फुले फिल्म को गांव-गांव में प्रदर्शित करने पर हुई चर्चा
Updated at : 29 May 2025 9:40 PM (IST)
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Films attacking caste system screened
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मुजफ्फरपुर. फुले दंपती ने महिलाओं को शिक्षित करने के लिए जो संघर्ष किया, वह भारतीय समाज के लिए क्रांतिकारी बदलाव का वाहक बना. धार्मिक पाखंड को उन्होंने जबरदस्त चुनौती दी. उक्त बातें लेखक व विचारक डॉ हरिनारायण ठाकुर ने गुरुवार को प्रगतिशील सिने दर्शक मंच की ओर से आमगोला स्थित एक विवाह भवन में आयोजित ””””फुले फिल्म महोत्सव”””” के दौरान कहीं. चिकित्सक डॉ प्रवीण चंद्रा ने भी फुले फिल्म पर प्रकाश डाला और बहुजन समाज के खिलाफ चल रही साजिश को उजागर किया. सीनेटर डॉ संजय कुमार सुमन ने कहा कि फुले फिल्म को गांव-गांव में दिखाने की जरूरत है. फेस्टिवल में फुले, जय भीम, आर्टिकल-15, छपाक, वाटर जैसी जाति-व्यवस्था, छुआछूत, वैधव्य व सामाजिक अन्याय पर केंद्रित फिल्मों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गयी. साथ ही उन फिल्मों के कुछ खास व संदेशपरक दृश्यों को प्रदर्शित कर उसके विषयों व कथानक पर समीक्षकों ने प्रकाश डाला. संयोजन ललन भगत व मंच संचालन डॉ संतोष सारंग ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ हेम नारायण विश्वकर्मा ने किया. इस मौके पर डॉ सुशांत कुमार, बैजू रजक, डॉ रमेश ऋतंभर, डॉ अविनाश कुमार, के नीरज, राकेश साहू, डॉ विष्णुदेव यादव, डॉ श्याम कल्याण, शिवकुमार राय, सुनीता कुमारी, डॉ नीति प्रभा, विजय कुमार, योगेंद्र रजक, पवन कुमार शर्मा, नागेंद्र राय, नरेश राम, सुरेंद्र कुमार, दिनेश शर्मा, हरेंद्र कुमार, सत्यनारायण शर्मा, महेश कुमार शर्मा व उमेश राम मौजूद थे.
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