नालंदा में बदल रहा मौसम, कभी लू तो कभी बारिश ने बिगाड़ा किसान के खेती का गणित

Published by : Vivek Singh Updated At : 04 Jun 2026 1:48 PM

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सांकेतिक तस्वीर

Nalanda News : नालंदा जैसे कृषि प्रधान जिले में किसानों की नजर हर साल नौपता पर टिकी रहती है. 25 मई से 6 जून तक चलने वाली इस अवधि को खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. किसानों का मानना है कि तेज गर्मी और धूप धान और मक्का की बेहतर पैदावार पर असर डाल सकता है.

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Nalanda News : (कंचन कुमार की रिपोर्ट) नालंदा जैसे कृषि प्रधान जिले में किसानों की नजर हर साल नौपता पर टिकी रहती है. 25 मई से 6 जून तक चलने वाली इस अवधि को खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. किसानों का मानना है कि नौपता में पड़ने वाली तेज गर्मी और धूप धान व मक्का की बेहतर पैदावार का संकेत होती है. हालांकि इस बार बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.

20 वर्षों में बदला नौपता का स्वरूप

नालंदा में बीते दो दशकों के आंकड़े बताते हैं कि नौपता का मौसम लगातार बदल रहा है. कभी भीषण गर्मी और लू ने लोगों को परेशान किया, तो कभी समय से पहले बारिश और मानसून ने राहत दी. इस बदलाव का असर खेती, स्वास्थ्य, पेयजल और बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दिया है.

2024 का नौपता रहा सबसे गर्म

वर्ष 2024 में नौपता के दौरान तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. 30 और 31 मई को चली तेज पछुआ हवा और लू ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया. कई लोगों की मौत हुई, जबकि लोकसभा चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मी भी हीटवेव की चपेट में आ गए थे.

2019 की हीटवेव बनी सबसे बड़ी चुनौती

वर्ष 2019 को पिछले 20 वर्षों का सबसे भयावह नौपता माना जाता है. तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. इसके कारण भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया और कई हैंडपंप सूख गए. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया था.

सूखे और लू ने भी बढ़ाई मुश्किलें

वर्ष 2022 और 2012 में भीषण गर्मी और कम बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति बन गई थी. वहीं 2006, 2010, 2016 और 2025 में लगातार सीवियर हीटवेव दर्ज की गई. इन वर्षों में तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा.

कोविड काल का नौपता रहा सबसे ठंडा

वर्ष 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण कम होने और लगातार बारिश के कारण तापमान नियंत्रित रहा. इस दौरान अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहा. इसे पिछले दो दशकों का सबसे ठंडा नौपता माना जाता है.

बारिश ने कई वर्षों में दी राहत

वर्ष 2021 और 2011 में प्री-मानसून बारिश और समय पूर्व मानसून सक्रिय होने से तापमान सामान्य से कम रहा. इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली और खेती को भी फायदा पहुंचा.

धान और मक्का की खेती पर सीधा असर

विशेषज्ञों के अनुसार नौपता के दौरान बढ़ती गर्मी का सीधा प्रभाव कृषि पर पड़ता है. वर्ष 2019 और 2024 में तेज गर्मी के कारण मक्का की नर्सरी सूख गई थी. वहीं धान की रोपाई 15 से 20 दिन तक प्रभावित रही. सब्जी उत्पादकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा.

बिहारशरीफ शहर में गर्मी का सबसे ज्यादा असर

कंक्रीट निर्माण और हरियाली की कमी के कारण बिहारशरीफ में अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव तेजी से बढ़ा है. गर्मी बढ़ने पर सदर अस्पताल में हीटवेव मरीजों के लिए विशेष वार्ड तक बनाना पड़ा. हिलसा, हरनौत, इस्लामपुर और राजगीर के किसान एवं मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुए.

जलवायु परिवर्तन की गंभीर चेतावनी

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि नौपता के दौरान लगातार बढ़ती गर्मी जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है. यदि जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और हरित क्षेत्र विस्तार पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. इसका असर खेती के साथ-साथ आम जनजीवन पर भी गहराता जाएगा.

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Vivek Singh

लेखक के बारे में

By Vivek Singh

विवेक सिंह माता सीता की धरती और मिथिला का द्वार कहे जाने वाले समस्तीपुर जिले से आते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले #The_Newsdharma के साथ डिजिटल मीडिया, ग्राउंड रिपोर्टिंग , और न्यूज़ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रहा है. सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, युवा, महिला सुरक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं. सरल, तथ्यात्मक और प्रभावी लेखन शैली के माध्यम से पाठकों तक महत्वपूर्ण खबरें और मुद्दे पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. NGO अमर शहीद बिपिन सिंह फाउंडेशन के साथ जुड़कर सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण ,रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी कार्य करने का अनुभव हैं.

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