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इंदौर व नासिक से आवक बढ़ी तो प्याज के भाव हो गये कम

Updated at : 22 Jan 2025 12:16 AM (IST)
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इंदौर व नासिक से आवक बढ़ी तो प्याज के भाव हो गये कम

इंदौर व नासिक से आवक बढ़ी तो प्याज के भाव हो गये कम

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-एक सौ रुपए में अब मिल रहा तीन किलो प्याज

-सस्ता हुआ प्याज तो बढ़ी खपत, खरीदार भी बढ़े

मुजफ्फरपुर.

इंदौर व नासिक में नयी फसल आने के बाद से प्याज सस्ता हो गया है. पहले एक सौ में दो किलो प्याज आता था. अब उतनी ही राशि में तीन किलो प्याज मिल रहा है.पिछले दो महीने में प्याज की थोक कीमत में प्रति क्विंटल एक हजार की गिरावट आयी है. बाजार समिति की थोक मंडी में प्याज 2200 रुपए प्रति क्विंटल उपलब्ध है. प्याज की कीमत में गिरावट से इसकी खपत डेढ़ गुनी बढ़ गयी है. मांग के अनुसार यहां के व्यापारी प्याज की खेप मंगा रहे हैं. व्यापारियों की मानें तो फिलहाल प्याज की कीमत में बढ़ोतरी नहीं होगी. होली तक प्याज का भाव एक जैसा रहने की उम्मीद है. प्याज की कीमत में गिरावट से अब मुजफ्फरपुर से सटे इलाकों के व्यापारियों ने बाजार समिति से अधिक मात्रा में प्याज मंगाना शुरू कर दिया है.

रोज बाजार समिति में आ रहा 450 टन प्याज

बाजार समिति में रोज करीब 15 ट्रक प्याज उतर रहा है. एक ट्रक में 30 टन प्याज रहता है. इस लिहाज से रोज 450 टन प्याज बाजार समिति में पहुंच रहा है. यहां से होलसेल ओर खुदरा व्यापारी खरीदारी कर रहे हैं. खुदरा मंडी में प्याज 32 से 33 रुपये प्रति किलो उपलब्ध है. आलू प्याज मंडी के अध्यक्ष विजय चौधरी ने बताया कि प्याज की कीमत में गिरावट से बाजार में मांग बढ़ी है. कारोबार का ग्रोथ हुआ है. पहले की अपेक्षा कारोबारी अब अधिक मात्रा में इंदौर और नासिक से प्याज मंगा रहे हैं.

सब्जियां सस्तीं, पांच रुपये किलो पालक

इन दिनों सब्जियां भी काफी सस्ती हो गयी हैं. गोभी दस से 15 रुपये प्रति किलो बिक रहा है तो वहीं पालक का रेट पांच रुपये प्रति किलो है. सब्जियां सस्ती होने से खरीदारों को तो फायदा हो रहा है, लेकिन गांव से सब्जी लेकर आने वाले कारोबारियों को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों की मंडी से सब्जियां खरीदकर शहर की मंडियों में दुकान लगाकर कारोबार करने वाले सब्जी विक्रेताओं को शाम में औने-पौने दाम में सब्जी बेच कर वापस जाना पड़ रहा है. नयी बाजार में सब्जी बेचने वाले विक्रेता कन्हैया साह ने बताया कि शाम में जब सब्जियां बच जाती हैं तो उसे वापस फिर गांव ले जाने में भाड़ा ही अधिक खर्च हो जाता है. ऐसे में मुनाफा नहीं हो, कम से कम लागत निकल जाए, यही सोचकर सब्जियां खरीद कीमत पर ही बेच देते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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