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सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से 15 दिनों में निकलने लगेंगी सब्जियां

Updated at : 17 Jan 2020 2:31 AM (IST)
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सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से 15 दिनों में निकलने लगेंगी सब्जियां

बिहारशरीफ : भारत व इस्रायल के सहयोग से चंडी में निर्मित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल का निर्माण किया गया है. इस सेंटर में विभिन्न प्रकार के हरी सब्जियों का उत्पादन होगा तथा उसका भंडारण भी किया जा सकेगा. फरवरी माह में इस सेंटर से हरी सब्जियों का निकलना शुरू हो जायेगा. इस सेंटर में […]

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बिहारशरीफ : भारत व इस्रायल के सहयोग से चंडी में निर्मित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल का निर्माण किया गया है. इस सेंटर में विभिन्न प्रकार के हरी सब्जियों का उत्पादन होगा तथा उसका भंडारण भी किया जा सकेगा. फरवरी माह में इस सेंटर से हरी सब्जियों का निकलना शुरू हो जायेगा. इस सेंटर में 3.42 करोड़ की लागत से स्टोरेज, वर्कशॉप, कार्यालय का प्रशिक्षण भवन का निर्माण कार्य चल रहा है, जो अंतिम चरण में है.

वर्कशॉप पूरी तरह एयरकंडीशन होगा. यहां गुणवत्ता आधारित सब्जियों की अलग-अलग पैकेजिंग होगी. यहां किसानों को आधुनिक तरीके से सब्जी की खेती की जानकारी दी जायेगी, उन्हें सब्जी उत्पादन की ट्रेनिंग भी दी जायेगी. भविष्य में यह सेंटर सब्जी उत्पादक किसानों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जायेगा. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए कृषि विभाग की जमीन लीज पर ली गयी थी, जिससे 2024 तक बढ़ाया गया है.
करीब 12 एकड़ में विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की जा रही है. यहां टमाटर, खीरा, शिमला मिर्च लाल, पीला, हरा ब्रोकली, प्याज, फूलगोभी, बिना बीज वाला बैंगन, लाल, हरा बंधागोभी, बीज रहित खीरा, देशी बैंगन, कद्दू, करेला आदि की खेती हो रही है. यहां से उत्पादित हरी सब्जियों को बिहारशरीफ व पटना के मार्केट में बेचा जायेगा.
प्रतिदिन 90 से 100 टन हरी सब्जियां बाजार में आयेंगी
भारत-इस्रायल के सहयोग से हुआ है सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल का चंडी में निर्माण
3.42 करोड़ की लागत से स्टोरेज, वर्कशॉप, ऑफिस व प्रशिक्षण भवन का हुआ है निर्माण
ड्रिप सिस्टम से होती है सिंचाई
इस सेंटर में जल संरक्षण का बेहतरीन प्रयास किया गया है. खेती में बूंद-बूंद पानी का उपयोग किया जाता है. 1000 वर्गमीटर में वाटर टैंक बनाया गया है, जिसमें 2.40 लाख लीटर पानी स्टोरेज की क्षमता है. वर्षा जल संचय की भी व्यवस्था है. सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम व नर्सरी में बूमर सिस्टम का उपयोग होता है.
कहते हैं अधिकारी
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल 3.42 करोड़ की लागत से स्टोरेज, वर्कशॉप, ऑफिस व प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण कार्य चल रहा है, जो अंतिम चरण में है. यहां करीब 27 बीघे में विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की जा रही है. अगले महीने से इस सेंटर से हरी सब्जियां मार्केट में निकलनी शुरू हो जायेगी.
पवन कुमार सिंह, मैनेजर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल, चंडी
दो हजार वर्गमीटर में हाइटेक नर्सरी : सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में दो हजार वर्गमीटर में हाइटेक नर्सरी है. इस नर्सरी में सब्जियों के पौधे उगाये जाते हैं. गर्मियों में तापमान को नियंत्रित करने के लिए वाटर कूलिंग सिस्टम की व्यवस्था है. इस नर्सरी से कोई भी किसान सब्जियों के पौधे उचित दर पर प्राप्त कर सकते हैं.
पॉली हाउस, टनल, शेड नेट हाउस में सब्जी की खेती की जाती है. यहां तापमान को नियंत्रित कर बेमौसम में भी विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती होती है. शीतग्रह के निर्माण हो जाने पर जल्दी बाजी में सब्जियों को बेचने की जरूरत नहीं होगी तथा सब्जियां खराब भी नहीं होगी.
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