चार मेडिकल कॉलेज अभियान चलाकर एंटीबायोटिक का दुरुपयोग रोकेंगे

Updated at : 09 May 2024 6:54 PM (IST)
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चार मेडिकल कॉलेज अभियान चलाकर एंटीबायोटिक का दुरुपयोग रोकेंगे

चार मेडिकल कॉलेज अभियान चलाकर एंटीबायोटिक का दुरुपयोग रोकेंगे

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मुजफ्फरपुर. रेसिस्ट हो रहे एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को रोकने के लिए सूबे के चार मेडिकल कॉलेज जागरूकता अभियान चलायेंगे. इसकी शुरुआत एसकेएमसीएच, इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रो बायोलॉजिस्ट बिहार चैप्टर व होमी भाभा कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र ने की है. इसका उद्देश्य एंटीबायोटिक का दुरुपयोग रोकना है. जिससे आने वाले समय में भी यह दवा लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सके. पहले चरण में सूबे के डॉक्टरों के साथ बैठक की गयी है. अब होमी भाभा कैंसर अस्पताल, एसकेएमसीएच, पीएमसीएच, डीएमसीएच और एनएमसीएच एक साथ अभियान चलायेगा. इस क्रम में सूबे के डॉक्टरों को बेवजह एंटीबायोटिक दवा नहीं लिखने के लिए जागरूक किया जायेगा. लोगों को भी अभियान चला कर उन्हें बिना डॉक्टरी परामर्श के एंटीबायोटिक दवा नहीं लेने की सलाह दी जायेगी. डॉक्टरों का कहना है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसको हम रोक तो नहीं सकते लेकिन उसका नियंत्रण हमारे हाथ में है. एंटी बायोटिक का सही उपयोग, सही परामर्श व सही नीतियों से आने वाली पीढ़ियों को इसके दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है. 2015 में हुए एक सर्वे के अनुसार 58 हजार से अधिक बच्चों की मृत्यु एंटी बायोटिक रेजिस्टेंस के कारण हुई थी, जो हर साल बढ़ती जा रही है. चीन के बाद भारत में सबसे ज्यादा एंटी बायोटिक सेवन होता है. 2010 में 1250 करोड़ एंटी बायोटिक गोलियों का सेवन भारत में किया गया था. इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रो बयोलोजिस्ट के बिहार चैप्टर की अध्यक्ष प्रो. डॉ नर्मता कुमारी ने बताया कि एंटीमाइक्रोबियल दवाएं वरदान हैं, जो हर वर्ष करोड़ों जीवन बचाते हैं, लेकिन इसके बहुत अधिक सेवन और बगैर जरूरी इस्तेमाल के कारण एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस विकसित हो रहा है, जिसके कारण संक्रमण से होने वाले बीमारियों के लिये बनी एंटीबायोटिक रेसिस्ट कर रही है. यही स्थिति रही तब आसानी से ठीक होने वाला संक्रमण भी जानेवाले साबित होंगे कौन सी दवायें कर रही रेसिस्ट, हो रही रिसर्च होमी भाभा कैंसर अस्पताल में कौन-सी एंटीबायोटिक दवायें रेसिस्ट हो रही हैं, इसकी रिसर्च की जा रही है. रिसर्चर विवेकानंद गोई ने बताया कि यहां आने वाले मरीजों के पुर्जे पर दवा को देखा जा रहा है. कौन-सी दवा डॉक्टर अधिक लिख रहे हैं और किस मर्ज के लिए उसका इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका सर्वे हो रहा है. इसके अलावा जीनोम सिक्वेंसी के आधार पर भी मरीजों के अंदर कौन-सी दवा रेसिस्ट कर रही है और किस दवा का प्रभाव कितना होगा, इस पर रिसर्च शुरू होनी है, इससे दवाओं के दुरुपयोग का सही आकलन हो पायेगा.

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