवं उनके अभिभावकों में भारी क्षोभ व्याप्त है.
विद्यालय की छात्र नीतू कुमारी ने बताया कि विभाग की कमियों का खामियाजा क्षेत्र के छात्र – छात्रा को भुगतना पड़ रहा है. खासकर स्थानीय छात्रा का भविष्य इससे अंधकारमय हो रहा है. लड़के तो दूर दाराज जाकर भी अपनी पढ़ाई पूरी कर लेते हैं जबकि छात्रा के समक्ष इसमें कई प्रकार की बाधाएं आती है. कई अभिभावकों के बच्चे तो महंगे टयूशन एवं कोचिंग संस्थानों के शुल्क जमा करने में असमर्थ होने के कारण नामांकन के बाद घर बैठ जाते हैं.
माध्यमिक कक्षाएं भी बदहाल :विद्यालय की माध्यमिक कक्षाएं जहां अव्यवस्थित पुराने भवन में चलाये जा रहे हैं, वहीं शिक्षकों की घोर किल्लत के कारण विद्यार्थियों का कीमती समय बरबाद हो रहा है. विद्यालय की नवम वर्ग की छात्र प्रियंका कुमारी ने बताया कि यहां मात्र चार नियोजित शिक्षकों की ही नियुक्ति की गयी है. विद्यालय में कई प्रमुख विषयों गणित, अंग्रेजी, हिंदी, गृह विज्ञान के साथ – साथ विज्ञान विषयों के शिक्षक मौजूद नहीं हैं. एक तरह से विद्यालय का शैक्षणिक व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. यहां भी टयूशन कोचिंग के भरोसे ही विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी हो रही है.
विद्यालय में खेल सुविधाएं नदारद :राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय तारापुर में न तो खेल के शिक्षक हैं और न ही बच्चों को खेलने के लिए कोई खेल का मैदान ही हैं. ऐसे में विद्यालय की छात्र – छात्राएं इधर – उधर घूम कर तथा आपस में गप्प मारकर ही अपना समय व्यतीत करने को विवश हैं. विद्यालय के छात्र अरूण कुमार एवं बैजू कुमार ने बताया कि विद्यालय में शायद ही कभी कोई खेलकूद कार्यक्रम का आयोजन होता है. एक तरफ विद्यालय में शिक्षकों की कमी तथा दूसरी ओर खेल सुविधाएं नहीं रहने के कारण विद्यालय में समय काटना भी मुश्किल होता है.
कंप्यूटर शिक्षा का अभाव :विद्यालय को न कंप्यूटर मिले हैं और न ही कंप्यूटर शिक्षक ही. इससे विद्यालय में नामांकित करीब 325 छात्र – छात्राएं कंप्यूटर ज्ञान से वंचित हो रहे हैं. विद्यालय के बच्चों ने कहा कि आज के वैज्ञानिक और तकनीकी युग में भी ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे इन्हीं उपेक्षाओं के कारण कदम – कदम पर पिछड़ रहे हैं. आखिर इस प्रकार की बदहाल व्यवस्था से भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं का सामना करने में वे कैसे सक्षम हो सकेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार एवं शिक्षा विभाग को हमारी शिक्षा की कोई परवाह नहीं है.
विद्यालय में मौजूद सुविधाएं :
1. भवन – इंटरमीडिएट में 05 कमरे व माध्यमिक में 04 कमरे
2. बिजली – नहीं है.
3. पेयजल – एक चापाकल
4. शौचालय – 02
5. उपस्कर – पर्याप्त
6. खेल का मैदान – नहीं है.
7. चहारदीवारी – नहीं.
8. प्रयोगशाला – है.
9. पुस्तकालय – है.
10. शिक्षक – इंटरमीडिएट में मात्र एक शिक्षक, माध्यमिक में चार शिक्षक
11. विद्यार्थी – इंटरमीडिएट में 99 व माध्यमिक में 225
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