माइटोकॉन्ड्रिया 40% क्षतिग्रस्त, फिर भी एइएस से बचा रही इम्युनिटी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Apr 2024 7:49 PM
Mitochondria 40% damaged, yet immunity protecting from AES
वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर
माइटोकॉन्ड्रिया 40% क्षतिग्रस्त होने के बावजूद इम्युनिटी बच्चों को एइएस से बचा रही है. एम्स जाेधपुर की टीम ने कहा-इम्युनिटी ठीक होने से बच्चे बीमारी से बच रहे हैं. जिले के बच्चों की इम्युनिटी पावर काफी बढ़ी है. इसी का नतीजा है कि इस वर्ष एइएस से पीड़ित होने वाले बच्चों में माइटोकॉन्ड्रिया क्षतिग्रस्त हाेने के बाद भी वे बीमारी से स्वस्थ हो रहे हैं.बीमारी बच्चों काे चपेट में तो ले ही रही है, लेकिन राहत ये है कि उनके शरीर का सेल और इम्युनिटी पावर बढ़ने के कारण वे बच रहे हैं. एम्स जाेधपुर की टीम के शाेध में यह तथ्य सामने आया है. टीम ने जिले के सर्वाधिक प्रभावित मुशहरी, मीनापुर व कांटी प्रखंड के 50 बच्चों के सैंपल लेने के बाद शाेध किया था. इधर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलायी जा रही मुहिम का भी असर दिख रहा है. जागरूकता अभियान के कारण बच्चे धूप व बगीचे में नहीं जा रहे हैं. घर में रहने के कारण शरीर का तापमान नहीं बढ़ रहा. वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपाल शंकर सहनी ने कहा कि बच्चे इम्युनिटी के कारण बीमा नहीं पड़ रहे हैं.
बच्चों की यूरिन के मेटाबॉलिज्म में भी बदलाव नहीं
शाेध में पाया गया कि इन बच्चों के पेशाब में भी काेई मेटाबॉलिज्म बदलाव नहीं हुआ. गर्मी के कारण इन बच्चों की माइटोकॉन्ड्रिया ताे क्षतिग्रस्त हुई, लेकिन काेशिकाओं से मिलने वाली एटीपी के माध्यम से उनके मस्तिष्क काे ग्लूकोज व ऑक्सीजन मिलती रही. जब भी गर्मी 40 डिग्री के करीब हुई, चार-पांच दिन के अंतराल पर बारिश हाे गई. बारिश हाेने से गर्मी कम हाे गई, इससे बच्चे का माइटोकॉन्ड्रिया फिर से चार्ज हाे जा रहा है. अभी यह पता नहीं लग सका है कि कितने प्रतिशत माइटोकॉन्ड्रिया खराब हाेने पर बच्चे बीमार हाे रहे हैं.
पावर हाउस माइटोकॉन्ड्रिया हाेता
बच्चाें के मसल्स से ऊर्जा का वाहक एटीपी (एडिनोसिन ट्राइफास्फेट) ब्रेन काे सीधी एनर्जी पहुंचाता है. इसका पावर हाउस माइटोकॉन्ड्रिया हाेता है. जब मस्तिष्क काे एनर्जी कम मिलने लगती है ताे माइटोकॉन्ड्रिया क्षतिग्रस्त हाेने लगता है. जब बच्चे भूखे पेट साेते हैं और स्वस्थ भी हाेते हैं ताे पहले फैट से एटाॅन बाॅडी ग्लूकोज और ऑक्सीजन माइटोकॉन्ड्रिया तक पहुंचाती है.लेकिन वह जैसे-जैसे कम हाेने लगती है ताे बच्चे काे चमकी और बेहोशी आने लगती है. बायप्सी की जांच में 30 बच्चों का माइटोकॉन्ड्रिया सूजा हुआ पाया गया, लेकिन ये बच्चे इसे ऑब्जर्व कर लेते हैं.
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