पटना : नालंदा सीट जदयू के लिए प्रतिष्ठा बन गयी है. समता पार्टी के काल से लगातार सात बार नालंदा में जीत का परचम लहरा चुकी पार्टी इस बार भी पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरी है. 1996 में समता पार्टी की टिकट पर जार्ज फर्नांडीस यहां से चुनाव जीते थे. बाद में 1998 और 1999 में जाॅर्ज साहेब ने यहां से जीत की हैटट्रिक बनायी.
2004 में नीतीश कुमार यहां से सांसद निर्वाचित हुए. नवंबर 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बनने तक उन्होंने यहां का प्रतिनिधित्व किया. इसके बाद 2006 के उपचुनाव में जदयू के रामस्वरूप प्रसाद सांसद बने. फिर 2009 और 2014 में कौशलेंद्र कुमार ने जीत हासिल की. कौशलेंद्र भी हैटट्रिक की राह पर हैं. हालांकि, टिकट बंटवारे के समय उनका विरोध था. कौशलेंद्र कुमार का मुकाबला महागठबंधन से ‘हम’ के उम्मीदवार अशोक कुमार आजाद है.
ये अतिपिछड़ों में बेहतर पैठ रखने वाले हैं. उनकी ससुराल नालंदा में ही है. नालंदा संसदीय क्षेत्र में जातीय समीकरण पर होने वाली वोटिंग को देखते हुए दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है. ऐसे में जदयू ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की टीम वहां भेजा है.
पार्टी सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में नालंदा सीट पर जीत हासिल करने के मकसद से जदयू ने करीब 25 हजार सक्रिय कार्यकर्ताओं को जनसंपर्क अभियान में लगाया है. इस अभियान की मॉनीटरिंग के लिए पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी वहां भेजे गये हैं. वे लोग वहां लगातार कैंप कर रहे हैं. हर बूथ पर भाजपा, जदयू और लोजपा के कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए लगातार बैठक चल रही है.