बच्ची के गायब होने में मानव अंग के तस्करों का हाथ तो नहीं

बच्ची के गायब होने में मानव अंग के तस्करों का हाथ तो नहीं
-सीबीआइ तस्करी के बिंदु पर जुटा रही जानकारी-बालिका गृह से 2015 में गायब हो गयी थी दिव्यांग बच्ची मुजफ्फरपुर. बालिका गृह से 2015 में गायब हुई मानसिक व शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्ची के मामले में, सीबीआई की टीम मानव अंगों की तस्करी के बिंदु पर भी जानकारी जुटा रही है. केस में टीम उत्तर बिहार में सक्रिय तस्करों के गिरोह के बारे में जांच कर रही है. आशंका है कि कहीं किशोरी को तस्करों ने ट्रैप तो नहीं कर लिया. क्योंकि बच्ची मानसिक व शारीरिक दोनों ही तरह दिव्यांग थी. ऐसे में उस बच्ची को किस तरह से व्यक्ति अपने साथ ले जा सकता है, इस बिंदु पर सीबीआइ बारीकी से जांच कर रही है. सीबीआइ ने बच्ची के गायब होने में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के बालिका गृह को संचालित करनेवाले एनजीओ, सेवा संकल्प समिति से जुड़े रहनेवालों की भी मिलीभगत की आशंका जाहिर की है. हालांकि, सीबीआइ इन सभी बिंदुओं पर बारीकी से अनुसंधान कर रही है. सीबीआइ की टीम गोपनीय तरीके से मुजफ्फरपुर समेत नेपाल के बॉर्डर इलाके से सटे क्षेत्र में मानव अंग तस्करों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है. हालांकि, सीबीआइ आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं कर रही है. — फरार बताई दो किशोरियों का भी पता नहीं बालिका गृह कांड की जांच के दौरान में पता चला था कि गृह से 24 नवंबर 2013 को चार किशोरियां फरार हो गई थीं. लेकिन, ये बच्चियां कहां और कैसे गायब हुईं, इसकी जांच नहीं हुई थी. बालिका गृह कांड के खुलासे के बाद पुलिस ने 2018 में इसकी जांच की. पुलिस ने चार में दो का सुराग ढूंढ, लेकिन फुलपरास और नई दिल्ली के पहाड़गंज की दो किशोरियों का भी कोई सुराग नहीं मिला. इस मामले में नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. नगर थाने की पुलिस ने केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. सीबीआइ ने भी इस केस की एफआइआर की कॉपी ली है. — फर्जी रिलीज आर्डर पर सौंप दी थी बच्ची इससे पहले सीबीआइ की ओर से जो प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, इसमें बताया गया था कि सीतामढ़ी सीडब्ल्यूसी के फर्जी रिलीज ऑर्डर पर बालिका गृह से 10 नवंबर, 2015 को दिव्यांग बच्ची को उसके पिता राजकुमार पासवान को सुपुर्द कर दिया गया था. राजकुमार हजारीबाग जिला के रहनेवाले हैं. लड़की को सीतामढ़ी बाल कल्याण समिति के समक्ष पिता को सुपुर्द किया गया था. इस मामले में राजकुमार पासवान व उनकी पत्नी शीतला देवी के पहचानकर्ता के रूप में उस पंचायत की मुखिया नथुनी सिंह थे. जब सीबीआइ ने जांच की तो पता चला कि जिस फर्जी रिलीज ऑर्डर पर बच्ची को बालिका गृह से उसके फर्जी पिता को दिया गया था, उस पर सीतामढ़ी सीडब्ल्यूसी की तत्कालीन अध्यक्ष मानसी समंदर और सदस्य रेणु सिंह के फर्जी हस्ताक्षर थे. रिलीज ऑर्डर असली था या नकली, इस संबंध में किसी तरह की जांच बालिका गृह का संचालन कर रही एनजीओ के कर्मचारियों ने नहीं की थी. उसी दिन बच्ची को उनके फर्जी अभिभावकों को सौंप दिया गया था. नौ साल पहले गायब हुई दिव्यांग बच्ची का सीबीआई का कोई सुराग नहीं मिल पाया है.
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