नालंदा में बदल रहा मौसम, कभी लू तो कभी बारिश ने बिगाड़ा किसान के खेती का गणित

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Nalanda News: The weather is changing in Nalanda, sometimes heat

सांकेतिक तस्वीर

Nalanda News : नालंदा जैसे कृषि प्रधान जिले में किसानों की नजर हर साल नौपता पर टिकी रहती है. 25 मई से 6 जून तक चलने वाली इस अवधि को खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. किसानों का मानना है कि तेज गर्मी और धूप धान और मक्का की बेहतर पैदावार पर असर डाल सकता है.

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Nalanda News : (कंचन कुमार की रिपोर्ट) नालंदा जैसे कृषि प्रधान जिले में किसानों की नजर हर साल नौपता पर टिकी रहती है. 25 मई से 6 जून तक चलने वाली इस अवधि को खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. किसानों का मानना है कि नौपता में पड़ने वाली तेज गर्मी और धूप धान व मक्का की बेहतर पैदावार का संकेत होती है. हालांकि इस बार बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.

20 वर्षों में बदला नौपता का स्वरूप

नालंदा में बीते दो दशकों के आंकड़े बताते हैं कि नौपता का मौसम लगातार बदल रहा है. कभी भीषण गर्मी और लू ने लोगों को परेशान किया, तो कभी समय से पहले बारिश और मानसून ने राहत दी. इस बदलाव का असर खेती, स्वास्थ्य, पेयजल और बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दिया है.

2024 का नौपता रहा सबसे गर्म

वर्ष 2024 में नौपता के दौरान तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. 30 और 31 मई को चली तेज पछुआ हवा और लू ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया. कई लोगों की मौत हुई, जबकि लोकसभा चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मी भी हीटवेव की चपेट में आ गए थे.

2019 की हीटवेव बनी सबसे बड़ी चुनौती

वर्ष 2019 को पिछले 20 वर्षों का सबसे भयावह नौपता माना जाता है. तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. इसके कारण भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया और कई हैंडपंप सूख गए. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया था.

सूखे और लू ने भी बढ़ाई मुश्किलें

वर्ष 2022 और 2012 में भीषण गर्मी और कम बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति बन गई थी. वहीं 2006, 2010, 2016 और 2025 में लगातार सीवियर हीटवेव दर्ज की गई. इन वर्षों में तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा.

कोविड काल का नौपता रहा सबसे ठंडा

वर्ष 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण कम होने और लगातार बारिश के कारण तापमान नियंत्रित रहा. इस दौरान अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहा. इसे पिछले दो दशकों का सबसे ठंडा नौपता माना जाता है.

बारिश ने कई वर्षों में दी राहत

वर्ष 2021 और 2011 में प्री-मानसून बारिश और समय पूर्व मानसून सक्रिय होने से तापमान सामान्य से कम रहा. इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली और खेती को भी फायदा पहुंचा.

धान और मक्का की खेती पर सीधा असर

विशेषज्ञों के अनुसार नौपता के दौरान बढ़ती गर्मी का सीधा प्रभाव कृषि पर पड़ता है. वर्ष 2019 और 2024 में तेज गर्मी के कारण मक्का की नर्सरी सूख गई थी. वहीं धान की रोपाई 15 से 20 दिन तक प्रभावित रही. सब्जी उत्पादकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा.

बिहारशरीफ शहर में गर्मी का सबसे ज्यादा असर

कंक्रीट निर्माण और हरियाली की कमी के कारण बिहारशरीफ में अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव तेजी से बढ़ा है. गर्मी बढ़ने पर सदर अस्पताल में हीटवेव मरीजों के लिए विशेष वार्ड तक बनाना पड़ा. हिलसा, हरनौत, इस्लामपुर और राजगीर के किसान एवं मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुए.

जलवायु परिवर्तन की गंभीर चेतावनी

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि नौपता के दौरान लगातार बढ़ती गर्मी जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है. यदि जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और हरित क्षेत्र विस्तार पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. इसका असर खेती के साथ-साथ आम जनजीवन पर भी गहराता जाएगा.

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विवेक सिंह

लेखक के बारे में

By विवेक सिंह

विवेक सिंह की डिजिटल मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रही है. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कार्यरत हैं. वे बिहार के मिथिला क्षेत्र के निवासी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.

उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. अध्ययन के दौरान उन्होंने दूरदर्शन (Doordarshan) में इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें न्यूजरूम की कार्यप्रणाली, टीवी समाचार निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, फील्ड रिपोर्टिग और प्रसारण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.

पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने मीडिया प्लेटफॉर्म The Newsdharma के माध्यम से ग्राउंड रिपोर्टिंग, जनमत संग्रह (Public Opinion), सामाजिक मुद्दों की कवरेज और स्थानीय समाचारों के संकलन का व्यापक अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े विषयों पर जमीनी स्तर से रिपोर्टिंग करते हुए आम लोगों की आवाज को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य किया है.

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वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कार्यरत विवेक सिंह राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, खेल, अपराध, रियल-टाइम समाचारों, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी खबरों पर लेखन करते हैं. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization), कंटेंट प्लानिंग और ट्रेंड-आधारित समाचार लेखन की अच्छी समझ है. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, त्वरित कवरेज और कम समय में तथ्यपरक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है.

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